शेयर बाजार के निवेशकों के लिए अहम खबर, सेबी ने लागू किया नया CAS सिस्टम, प्राइस डिस्कवरी होगी बेहतर
नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) सिस्टम से घरेलू एक्सचेंज पर एक ही समय पर एक ही शेयर की अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस पर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि यह एक रणनीतिक बदलाव है और इससे मार्केट में एकरूपता आएगी और प्राइस डिस्कवरी में सुधार होगा.
अपनी एनुअल रिपोर्ट में बाजार रेगुलेटर ने कहा कि क्लोजिंग प्राइस डिस्कवरी को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए, इक्विटी कैश सेगमेंट के लिए 20 मिनट का एक खास क्लोजिंग ऑक्शन सेशन 3 अगस्त, 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है. सेबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "इक्विटी कैश सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके को दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों के साथ एक जैसा करने और सभी तरह के निवेशकों को निष्पक्ष, समान और पारदर्शी पहुंच देने के लिए सीएएस का एक फ्रेमवर्क पेश किया गया है." इसके अतिरिक्त, एनुअल रिपोर्ट में सेबी ने कहा कि भारतीय कैपिटल मार्केट में पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर एक बड़ा बदलाव देखा गया है. अब पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी 31 मार्च, 2026 तक एफपीआई इक्विटी एयूएम का लगभग 30 प्रतिशत और घरेलू म्यूचुअल फंड इक्विटी एयूएम का 28 प्रतिशत है.
भारतीय शेयरों का बढ़ा वेटेज
इस ग्रोथ के साथ-साथ एमएससीआई और एफटीएसई जैसे ग्लोबल इंडेक्स में भारतीय शेयरों का वेटेज भी बढ़ा है, जो अब 12 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के बीच है. इससे ट्रैकिंग एरर को कम करने के लिए क्लोजिंग प्राइस पर सटीक तरीके से ट्रेड पूरा करने की मांग बढ़ गई है. सेबी ने बताया, "पहले, भारत में वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी) तरीके पर निर्भरता के कारण अक्सर इंट्राडे प्राइस में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिलती थी, खासकर इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दौरान, क्योंकि मार्केट के लिए रियल-टाइम में बड़े इंस्टीट्यूशनल फ्लो को संभालना मुश्किल होता था." इन चुनौतियों से निपटने और एनवाईएसई, एलएसई और एचकेईएक्स जैसे मार्केट में अपनाए जाने वाले इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिस के अनुरूप होने के लिए, सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) शुरू किया है.
ये भी पढ़ें: सीएएस सिस्टम लागू होने के बाद सेंसेक्स की पहली एक्सपायरी, देखने को मिल सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव
वीडब्ल्यूएपी तरीके के उलट, जिसमें कैश सेगमेंट में लगातार ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 30 मिनट में हुए ट्रेड का औसत निकाला जाता है,सीएएस लिक्विडिटी को एक ही और पारदर्शी ऑक्शन में केंद्रित करता है. सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है, "खरीद और बिक्री की सभी ऑर्डर्स को एक साथ काम करने की अनुमति देकर, यह सिस्टम आपूर्ति और मांग के अधिकतम मिलान के आधार पर एक ही संतुलन मूल्य बनाने में मदद करता है. यह प्रक्रिया कीमतों में कम उतार-चढ़ाव और ट्रेड पूरा होने की ज्यादा निश्चितता सुनिश्चित करती है, जिससे ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम के समय भी क्लोजिंग प्राइस अधिक स्थिर और भरोसेमंद रहता है."
भारत और मिस्र ने डिजिटल सेवाओं में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा की: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और मिस्र ने दोतरफा निवेश बढ़ाने, आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के व्यापार को आसान बनाने के उपायों पर चर्चा की है।
पीयूष गोयल ने मिस्र के निवेश एवं विदेशी व्यापार मंत्री डॉ. मोहम्मद फरीद सालेह के साथ हुई बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। यह बैठक ब्रिक्स इंडिया 2026 व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई।
गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही डिजिटल माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के व्यापार को अधिक सरल और सुगम बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने एक्स पर लिखा, ब्रिक्स इंडिया 2026 व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की बैठक के दौरान मिस्र के निवेश एवं विदेशी व्यापार मंत्री डॉ. मोहम्मद फरीद सालेह के साथ बैठक हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाने और डिजिटल सेवाओं के व्यापार को सुगम बनाने के उपायों पर चर्चा की गई।
भारत और मिस्र के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार को देखते हुए डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इस बीच, पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि ब्रिक्स देशों के पास विनिर्माण प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, तकनीकी सहयोग को गहरा करने, मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने और टिकाऊ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने का बड़ा अवसर है।
गुरुवार को जयपुर में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत आयोजित ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि सदस्य देशों के बीच औद्योगिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने की आवश्यकता है।
गोयल ने इस अवसर पर भारत की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने, स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का विस्तार करने और तकनीक-आधारित लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









