नीरज घेवान की 'होमबाउंड' ने रचा इतिहास, बेस्ट फिल्म व बेस्ट डायरेक्टर समेत जीते कई अवॉर्ड्स
मुंबई, 25 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय फिल्म समीक्षक संघ ने एक बार फिर सिनेमा और वेब सीरीज की प्रतिभा को पहचानने के लिए हाल ही में '8वें क्रिटिक्स चॉइस अवॉर्ड्स' का आयोजन किया था। इस समरोह में फिल्म 'होमबाउंड' ने चार श्रेणी में बाजी मारी है।
Durga Ashtami 2026: चैत्र नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी कल, नोट करें शुभ मुहूर्त और कन्या पूजन का समय
Durga Ashtami 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने समापन की ओर है. आज चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल नवरात्र की महाअष्टमी यानी चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 26 मार्च, 2026 को पड़ रही है. महाअष्टमी को नवरात्र कि नौ दिनों के खास दिनों में से एक माना जाता है. यह दिन हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टिमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन पर भक्त मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा करते हैं. इस दिन पर लोग अपने घर मे कन्या पूजन भी करते हैं. चलिए जानते हैं इस साल चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर कन्या पूजन कितने बजे से शुरू होगा.
दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि (Chaitra Navratri Durgaashtami 2026 Tithi & Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 से दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू हो जाएगी. वहीं, इस तिथि का समापन 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा.
दुर्गा अष्टमी 2026 पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त (Durga Ashtami 2026 Kanya Pujan Timing)
पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 16 मिनट से शुरू होगा और सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.
दूसरा मुहूर्त- कन्या पूजन का दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा.
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन कर सकते हैं.
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चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 2026 का शुभ योग
द्रिक पंचांग के मुताबिक, दुर्गा अष्टमी पर सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है. सर्वार्थसिद्धि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से शुरू होगा, जो 27 मार्च की सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगा. रवियोग का मुहूर्त भी यही रहने वाला है.
दुर्गा अष्टमी पर कन्य पूजन कैसे करें?
चैत्र नवरात्र की दुर्गा अष्टमी के पावन पर्व पर लोग अपने घर नौ छोटी कन्याओं को घर बुलाते हैं. इन्हें नवदुर्गा के नौ स्वरूप माना जाता है. उनकी पूजा के लिए सबसे पहले उनके चरण धोए जाते हैं, इसके बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है, उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें सात्विक भोजन परोसा जाता है. आमतौर पर ये भोजन हलवा, पुरी और काले चने का होता है. इसके बाद उन्हें उपहार व दान-दक्षिणा देकर विदा किया जाता है. कई लोग जरूरतमंद कन्याओं को इस दिन फल, भोजन, वस्त्र और पढ़ने की सामग्री भी दान करते हैं. चैत्र दुर्गा अष्टमी को बुराई की अच्छाई की जीत और नारी सम्मान का प्रतीक माना जाता है. यह दिन सनातन धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है.
दुर्गा अष्टमी पर करें मां महागौरी की पूजा
नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. महागौरी माता दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने हजारों सालों की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. इस कठोर उपवास से माता का शरीर बहुत कमजोर और काला हो गया था. भगवान शिव के प्रसन्न होने के बाद उन्होंने माता को अत्यंत गौर वर्ण प्रदान किए. इसलिए, माता पार्वती को महागौरी कहा जाने लगा. महागौरी की चार भुजाएं होती हैं. इसलिए, महागौरी को चतुर्भुज देवी भी कहते हैं. महागौरी श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका वाहन नंदी होता है. महागौरी के हाथों में त्रिशूल धारण करती हैं.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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