20 राज्यों में बारिश का हाई अलर्ट, बारिश और आंधी के साथ-साथ ओले पड़ने की भी आशंका
उत्तर भारत में अचानक बारिश ने मौसम काफी ठंडा कर दिया है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर और मध्य भारत के एक बड़े हिस्से के लिए तत्काल बारिश की चेतावनी जारी की है. ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आज दिन के दौरान दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में मौसम का मिजाज तेजी से बदल सकता है.
आज कई राज्यों में बदलेगा मौसम
इन राज्यों के कई जिलों में घने बादल छाए रहने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है. उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में आज मौसम में बदलाव और तपिश का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है.
दिल्ली-एनसीआर में आज आसमान साफ रहने और तेज धूप निकलने के कारण अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे दिन में गर्मी का एहसास बढ़ेगा.
पंजाब और हरियाणा में भी मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य इलाकों में भी मौसम शुष्क बना हुआ है, हालांकि तराई के कुछ जिलों में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं. पंजाब और हरियाणा में भी मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा, लेकिन रात के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है, जो सुबह-शाम को थोड़ा सुखद बनाती है.
मध्य प्रदेश के मौसम का हाल
मध्य प्रदेश में गर्मी का तीखा असर शुरू हो चुका है और भोपाल समेत इंदौर जैसे शहरों में पारा सामान्य से ऊपर बना हुआ है.
वहीं पहाड़ी राज्यों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना बनी हुई है.
उत्तराखंड के चारधाम क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही के साथ ठंडी हवाएं चल रही हैं, जबकि निचले मैदानी इलाकों जैसे देहरादून और हरिद्वार में मौसम शुष्क और गर्म है.
हिमाचल में हो सकती है बारिश
हिमाचल के कुछ मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गरज के साथ छींटे पड़ने की भी उम्मीद है, जिससे मैदानी इलाकों की तुलना में वहां तापमान काफी कम बना हुआ है.
यूएन महासचिव की अपील: नस्लवाद को मिटाने के लिए दुनिया आए एक साथ
संयुक्त राष्ट्र, 22 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर में बढ़ते नस्लवाद को लेकर चिंता जताई है और इसे खत्म करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नस्लवाद एक पुरानी बुराई है, जो आज भी हर समाज, हर देश और हर क्षेत्र में मौजूद है।
21 मार्च को हर साल मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस’ के मौके पर अपने संदेश में गुटेरेस ने कहा कि नस्लवाद की जड़ें उपनिवेशवाद, गुलामी और दमन के इतिहास में हैं। यही कारण है कि आज भी दुनिया में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक असमानता, भेदभावपूर्ण नीतियां और कई संघर्ष देखने को मिलते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि आज के समय में डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी नफरत तेजी से फैल रही है। सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर नफरत भरी भाषा, झूठी बातें और गलत धारणाएं फैलती हैं, जो कई बार वास्तविक हिंसा और दुर्व्यवहार का रूप ले लेती हैं।
गुटेरेस ने कहा कि इसका सबसे बड़ा समाधान एकता और ठोस कार्रवाई है। उन्होंने सभी सरकारों, संस्थाओं, कंपनियों और समाज के लोगों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि हर व्यक्ति को सम्मान, न्याय, समानता और मानवाधिकार मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों को नस्लीय भेदभाव खत्म करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पूरी तरह लागू करना चाहिए और ‘डरबन घोषणा और कार्य योजना’ के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जो नस्लवाद और इससे जुड़े भेदभाव को खत्म करने के लिए ठोस कदम सुझाती है। ‘डरबन घोषणा और कार्य योजना’ को अब 25 साल पूरे हो रहे हैं। इसमें नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, जेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति नफ़रत) और संबंधित असहिष्णुता को समाप्त करने के लिए ठोस कदम शामिल हैं।
गुटेरेस ने अंत में कहा कि हमें हर दिन नस्लवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा। हमें दुनिया के हर व्यक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करनी है और इस बुराई को जड़ से खत्म करना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 1966 में इस दिवस की शुरुआत की थी, ताकि नस्लीय भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और पूरी दुनिया में इसके खिलाफ कार्रवाई को प्रोत्साहित किया जा सके।
--आईएएनएस
एएस/
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