ईरान को अमेरिका और इजरायल ने दिया बड़ा जख्म!नतांज परमाणु केंद्र पर किया हमला
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हालात और गंभीर होते जा रहे हैं. ताजा घटनाक्रम में अमेरिका और इजरायल ने ईरान को एक गहर जख्म दे दिया है. अपने हवाई हमलों को और तेज करते हुए ईरान के अहम परमाणु ठिकाने नतांज को निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र में नई चिंता पैदा हो गई है.
नतांज परमाणु संयंत्र पर एयरस्ट्राइक
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक, सुबह के समय हुए हमले में नतांज परमाणु केंद्र को टारगेट किया गया. यह संयंत्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जहां यूरेनियम संवर्धन का काम होता है.
हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल जरूर बना, लेकिन अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है.
रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं, लोगों को राहत
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस हमले के बावजूद किसी तरह का रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं हुआ है. ईरानी एजेंसियों के अनुसार, संयंत्र की सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय रहीं इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कोई तत्काल खतरा अब नहीं है. लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. इस जानकारी से स्थानीय आबादी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कुछ हद तक राहत मिली है.
क्यों अहम है नतांज?
नतांज परमाणु केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है. यहां यूरेनियम को उच्च स्तर तक संवर्धित किया जाता है, जिसे लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद रहा है. इसी कारण यह संयंत्र कई बार हमलों और साइबर अटैक का निशाना भी बन चुका है.
बढ़ता टकराव और वैश्विक चिंता
अमेरिका और इजरायल द्वारा हमलों की तीव्रता बढ़ाने से यह साफ संकेत मिल रहा है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष और गहरा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्रीय संघर्ष बड़े युद्ध का रूप ले सकता है. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजार प्रभावित हो सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर दबाव बढ़ेगा.
नतांज परमाणु संयंत्र पर हुआ यह हमला मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव का एक गंभीर संकेत है. हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या रेडियोएक्टिव खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात नाजुक बने हुए हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ता है.
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Ground Report: अमेरिका ने ईरान पर पुराने मॉडल के बी-52 बॉम्बर से किया हमला, राहुल डबास से जानें इसकी वजह
Ground Report: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल एकजुट हो गए हैं. वे एक साथ आकर ईरान को निशाना बना रहे हैं. आज युद्ध का 22वां दिन है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है. अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता से लेकर कई शीर्ष अधिकारियों को मार गिराया है. इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका ने ईरान के ऊपर बी-52 बॉम्बर से हमला कर दिया है. इससे जुड़ी जानकारी हमारे संवाददाता राहुल डबास दे रहे हैं. वे इस वक्त इस्राइल में मौजूद हैं.
राहुल ने बताया कि देखिए बी-52 का इस्तेमाल क्यों हुआ, ये सबसे जरूरी हो जाता है. पहले बी-2 का इस्तेमाल होता था, लेकिन बी-52 के पास उससे ज्यादा वेट कैरिंग कैपेसिटी है. बी-52 बॉम्बर ज्यादा हथियार भी कैरी कर सकता है. हालांकि, बी-52 तकनीक के रूप से कम है और इसमें स्ट्रेंथ की भी कमी है. बी-52 बॉम्बर के इस्तेमाल से दो चीज साफ हो गई है कि ईरान के आस-पास एयर डिफेंस सिस्टम कारगर नहीं रह गया है और दूसरा-अमेरिका के पास हाई-एंड टेक्नोलॉजी हथियार खत्म हो गए है, जिस वजह से वह इसका इस्तेमाल कर रहा है.
पुराने मॉडल का है बी-52 बॉम्बर
डबास ने बताया कि बी-52 बॉम्बर बहुत बड़ा पुराने मॉडल का है. इसका डिजाइन 50s और 60s का है. खास बात है कि बी-52 के पास बहुत सारे फाइटर जेट्स भी चलते हैं, जिससे आने वाली मिसाइल्स को इंटरसेप्ट कर सके.
क्या युद्ध कंक्ल्यूड हो रहा है?
क्या अमेरिका अब युद्ध को कंक्ल्यूड कर रहा है. इस सवाल पर राहुल ने कहा कि देखिए कंक्ल्यूड करने के लिए दो चीजें चाहिए कि या तो आप जीत गए हैं या फिर दूसरे ने हार मान लिया है. दूसरे के हार मानने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है क्योंकि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. माइन्स बिछा ली गईं हैं. ईरानी रिजीम ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जब तक माफी नहीं मांगेगा, जब तक अमेरिका खाड़ी के देशों से अपने बेसेस को नहीं हटा लेता है और जब तक अमेरिका हमारे नुकसान की भरपाई के लिए पैसे नहीं देता है तब तक हम हार नहीं मानेंगे. पूरी ग्राउंड रिपोर्ट जानने के लिए देखें वीडियो…
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