राजस्थान 10वीं बोर्ड में बेटियों का दबदबा, रजनी और कनिका ने किया टॉप
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं कक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं और इस बार भी बेटियों ने अपना परचम लहराया है. इस परीक्षा परिणाम में प्रदेश की दो बेटियों, रजनी सोलंकी और कनिका शर्मा ने अपनी मेहनत और लगन से सबको हैरान कर दिया है. रजनी ने जहां 99.50% अंक हासिल कर टॉप किया है, वहीं कनिका ने 99% नंबर लाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इन दोनों ही छात्राओं की सफलता की कहानी उन लाखों स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बडे सपने देखते हैं. खास बात यह है कि दोनों ही टॉपर्स का लक्ष्य एक ही है, वे आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं.
अजमेर की रजनी सोलंकी की शानदार कामयाबी
अजमेर के बक्शी जी की कोठी इलाके में रहने वाली रजनी सोलंकी ने अपनी सफलता से पूरे राजस्थान का ध्यान अपनी ओर खींचा है. रजनी के पिता किशन सोलंकी एक छोटी सी प्रिंटिंग प्रेस चलाते हैं. रजनी ने बताया कि उनकी इस बडी कामयाबी के पीछे कोई गुप्त मंत्र नहीं है, बल्कि रोजाना की गई 4 से 5 घंटे की नियमित पढाई और अनुशासन है. उन्होंने अपनी तैयारी को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया. रजनी का मानना है कि सफलता के लिए घंटों तक किताब लेकर बैठे रहना जरूरी नहीं है, बल्कि आप जितनी भी देर पढें, पूरी एकाग्रता के साथ पढना सबसे ज्यादा जरूरी होता है.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
आज के दौर में जहां छात्र अपना काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिताते हैं, वहीं रजनी ने इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखी. रजनी ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल बहुत कम कर दिया था. वे केवल जरूरत पडने पर ही दिन में मुश्किल से एक घंटा फोन चलाती थीं. उनका कहना है कि मोबाइल जैसे भटकाव से दूर रहकर ही पढाई पर फोकस किया जा सकता है. उनके परिवार में खुशी का माहौल है और उनके पिता को अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर बहुत गर्व है.
कनिका शर्मा ने भी गाडे सफलता के झंडे
मनोहरथाना के आदर्श विद्या मंदिर स्कूल की छात्रा कनिका शर्मा ने भी इस परीक्षा में कमाल कर दिया है. कनिका ने 600 में से 594 नंबर हासिल किए हैं. उनके पिता एक एलआईसी एजेंट के रूप में काम करते हैं और उनकी मां मध्य प्रदेश में सरकारी टीचर हैं. कनिका की सफलता बताती है कि अगर परिवार का साथ और खुद का इरादा मजबूत हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. कनिका ने अपनी जीत का पूरा श्रेय अपने दादाजी, अपने गुरुजनों और अपने माता-पिता को दिया है, जिन्होंने मुश्किल समय में भी उनका हौसला बढाया.
विषयों में हासिल किए बेहतरीन नंबर
कनिका के रिजल्ट पर नजर डालें तो उनका प्रदर्शन हर विषय में शानदार रहा है. उन्होंने संस्कृत जैसे विषय में 100 में से 100 पूरे नंबर हासिल कर अपनी काबिलियत दिखाई है. वहीं अंग्रेजी में उन्हें 98 नंबर मिले हैं और बाकी सभी विषयों में उन्होंने 99-99 नंबर पाए हैं. इतनी बडी सफलता के बाद भी कनिका जमीन से जुडी हुई हैं और उनका कहना है कि यह तो बस शुरुआत है. उनके स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि कनिका शुरू से ही बहुत होनहार और अनुशासन में रहने वाली छात्रा रही है.
भविष्य में डॉक्टर बनने का है सपना
इन दोनों मेधावी बेटियों के बीच एक और बडी समानता उनका भविष्य का लक्ष्य है. रजनी और कनिका दोनों ही आगे चलकर साइंस स्ट्रीम चुनना चाहती हैं. उनका सपना है कि वे मेडिकल की पढाई करें और डॉक्टर बनकर समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करें. रजनी का कहना है कि वह चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर अपने माता-पिता का नाम और रोशन करना चाहती है. वहीं कनिका भी समाज के लिए कुछ बडा करने का इरादा रखती है. इन दोनों बेटियों ने साबित कर दिया है कि अगर मन में पक्का इरादा हो और मेहनत सच्ची हो, तो आसमान की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है.
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