48 साल बाद जगन्नाथ मंदिर के रत्नों की गिनती शुरू:जेमोलॉजिस्ट, रजिस्टर्ड सुनार भी मौजूद, हर आभूषण की डिजिटल फोटोग्राफी हो रही
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार (खजाने) की गिनती और लिस्ट बनाने की प्रक्रिया 48 साल बाद बुधवार से शुरू हो गई। ‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार यह काम तय शुभ समय (दोपहर 12:09 से 1:45 बजे के बीच) में शुरू किया गया। इसमें केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश दिया गया। इस प्रक्रिया से मंदिर की हर दिन की पूजा-पाठ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। श्रद्धालुओं को बाहर के बैरिकेड (बाहर कथा) से दर्शन की अनुमति है, जबकि अंदर वाले हिस्से (भीतर कथा) में इस दौरान प्रवेश बंद रखा गया है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के बनाए गए नियमों के अनुसार, पहले रोज इस्तेमाल होने वाले गहनों की गिनती होगी, फिर रत्न भंडार के बाहरी कक्ष और अंत में अंदरूनी कक्ष को खोला जाएगा। 1978 में हुई थी गिनती इससे पहले 13 मई से 23 जुलाई 1978 में हुई गिनती में 454 सोने-मिश्रित वस्तुएं (128.38 किलो), 293 चांदी की वस्तुएं (221.53 किलो) और कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से यह काम जल्दी पूरा किया जाएगा। दो रत्न विशेषज्ञ (जेमोलॉजिस्ट) पहचान में मदद कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटो ली जा रही है। सोने के गहनों को पीले कपड़े में, चांदी को सफेद कपड़े में और अन्य वस्तुओं को लाल कपड़े में लपेटकर छह खास बक्सों में रखा जा रहा है। इस प्रक्रिया में मंदिर के सेवक, सरकारी बैंक के अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। रत्न भंडार काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। खजाने से रोज चाभी लाएंगे मजिस्ट्रेट, उसी दिन जमा भी करनी होगी गहनों की गिनती के लिए राज्य सरकार ने एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय पैनल प्रक्रिया की निगरानी करेगा। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के लिए अलग-अलग बॉक्स होंगे। 10 लोग आभूषणों को बॉक्स में रखेंगे। मजिस्ट्रेट खजाने से रोज रत्न भंडार की चाभी लेकर आएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे। अप्रैल 2024: चाबियां गुमीं, नहीं खुल सका रत्न भंडार ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालांकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के चेंबर तक पहुंची तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है। चाबी नहीं मिली तो हंगामा हुआ जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चल सका। 2018 में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं। इनमें कीमती पत्थर लगे हैं। साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं। पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि रत्न भंडार 2024 की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान खोला जाए। जुलाई 2024: जगन्नाथ मंदिर में 46 साल बाद खजाना निकला 18 जुलाई को ओडिशा के पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार में रखा खजाना निकाला गया था। इस काम के लिए राज्य सरकार की तरफ से गठित हाई कमेटी के 11 सदस्य गुरुवार सुबह 9:15 बजे भीतरी भंडार के अंदर गए थे। उन्हें यहां मोटे कांच की तीन और लोहे की एक (6.50 फुट ऊंची, 4 फुट चौड़ी) अलमारियां मिलीं थीं। इसके अलावा 3 फीट ऊंचे और 4 फीट चौड़े लकड़ी के दो संदूक और एक लोहे का संदूक था। सभी के अंदर कई सारे बॉक्स रखे हुए थे, जिनमें सोना था। टीम के एक सदस्य ने एक बॉक्स को खोलकर देखा गया था। इसके बाद अलमारी और संदूकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो इतने भारी थे कि जगह से हिले तक नहीं। फिर तय हुआ कि सभी बॉक्स से खजाने को निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में शिफ्ट किया जाए। टीम को इस काम को करने में 7 घंटे लग गए थे। पूरी खबर पढ़ें…
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