अमेरिका ने ईरान को 15-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसका मकसद मध्य-पूर्व के संघर्ष को खत्म करना है। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी पाबंदियां लगाना, प्रॉक्सी गुटों को समर्थन देना बंद करना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है। इज़रायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वॉशिंगटन इस प्लान पर तेहरान के साथ बातचीत को आसान बनाने के लिए एक महीने के सीज़फ़ायर की भी मांग कर रहा है।
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के ज़रिए ईरान तक पहुंचाया गया। पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच फिर से बातचीत की मेज़बानी करने की पेशकश की है, ताकि इस संघर्ष को खत्म किया जा सके, जो अब अपने चौथे हफ़्ते में है। इस मामले से परिचित एक सूत्र ने रॉयटर्स को पुष्टि की कि अमेरिका ने ईरान के साथ एक प्लान साझा किया है, लेकिन उसने इस बारे में और ज़्यादा जानकारी नहीं दी।
योजना के मुख्य बिंदु (Broad Outlines):
अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस योजना के कुछ प्रमुख पहलुओं को साझा किया है:
एक महीने का युद्धविराम: चर्चाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए 30 दिनों तक सैन्य गतिविधियों पर रोक।
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की सख्त गारंटी देनी होगी।
बैलिस्टिक मिसाइल नियंत्रण: ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों और उत्पादन सुविधाओं पर प्रतिबंध।
प्रॉक्सि समूहों को समर्थन बंद करना: क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाले समूहों को वित्तीय और सैन्य मदद खत्म करना।
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को खोलना: युद्ध के कारण बाधित हुए तेल और गैस के परिवहन मार्ग को सुरक्षित और सुचारू बनाना।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बीच कूटनीति
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समझौता नहीं होता, सैन्य कार्रवाई नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा: "राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति की संभावनाओं तलाश रहे हैं, लेकिन सैन्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) बेरोकटोक जारी रहेगा।"
ऊर्जा संकट और वैश्विक चिंता
28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को ब्लॉक किए जाने से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप की इस योजना में समुद्री रास्तों (Maritime Routes) की सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया है, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट को टाला जा सके।
क्या ईरान और इज़रायल सहमत होंगे?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं, क्योंकि तेहरान के पास अभी भी भारी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम मौजूद है। वहीं, इज़रायल, जो अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर बमबारी कर रहा है, इस शांति योजना पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।
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