10 सेकंड पहले मिलता है अलर्ट! धमाकों के बीच कैसे जिंदा हैं भारतीय मजदूर? ग्राउंड जीरो से सामने आई रिपोर्ट
Ground Report: लेबनान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. लेबनान की राजधानी बैरूत और बॉर्डर के पास के इलाकों में संघर्ष तेज हो गया है. ग्राउंड रिपोर्ट में इजराइल अपने एफ-16 फाइटर प्लेन का इस्तेमाल करके हवाई हमले कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ, हिजबुल्ला के लड़ाके पहाड़ों और छिपे हुए ठिकानों से मैनपोर्टेबल मिसाइल लॉन्चर के जरिए इजराइल पर रॉकेट हमले कर रहे हैं. यहां से हमारे वरिष्ठ संवाददाता राहुल डबास ग्राउंड जीरो से हालातों के बारे में बता रहे हैं.
अपाचे हेलीकॉप्टर का हो रहा इस्तेमाल
राहुल ने बताया कि इन हमलों का जवाब देने के लिए इजराइल डिफेंस फोर्स अपने अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही है. ये हेलीकॉप्टर बेहद ताकतवर माने जाते हैं और दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाकर मशीनगन, मिसाइल और रॉकेट से हमला करते हैं. अपाचे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल भारत की वायुसेना भी करती है, जिससे इसकी ताकत और अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है.
10 सेकंड पहले मिलता है अलर्ट?
डबास ने आगे बताया कि बॉर्डर के पास मौजूद शहरों में हालात काफी खतरनाक हैं. यहां रहने वाले लोगों को हमले का अलर्ट सिर्फ 10 सेकंड पहले मिलता है. जैसे ही सायरन बजता है, तुरंत बाद धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगती हैं. आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों के फटने की आवाजें भी लगातार सुनाई देती हैं, जो आने वाले रॉकेट्स को हवा में ही नष्ट करने की कोशिश करती हैं.
यह भी पढ़ें: Iran Attack on Israel: हाईफा में फिर गूंजे धमाके! ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे हैं इजराइल के हालात?
तनावपूर्ण माहौल में भी भारतीय जारी रखेंगे काम
इस तनावपूर्ण माहौल में भी कई भारतीय श्रमिक वहां काम कर रहे हैं. ये लोग मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार से आए हैं. ग्राउंड जीरो पर मौजूद राहुल डबास ने श्रमिकों से जब बातचीत की तो उन्होंने बताया है कि वे कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपना काम जारी रखेंगे. उनका मानना है कि उनका काम भारत और इजराइल के बीच दोस्ती को मजबूत बनाने में मदद करता है.
यह भी पढ़ें: Ground Report: अमेरिका ने ईरान पर पुराने मॉडल के बी-52 बॉम्बर से किया हमला, राहुल डबास से जानें इसकी वजह
मीडिया को नहीं मिली करीब जाने की अनुमति
वरिष्ठ संवाददाता के मुताबिक सुरक्षा कारणों की वजह से इजराइल डिफेंस फोर्स ने मीडिया को बॉर्डर के बिल्कुल करीब जाने की अनुमति नहीं दी. इसलिए रिपोर्टिंग बॉर्डर से करीब एक किलोमीटर दूर से ही की गई है. कुल मिलाकर, यह स्थिति बेहद संवेदनशील और खतरनाक बनी हुई है, जहां दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं और आम लोगों के लिए जीवन मुश्किल होता जा रहा है. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए देखें वीडियो…
यह भी पढ़ें: Iran Israel War: ईरान ने हाइफा Oil Refinery पर गिराई मिसाइल, ग्राउंड रिपोर्ट में देखें हमले के बाद का मंजर
यह भी पढ़ें: इजराइल और लेबनान बॉर्डर पर मौजूद इजराइल का आखिरी कस्बा, ग्राउंड जीरो से सामने आई रिपोर्ट
रिपोर्ट: आपूर्ति संकट के बीच बांग्लादेश के लिए भारत की अहमियत बढ़ी
नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच बांग्लादेश के लिए भारत की अहमियत काफी बढ़ गई है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी पर व्यापक बातचीत हुई है, लेकिन आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा को लेकर अभी तक कोई औपचारिक और बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ है।
यूरेशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2022 के बीच कंटेनर फ्रेट दरों में तेज वृद्धि और बंदरगाहों पर बढ़ते बैकलॉग के कारण बांग्लादेश को यह महसूस हुआ कि उसकी मौजूदा आपूर्ति शृंखलाएं संकट के समय के लिए तैयार नहीं थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान दवाइयों के कच्चे माल और औद्योगिक इनपुट की कमी हो गई या उनकी आपूर्ति में देरी हुई। कई जरूरी सामान दूर-दराज के बंदरगाहों पर फंस गए, जबकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ। ऐसे में सबसे तेज आपूर्ति देने वाला देश वही था, जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगी हुई है- यानी भारत।
रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी से पहले बांग्लादेश हर साल चीन और भारत से बड़ी मात्रा में दवाओं के लिए जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) आयात करता था। लेकिन जब चीन में फैक्ट्रियां बंद हुईं और वैश्विक लॉजिस्टिक्स बाधित हुआ, तब भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय कंपनियों ने घरेलू चुनौतियों के बावजूद प्रतिबंध हटने के बाद सीमा पार आपूर्ति को तेजी से बहाल किया। बेनाापोल या पेट्रापोल के रास्ते ट्रक से दवाइयों का कच्चा माल 2 दिन के भीतर ढाका पहुंच सकता है, जबकि शंघाई या रॉटरडैम से समुद्री मार्ग के जरिए आने में कहीं ज्यादा समय लगता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश का दवा उद्योग, जो दक्षिण एशिया में मजबूत माना जाता है, मुख्य रूप से तैयार दवाइयां बनाता है। लेकिन इन दवाओं के लिए जरूरी कच्चे रसायन (एपीआई) आयात पर निर्भर हैं, जिनके प्रमुख आपूर्तिकर्ता भारत और चीन हैं। ऐसे में चीन से आपूर्ति में व्यवधान के दौरान भारत एक विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरा।
ऊर्जा जरूरतों को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपने रिफाइनरी नेटवर्क और बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन के जरिए आपात स्थिति में डीजल आपूर्ति करने की क्षमता रखता है। हालांकि कुछ मौकों पर ऐसा किया भी गया है, लेकिन इसे अब तक औपचारिक समझौते का रूप नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि दोनों देशों को आपातकालीन आपूर्ति सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट, संरचित और कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था बनानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति बाधित न हो।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















