मध्य पूर्व से भारत आने वाली उड़ानों की संख्या में लगातार हो रहा सुधार: केंद्र
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व से भारत आने वाली उड़ानों की संख्या में लगातार सुधार हो रहा है। यूएई से लगातार नॉन-शेड्यूल उड़ानों को ऑपरेट किया जा रहा है और अलग-अलग एयरपोर्ट्स से 80 के करीब उड़ानें बुधवार को भारत आने की उम्मीद है। यह जानकारी विदेशी मंत्रालय द्वारा दी गई।
बयान में कहा गया, सऊदी अरब और ओमान से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कतर का हवाई क्षेत्र भी आंशिक रूप से खुला होने के कारण, कतर एयरवेज द्वारा बुधवार को भारत के लिए लगभग नौ नॉन-शेड्यूल कमर्शियल उड़ानें संचालित किए जाने की उम्मीद है।
कुवैत और बहरीन के हवाई क्षेत्र अभी भी बंद हैं। सऊदी अरब से जजीरा एयरवेज और गल्फ एयर जैसी एयरलाइंस द्वारा स्पेशल नॉन-शेड्यूल उड़ानें संचालित की जा रही हैं, जिससे भारतीय नागरिकों को भारत आने में सुविधा हो रही है।
बयान में कहा गया है कि ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारत आने में सहायता दी जा रही है। भारतीय दूतावास की सहायता से 717 छात्रों और 326 भारतीय नागरिकों सहित 1,043 लोग ईरान से बाहर निकल चुके हैं।
इजरायल में फंसे भारतीय नागरिकों को जॉर्डन के रास्ते भारत आने की सुविधा दी जा रही है। कुवैत, बहरीन और इराक में लगे प्रतिबंधों को देखते हुए, भारतीय नागरिकों को सऊदी अरब के रास्ते आवाजाही की सुविधा जारी है।
28 फरवरी से अब तक लगभग 4,26,000 यात्री इस क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं। इस दौरान, इस क्षेत्र से भारत के लिए भारतीय और विदेशी एयरलाइंस की शेड्यूल और नॉन-शेड्यूल उड़ानों सहित कुल 2,149 उड़ानें संचालित हुईं।
मंत्रालय भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को स्वदेश वापस लाने में भी सहायता प्रदान कर रहा है। बयान में कहा गया है कि 18 मार्च को रियाद में दिवंगत हुए एक भारतीय नागरिक का पार्थिव शरीर भारत वापस लाया गया है और सरकार परिवार के साथ लगातार संपर्क में है।
बयान में आगे कहा गया है कि ओमान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास लापता और मृत भारतीय नागरिकों के संबंध में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं और पार्थिव शरीर को शीघ्र स्वदेश वापस लाने में सहायता कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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पंजाब सरकार की युद्ध नशेयां विरुद्ध अभियान का कमाल, आम जिंदगी में वापस लौटे नशे में धुत रहने वाले लोग
पंजाब में नशे के खिलाफ युद्ध नशेयां विरुद्ध मुहीम जारी है. अब इस मुहीम के सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार नशा उन्मूलन को सिर्फ कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रख रही है बल्कि पुनर्वास और पुन एकीकरण पर भी विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया है.
नशे में झूमने वाले लोग अब अपने परिवार से जुड़े
प्रदेश के विभिन्न जिलों में नशा पीड़ित लोग अब उपचार, परामर्श और रोजगार सहायता के माध्यम से सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं. अभिषेक कुमार (परिवर्तित नाम) की कहानी इसी बदलाव का एक उदाहरण है. अभिषेक एक जमान में नशे की लत में झूमते थे लेकिन आज स्थाई नौकरी कर रहे हैं. वे अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ गए हैं. उनका कहना है कि रोजगार ने उनको नई दिशा और जीवन में एक उद्देश्य दे दिया है.
नशा छोड़कर प्राइवेट सेक्टर में जॉब कर रहे लोग
ऐसे ही नवदीप कुमार (परिवर्तित नाम) ने परिवारिक समर्थन और उपचार के बाद नशा छोड़ा और अब प्राइवेट सेक्टर में जॉब कर रहे हैं. ऐसे ही गुरजिंदर सिंह (परिवर्तित नाम) ने भी पुनर्वास सेवाओं और परिवार के सहयोग से न सिर्फ अपनी सेहत सुधारी बल्कि स्थिरता भी हासिल की.
नौकरी मिलने से आत्मनिर्भरता और सम्मान बढ़ता है
अधिकारियों का कहना है कि सरकार की रणनीति है कि नशा पीड़ितों को सिर्फ इलाज ही देना नहीं है बल्कि उनको रोजगार देना भी शामिल है. सरकार का मानना है कि आर्थिक स्थिरता के बगैर रिकवरी अधूरी होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि नौकरी मिलने से सिर्फ आत्मनिर्भरता ही नहीं बढ़ती बल्कि समाज में सम्मान भी लौटता है. व्यक्ति इससे दोबारा नशे की ओर नहीं लौटता है. सरकार का कहना है कि ये अभियान सिर्फ नशे से मुक्ति का नहीं बल्कि एक सम्मानजनक और स्थिर जीवन की नई शुरुआत से जुड़ा हुआ है.
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