बलूचिस्तान में एक शख्स की सजा पूरे परिवार को दी जा रही, 'अमानवीय नीति' पर दुनिया दे ध्यान: मानवाधिकार संगठन
क्वेटा, 24 मार्च (आईएएनएस)। बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में सामूहिक सजा की अमानवीय नीति जारी रखने का आरोप लगाया।
बीएनएम ने कहा, क्या आप सोच सकते हैं कि 21वीं सदी में, किसी एक इंसान के कथित अपराध की सजा पूरे परिवार को दी जाए? सामूहिक दंड एक ऐसी प्रैक्टिस है जो औपनिवेशवाद और तानाशाही सिस्टम से जुड़ी है। फिर भी, बलूचिस्तान में, पाकिस्तान सरकार इस अमानवीय पॉलिसी को लागू करना जारी रखे हुए है—और हाल ही में उसने इसे खुले तौर पर स्वीकारा भी है।
संगठन ने चिंता जताते हुए कहा कि बलूचिस्तान में, सामूहिक दंड सिर्फ एक सैद्धांतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों पीड़ित परिवारों की जीती-जागती सच्चाई है, जहां इंसाफ और कानून का राज लगभग गायब है और बुनियादी मानवाधिकारों का चरणगत तरीके से उल्लंघन होता है।
इसमें आगे कहा गया कि नतीजतन यह प्रांत एक बड़ी जेल और एक किलिंग फील्ड और यातना क्षेत्र बन कर रह गया है।
बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा पर रोशनी डालते हुए, बीएनएम ने बताया कि सिर्फ 20 दिनों के अंदर, पंजगुर जिले के अलग-अलग इलाकों से 22 बलूच युवाओं को जबरन अगवा कर दिया गया, कस्टडी में उन्हें बहुत यातना दी गई और फिर एक-एक करके मार डाला गया। बाद में उनके शव फेंक दिए गए।
इसमें आगे कहा गया, कई लोगों का एकमात्र गुनाह यह था कि उनके रिश्तेदार बलूच नेशनल मूवमेंट से जुड़े थे—या यूरोप में ह्यूमन राइट्स के लिए आवाज उठा रहे थे।
बीएनएम ने कहा कि उसके चेयरमैन, नसीम बलूच का मामला राजनीतिक दमन और सामूहिक सजा की नीति को दिखाता है, जिसमें उनके बुजुर्ग, बीमार पिता और दो रिश्तेदारों को पाकिस्तानी सेना ने सिर्फ नसीम की पॉलिटिकल भूमिका की वजह से अगवा कर लिया।
इसमें बताया गया कि बीएनएम चेयरमैन को पहले भी देश निकाला दिए जाने से पहले दो बार जबरदस्ती गायब किया गया था और बहुत अधिक यातना दी गई थी।
जैसे-जैसे बलूचिस्तान में जबरन गायब करने और दबाव डालने की घटनाएं बढ़ रही हैं वैसे-वैसे रोजाना युवक-युवतियों और यहां तक कि बच्चों को भी जबरदस्ती गायब करने की घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है। इतना ही नहीं परिजनों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का दबाव डाला जाता है और कहलवाया जाता है कि आरोपी को वो सार्वजनिक तौर पर अपना रिश्तेदार मानने से इनकार करें।
इसमें कहा गया कि कई मामलों में, पीड़ितों को कभी कोर्ट में पेश नहीं किया जाता, उन्हें कानूनी मदद देने से मना कर दिया जाता है, और महीनों या वर्षों तक हिरासत में रखने के बाद, जबरदस्ती गुनाह कबूल करने के लिए मीडिया के सामने पेश किया जाता है।
बीएनएम ने विश्व बिरादरी, मानवाधिकार संगठनों और जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद समेत वैश्विक संस्थानों से आग्रह किया कि वे बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर तुरंत ध्यान दें, स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करें और दोषियों को सजा दें।
संगठन ने वैश्विक समुदाय से यह भी अपील की कि वे पाकिस्तानी अधिकारियों पर जबरन गायब करने और सामूहिक दंड नीति को खत्म करने के लिए दबाव डालें।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बाद भी भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 5.2 प्रतिशत बढ़ा
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बाद भी भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 5.2 प्रतिशत बढ़ा है। यह जानकारी सरकार की ओर से संसद में मंगलवार को दी गई।
केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि के 679.02 अरब डॉलर की तुलना में 5.26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 714.73 अरब डॉलर हो गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2021-22 से 2024-25 की अवधि के दौरान, देश का निर्यात 6.9 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है और यह 2020-21 में 497.90 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 828.25 अरब डॉलर हो गया है।
मंत्री ने कहा कि यह निरंतर विस्तार भारत की विविध और मजबूत निर्यात वृद्धि को बनाए रखने की क्षमता को दिखाता है, जिससे चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों में भी देश वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित होता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की सक्रिय व्यापार कूटनीति नीतिगत उपायों की पूरक है। 19 मुक्त व्यापार समझौतों और 2021 से नए सिरे से किए गए प्रयासों के साथ, भारत ने प्रमुख साझेदारों के साथ आठ बड़े समझौतों को अंतिम रूप दिया है या उन्हें आगे बढ़ाया है।
मंत्री ने आगे कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जो लगभग पूरे यूरोपीय संघ के टैरिफ क्षेत्र तक पहुंच प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक समझौता है, भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और अधिक गहराई से एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) भारत का पहला एफटीए है जिसमें निवेशकों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के उद्देश्य से एक समर्पित प्रतिबद्धता शामिल है।
वहीं, न्यूजीलैंड, ओमान और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते बाजार पहुंच को व्यापक बनाएंगे, सेवाओं की गतिशीलता को बढ़ाएंगे, दीर्घकालिक निवेश को सुरक्षित करेंगे और व्यवसायों के लिए पूर्वानुमानित नियामक वातावरण का निर्माण करेंगे।
--आईएएनएस
एबीएस/
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