कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एम एल जाट ने कहा कि देश में दूध उत्पादन 1950 में 1.7 करोड़ टन से बढ़कर 2025 में 24.7 करोड़ टन हो गया।
प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक जाट ने कहा कि 17.25 लाख करोड़ रुपये के पशुधन क्षेत्र में डेयरी का वर्चस्व है। यह क्षेत्र कुल उत्पादन में 65 प्रतिशत योगदान देता है और देश के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जिससे 46.1 प्रतिशत आबादी को आजीविका मिलती है।
उन्होंने हरियाणा के करनाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में पशुपालन क्षेत्र के लिए 6,153 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 16 प्रतिशत अधिक है।
इस राशि का उपयोग 20,000 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति, महाविद्यालयों और प्रयोगशालाओं को सहायता तथा सहकारी संस्थाओं को कर राहत देने में किया जाएगा।
एनडीआरआई की ओर से जारी बयान के अनुसार, जाट ने कहा कि दूध उत्पादन में वृद्धि में उत्तर प्रदेश अग्रणी है, जबकि उत्पादकता के मामले में पंजाब और हरियाणा शीर्ष पर हैं। नीति आयोग ने वर्ष 2047 तक दूध की मांग 48 से 60.6 करोड़ टन के बीच रहने का अनुमान जताया है।
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जम्मू के कटरा की गलियों में जब सुबह की हल्की धूप तवे पर पड़ती है। तो सबसे पहले यात्रियों और श्रद्धालुओं को जो खुशबू आती है, वह मन और पेट को बाती है। वह खुशबू कलाड़ी कुलचा की है। वैष्णों देवी के दर्शन की थकान को मिटाने के लिए लोग गरम, सादा, हल्का और स्वाद से भरपूर कुछ खाना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए कलाड़ी कुलचा को कटरा का पसंदीदा स्नैक्स बनाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कलाड़ी कुलचा बनाने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।
डोगरा संस्कृति और कलाड़ी का महत्व
कलाड़ी डोगरा खानपान की पहचान है। यह कोई साधारण पनीर नहीं होता है, बल्कि दूध को सुरक्षित रखने और गर्मियों में संरक्षित करने की पारंपरिक विधि से बनी 'देसी चीज' है। उसका स्वाद बेहद खास है। नमकीन, हल्की दूधिया और तवे पर सिंकते समय हल्की चटक। इसका मलाई जैसा स्वाद हर एक कौर के साथ महसूस होता है और बाद में मुंह में बचा हल्का स्वाद इसको अधिक यादगार बनाता है। यह डिश सीधे तरीके से बनाई जाती है।
तवे पर मोटा और नरम कुलचा सेंककर इसके बीच में कलाड़ी को रखा जाता है। कलाड़ी अपने ही घी में धीरे-धीरे सिंकती है और सुनहरी हो जाती है। हल्की चटक के साथ दूधिया खुशबू छोड़ती है। ऊपर से बस थोड़ा मक्खन या नमक लगाया जाता है।
मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
कटरा में सर्दी और मानसून में कलाड़ी कुलचा की मांग सबसे ज्यादा रहती है। दर्शन की थकान, ठंडी हवा, गरम और हल्का संतोषजनक स्वाद यात्रियों को काफी लुभाता है। अब यह इसलिए भी ट्रेंड बन गया है कि क्योंकि इंटरनेट मीडिया पर फूड क्रिएटर्स ने इसको प्रमोट किया है। यह डिश शादी और स्थानीय आयोजनों में परोसी जाती है। कटरा वैष्णो देवी की रसोई में इसको तैयार किया जाता है।
कलारी या कलाड़ी एक पारंपरिक भारतीय पनी है। जिसके बारे में माना जाता है कि इसको जम्मू क्षेत्र के डोगरा लोगों द्वारा विकसित किया गया था। इसको गर्मी के महीनों में दूध को ठोस रूप से संरक्षित करने के लिए बनाया गया था। खासकर तब, जब ताजा दूध स्टोर करना मुश्किल होता है। इसको भारत का मोजरेला कहा जाता है।
सामग्री
मैदा - 2 कप
खमीर (यीस्ट) - 1/2 चम्मच
पानी - आवश्यकतानुसार
नमक - 1/2 चम्मच
कलाड़ी - 100–150 ग्राम
उबले आलू - 2 (मैश किए हुए)
घी या मक्खन - 2–3 टेबलस्पून
हरी चटनी - परोसने के लिए
लोकल सीक्रेट - 1 चुटकी सूखी मेथी के पत्ते
ऐसे बनाएं
मैदा, नमक, खमीर और पानी मिलाकर नरम आटा गूथें। फिर 30 मिनट के लिए इस आटे को ढककर रख दें। अब छोटे-छोटे गोले बनाएं और हल्के गोल कुल्चे बेलें। अब कलाड़ी के टुकड़ों को मीडियम आंच पर तवे में रखें और धीरे-धीरे पलटते रहें। जब तक यह बाहर से सुनहरी परत और अंदर नमी बनी रहे।
अब कुलचे के बीच में कलाड़ी रखें और हल्का सा दबाएं। इसमें एक चुटकी सूखी मेथी डालें। यह स्थानीय स्वाद को उभारने का काम करती है और हल्का खुशबू भी देती है। कुलचे को तवे पर दोनों तरफ हल्का सा सेंके। इसके ऊपर से थोड़ा मक्खन या फिर घी लगाएं। गरम-गरम कुलचा प्लेट में रखें और दही या हरी चटनी के साथ परोसें।
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