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इधर से USS Boxer Warship की एंट्री, उधर से Arabian Sea में UK ने उतारी परमाणु पनडुब्बी, घिर गया Iran

मध्य पूर्व में युद्ध की आहट अब खुले टकराव में बदलती दिख रही है और इस बार समुद्र ही असली रणभूमि बन चुका है। अमेरिका और ब्रिटेन ने जिस तरह अपनी सैन्य ताकत को इस क्षेत्र में झोंक दिया है, उसने साफ कर दिया है कि आने वाले दिन बेहद विस्फोटक हो सकते हैं। हम आपको बता दें कि ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने अपने बेहद खतरनाक युद्धपोत यूएसएस बॉक्सर की अगुवाई में एक शक्तिशाली नौसैनिक समूह को रवाना कर दिया है, जबकि ब्रिटेन ने परमाणु शक्ति से लैस पनडुब्बी एचएमएस एनसन को अरब सागर में उतारकर हालात को और ज्यादा भयावह बना दिया है।

हम आपको बता दें कि यूएसएस बॉक्सर कोई साधारण जहाज नहीं है, बल्कि यह एक चलता फिरता सैन्य अड्डा है जो दुश्मन के गढ़ में घुसकर तबाही मचाने की क्षमता रखता है। इसे छोटे विमानवाहक पोत जैसा माना जाता है, क्योंकि यह अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों, हमला करने वाले हेलीकाप्टरों और ओस्प्रे विमानों को संचालित कर सकता है। इसका मतलब साफ है कि यह जहाज हवा और जमीन दोनों मोर्चों पर एक साथ हमला करने में सक्षम है। यही नहीं, यह सीधे दुश्मन के तट पर सैनिकों को उतारकर हमला करने की ताकत भी रखता है, जो इसे युद्ध के मैदान में सबसे घातक हथियारों में शामिल करता है।

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यूएसएस बॉक्सर अकेला नहीं है। इसके साथ यूएसएस पोर्टलैंड और यूएसएस कॉमस्टॉक जैसे जहाज भी हैं, जो मिलकर एक विशाल आधुनिक युद्ध समूह बनाते हैं। इस पूरे समूह में करीब चार हजार सैनिक और नाविक शामिल हैं, जिनमें ग्यारहवीं मरीन टुकड़ी के प्रशिक्षित जवान भी हैं। ये सभी हाल ही में कैलिफोर्निया के तट पर बड़े सैन्य अभ्यास कर चुके हैं और अब सीधे संघर्ष क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। यह तैनाती इतनी तेजी से की गई कि सैनिकों को अपनी छुट्टियां तक बीच में छोड़नी पड़ीं, जो इस बात का संकेत है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं।

रणनीतिक रूप से देखें तो यह कदम सिर्फ सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि सीधा दबाव बनाने की चाल है। अमेरिका पहले ही विमानवाहक पोत और अन्य युद्धपोत इस क्षेत्र में भेज चुका है। अब भीषण हमले की क्षमता वाले जहाजों की तैनाती यह संकेत देती है कि वह सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर जमीन पर भी सीधा हमला कर सकता है। खासकर ईरान के नियंत्रण वाले द्वीप और तेल से जुड़े ठिकाने संभावित निशाने बन सकते हैं।

दूसरी ओर ब्रिटेन ने भी अपने इरादे साफ कर दिए हैं। परमाणु शक्ति से चलने वाली पनडुब्बी एचएमएस एनसन अरब सागर के गहरे पानी में पहुंच चुकी है। यह पनडुब्बी टॉमहॉक मिसाइलों और भारी टारपीडो से लैस है, जो दूर से ही किसी भी लक्ष्य को तबाह कर सकती है। अगर ब्रिटिश प्रधानमंत्री की अनुमति मिलती है, तो यह पनडुब्बी अचानक सतह के करीब आकर मिसाइल दाग सकती है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा।

हम आपको यह भी बता दें कि ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत भी दे दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि पश्चिमी शक्तियां मिलकर ईरान को घेरने की रणनीति पर काम कर रही हैं। हालांकि ब्रिटेन यह दावा कर रहा है कि वह सीधे युद्ध में नहीं कूदना चाहता, लेकिन उसके कदम कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं।

उधर, ईरान भी चुप बैठने वाला नहीं है। उसने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई में ब्रिटेन शामिल हुआ, तो वह इसका करारा जवाब देगा। हम आपको यह भी बता दें कि पिछले सप्ताह ईरान ने डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर यह संकेत दे दिया कि उसकी मारक क्षमता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। करीब चार हजार किलोमीटर दूर स्थित इस ठिकाने को निशाना बनाना अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि ईरान अब लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो चुका है।

रणनीतिक नजरिए से यह पूरा घटनाक्रम बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। एक तरफ अमेरिका अपने बहुआयामी युद्धपोतों के जरिए समुद्र से जमीन तक हमला करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर ब्रिटेन की परमाणु पनडुब्बी गहरे पानी में छिपकर घात लगाने को तैयार है। इसके जवाब में ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है।

देखा जाये तो यह स्थिति सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बनती जा रही है। समुद्री रास्तों, खासकर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है, क्योंकि यही रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धुरी है। अगर यहां जरा भी अस्थिरता बढ़ती है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ेगा। बहरहाल, अब यह स्पष्ट है कि आने वाले हफ्ते निर्णायक होंगे। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष किसी भी वक्त बड़े युद्ध में बदल सकता है, जिसमें समुद्र, आसमान और जमीन तीनों मोर्चों पर आग भड़क उठेगी।

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West Asia में तनाव से Stock Market में कोहराम, FIIs की बिकवाली ने डुबोया Sensex

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाजारों में बेहद कमजोर रुझान के मद्देनजर सेंसेक्स और निफ्टी में सोमवार को कारोबार के दौरान करीब तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

बीएसई सेंसेक्स 1,972.77 अंक या 2.64 प्रतिशत टूटकर 72,560.19 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 636.35 अंक या 2.75 प्रतिशत फिसलकर 22,478.15 अंक पर आ गया। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से इंटरग्लोब एविएशन, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और अदाणी पोर्ट्स के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे।

हालांकि एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड के शेयर में तेजी दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भारी गिरावट में रहे। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी करीब छह प्रतिशत टूटा। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 113.6 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को बिवकाल रहे थे और उन्होंने 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,706.23 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये (करीब 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाले हैं।

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  Sports

Rajasthan Royals में नहीं मिला था मौका, अब RCB के चेयरमैन बने कुमार मंगलम बिरला के बेटे Aryaman, जानें इनके बारे में

आदित्य बिरला समूह के नेतृत्व वाले एक समूह ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 1.78 अरब रुपये (16,000 करोड़ रुपये से अधिक) में खरीद लिया। इस समूह में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह, डेविड ब्लिट्जर की बोल्ट वेंचर्स और अमेरिका स्थित ब्लैकस्टोन निवेश समूह भी शामिल हैं। समूह ने यूके स्थित डियाजियो पीएलसी की सहायक कंपनी यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) के साथ आरसीबी की पुरुष और महिला (डब्ल्यूपीएल) दोनों टीमों में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का समझौता किया। अधिग्रहण के बाद, आर्यमन बिरला फ्रेंचाइजी के अध्यक्ष बनेंगे।
 

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यह सौदा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीआई) की मंजूरी पर निर्भर है, जिसके बाद कंसोर्टियम औपचारिक रूप से फ्रेंचाइजी का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगा। एक महत्वपूर्ण घोषणा में, आर्यमन बिरला को आरसीबी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 

आर्यमन बिरला कौन हैं?

अरबपति उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला के बेटे आर्यमन ने व्यावसायिक नेतृत्व में आने से पहले पेशेवर क्रिकेट में अपना करियर बनाया था। 17 साल की उम्र में, आर्यमन ने मध्य प्रदेश क्रिकेट में अवसर तलाशने के लिए मुंबई छोड़ दिया, इससे पहले उन्हें इंग्लैंड में वेस्ट हैम्पस्टेड क्रिकेट क्लब और लंदन स्कूल्स क्रिकेट एसोसिएशन में पूर्व मिडलसेक्स क्रिकेटर पॉल वीक्स के मार्गदर्शन में खेलने का अनुभव प्राप्त हुआ था।

घरेलू क्रिकेट में उनकी पहली बड़ी सफलता 2017 में रणजी ट्रॉफी में उनके पदार्पण के साथ मिली। इससे एक साल पहले, उन्होंने सीके नायडू ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने नौ पारियों में तीन शतकों सहित 75.25 के औसत से 602 रन बनाकर सर्वश्रेष्ठ रन सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया था। नौ प्रथम श्रेणी मैचों में - जिनमें से आठ 2018-19 रणजी ट्रॉफी में खेले गए - आर्यमन ने अपनी प्रतिभा की झलक दिखाई, जिसमें ईडन गार्डन्स में बंगाल के खिलाफ उनका जुझारू पहला शतक भी शामिल था, जिसने मध्य प्रदेश को ड्रॉ दिलाने में मदद की। अपने इस कार्यकाल के दौरान, उन्होंने वर्तमान आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार और वेंकटेश अय्यर के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया, जिन्हें हाल ही में फ्रेंचाइजी ने खरीदा है।

उन्हें 2018 में राजस्थान रॉयल्स ने चुना था, लेकिन दो सीज़न में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। दिसंबर 2019 में, 22 वर्ष की आयु में, आर्यमन ने क्रिकेट से अनिश्चितकालीन विराम की घोषणा की, जिसका कारण उन्होंने खेल से संबंधित गंभीर चिंता बताया।
 

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व्यापार की ओर रुख - और फिर क्रिकेट में वापसी

क्रिकेट से ब्रेक लेने के बाद, आर्यमन ने कॉर्पोरेट जगत में कदम रखा और धीरे-धीरे आदित्य बिरला समूह में नेतृत्व की भूमिकाएँ संभालीं। उनके पास हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए (ऑनर्स), बेयस बिजनेस स्कूल से ग्लोबल फाइनेंस में मास्टर डिग्री और मुंबई विश्वविद्यालय से वाणिज्य की डिग्री है। वह वर्तमान में आदित्य बिरला मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन के बोर्ड में कार्यरत हैं और ग्रासिम इंडस्ट्रीज और आदित्य बिरला फैशन एंड रिटेल सहित प्रमुख समूह कंपनियों में निदेशक की भूमिका निभाते हैं।
Wed, 25 Mar 2026 11:55:35 +0530

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