‘धुरंधर’ के जसकीरत की बहन जसलीन कौर के सूट लुक हैं कमाल, फेस्टिव सीजन में करें रीक्रिएट
'धुरंधर 2' बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही है. इसमें हर एक किरदार ने अपनी कमाल की एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया है. फिल्म में जसकीरत सिंह रंगी (रणवीर सिंह) की बहन जसकीरत कौर का रोल प्ले किया है एक्ट्रेस परवीर कौर पांधर ने. पंजाबी एक्ट्रेस परवीर कौर पांधर के सूट लुक बेहतरीन हैं, जिन्हें फेस्टिव सीजन में रीक्रिएट किया जा सकता है.
कैसे होती है फिल्मों के लिए कास्टिंग, मुकेश छाबड़ा ने बताई पर्दे के पीछे की असली कहानी
Mukesh Chhabra Speak about Casting Process: फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग डायरेक्टर का रोल बेहद अहम होता है और इस फिल्ड में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का नाम सबसे ऊपर आता है. हाल ही में रणवीर सिंह (Ranveer Singh) की धुरंधर (Dhurandhar) और 'धुरंधर: द रिवेंज' (Dhurandhar: The Revenge) फिल्म रिलीज हुई थी इन दोनों मूवी की कास्टिंग भी मुकेश ने ही की थी. इन दोनों ही फिल्मों की कास्टिंग ने लोगों का ध्यान खींचा. इससे पहले भी मुकेश बजरंगी भाईजान (Bajrangi Bhaijaan), दंगल (Dangal), जवान (Jawan) और डंकी (Dunki) जैसी कई बड़ी फिल्मों के लिए कास्टिंग कर चुके हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बॉलीवुड में कास्टिंग असल में कैसे होती है और इसके पीछे क्या सच्चाई है. आइए जानते हैं-
कास्टिंग सिर्फ चेहरे से नहीं होती
मुकेश छाबड़ा (Mukesh Chhabra) ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, 'कास्टिंग सिर्फ अच्छे दिखने वाले लोगों को चुनना नहीं है. कास्टिंग का मतलब है सही किरदार के लिए सही इंसान ढूंढना. हर फिल्म की अपनी दुनिया होती है और उसी के हिसाब से कलाकार चुने जाते हैं. अगर किरदार छोटा भी हो, तब भी उसे निभाने वाला कलाकार मजबूत होना चाहिए, तभी फिल्म असरदार बनती है.'
ऑडिशन ही असली परीक्षा
मुकेश छाबड़ा के मुताबिक, किसी भी एक्टर के लिए ऑडिशन सबसे अहम स्टेप होता है. उन्होंने कहा, 'ऑडिशन में ही पता चल जाता है कि एक्टर उस रोल के लिए सही है या नहीं. कई बार बड़े स्टार्स को भी टेस्ट देना पड़ता है, खासकर जब रोल चुनौतीपूर्ण हो. नए कलाकारों के लिए तो यह और भी जरूरी होता है, क्योंकि खुद को साबित करने का यही मौका होता है.'
स्टार नहीं, किरदार बड़ा होता है
इंटरव्यू के दौरान कास्टिंग डायरेक्टर ने एक दिलचस्प बात बताई कि हर बार फिल्म के लिए स्टार जरूरी नहीं होता. उन्होंने कहा, 'कई बार हम स्टार नहीं, किरदार के हिसाब से एक्टर चुनते हैं.' यही वजह है कि उनकी कई फिल्मों में नए चेहरे देखने को मिलते हैं, जो बाद में बड़े स्टार बन जाते हैं.
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रिजेक्शन भी प्रोसेस का हिस्सा है
मुकेश छाबड़ा ने यह भी बताया कि कास्टिंग के दौरान बहुत से कलाकार रिजेक्ट होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'रिजेक्शन का मतलब यह नहीं कि आप खराब एक्टर हैं, बस आप उस रोल के लिए फिट नहीं थे.' रिजेक्शन से डरना नहीं चाहिए, बल्कि लगातार मेहनत करते रहना चाहिए.
डायरेक्टर और कास्टिंग डायरेक्टर का टीमवर्क
उन्होने आगे बताया कि कास्टिंग डायरेक्टर अकेले फैसला नहीं करता, यह पूरी तरह टीमवर्क होता है, जिसमें डायरेक्टर की सोच सबसे अहम होती है. कास्टिंग डायरेक्टर कई ऑप्शन देता है और फिर डायरेक्टर तय करता है कि कौन सा एक्टर रोल के लिए सबसे बेहतर है.
‘धुरंधर’ की कास्टिंग पर क्या बोला?
मुकेश छाबड़ा ने बताया कि धुरंधर जैसी फिल्मों में कास्टिंग सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें किरदारों की वैरायटी होती है. ऐसी फिल्मों में हर रोल का महत्व होता है, इसलिए हर कलाकार को बहुत सोच-समझकर चुना जाता है. हालांकि, इंडस्ट्री को लगातार नए चेहरों की जरूरत होती है. नए कलाकारों को मौका नहीं मिलेगा, तो इंडस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी. इसलिए हम हमेशा नए टैलेंट की खोज में रहते हैं और उन्हें सही प्लेटफॉर्म देने की कोशिश करते हैं.
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