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भाजपा ने केरल और पुडुचेरी के लिए जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, किसे मिले टिकट?

भाजपा (BJP) ने केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। केरल के लिए 11 और पुडुचेरी के 9 प्रत्याशियों के नामों का आधिकारिक ऐलान किया गया है।

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जिम्मेदारों का गैरजिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार

विरोध के नाम विरोध या सत्ता के लालच में राष्ट्र-हित के नकार का कोई उदाहरण मिल सकता है तो वह हमारे देश में ही मिल सकता है। आज जब समूची दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है और अमेरिका व ईरान युद्ध के दुष्परिणामों से दुनिया के लगभग सभी देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित हो रहे हैं उस दौर में देश में अराजकता का माहौल बनाये जाने के प्रयासों को किसी भी हालात में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। समझ में नहीं आता कि देश में भय और अराजकता का माहौल बनाने से क्या हासिल हो सकेगा। आज दुनिया के देशों की एक दूसरे पर निर्भरता अधिक बढ़ी है। ऐसे में दुनिया के किसी भी कौने में कोई अप्रिय घटनाएं घटित होती है तो उसका प्रभाव कमोबेस दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ता है। सबको मालूम है कि कच्चे तेल और एलपीजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कोई आज की बात नहीं है। यह कोई हमारे देश की ही समस्या हो ऐसा भी नहीं है। बल्कि हार्मुज जलडमरुमध्य से जल यातायात को बाधित होने से यह समस्या और अधिक बढ़ी है। यह भी मालूम है कि ताजिंदगी के लिए किसी भी वस्तु की किसी भी देश द्वारा संग्रहण नहीं किया जा सकता। यदि एलपीजी के हालिया संकट की ही बात की जाये तो होना तो यह चाहिए था कि ऐसे संकट के दौर में पक्ष-विपक्ष एक साथ खड़ा होता और ऐसे हालातों में आमजनता को पेनिक करने के स्थान पर हालात से निपटने में सहभागी बनते तो एक जिम्मेदार पक्ष-विपक्ष या आम नागरिक की बात होती। पर हमने तो हालात ऐसे बना दिए जैसे एलपीजी का अकाल आ गया हो और चारों तरफ आंदोलन-प्रदर्शन के हालात बनाकर जमाखोरों को प्रोत्साहित करने और आमजन में भय का वातावरण बना दिया। जिसके घर में एलपीजी का सिलेण्डर था भी वह भी एक और सिलेंडर लाने की दौड़ में लग गया और इससे हालात बनने के स्थान पर बिगड़ने वाले होने लगे। होना तो यह चाहिए था कि विपक्षी भी सरकार के साथ खड़े होकर एक और आम जनता को हालात से निपटने के लिए प्रेरित करते वहीं दूसरी और ऐसे समन्वित प्रयास किये जाते जिससे विदेशों से एलपीजी लाने में आ रही दिक्कतों का हल खोजा जा सकता। गैरजिम्मेदारान हरकत तो इसी से समझा जा सकता है कि सरकार के प्रयासों से जब एलपीजी के दो जहाज होर्मुज जलडमरुमध्य से आने लगे तो यहां तक कहा जाने लगा कि इन जहाजों पर झण्डा अवश्य भारत का है पर इनमें उपलब्ध एलपीजी तो किसी अन्य देश के लिए है। धरने प्रदर्शन और हालात को बदतर बनाने के प्रयास किसी भी हालत में देशहित या देशवासियों के हित में नहीं कहे जा सकते। भले ही यह समझते हो कि हम देशवासियों के हित में सरकार को घेर रहे हैं। सही मायने में देखा जाए तो यह सरकार को घेरना नहीं अपितु देश के प्रति अपने दायित्वों से हटने और पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना गतिविधि ही कही जानी चाहिए।

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यह वहीं भारत देश है जब लाल बहादुर शास्त्री के समय अन्न संकट आया तो एक आह्वान पर छोटे बड़े सभी ने एक दिन सोमवार का व्रत रखना आरंभ कर दिया। पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग आज भी उस आह्वान के चलते आज भी सोमवार का व्रत करते हुए मिल जाएंगे। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि 1971 के बांग्लादेश के युद्ध के समय समूचा देश इन्दिरा गांधी के साथ एक स्वर में स्वर मिला रहा था। आज पता नहीं ऐसे हालात कैसे होने लगे हैं कि ऑपरेशन सिन्दुर, सर्जिकल स्ट्राइक या अन्य सैन्य गतिविधियों पर भी प्रश्न उठाये जाने लगे हैं। संभवतः दुनिया के किसी भी देश में इस तरह की बात नहीं होती होगी।

जहां तक एलपीजी की बात है तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक समय था जब एलपीजी कनेक्शन के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था। सामान्य परिस्थितियों में भी सिलेंडर प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों से भी दो चार होना पड़ता था। धरातल पर देखेंगे तो हालात की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि आज 31.3 मिलियन टन एलपीजी गैस की खपत है। देश में 31 करोड़ सक्रिय एलपीजी धरेलू कनेक्शन है। समूचे देश की बात की जाए तो प्रतिदिन ओसतन 50 से 60 लाख एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता होती है। ऐसे में मांग और आपूर्ति बनाये रखना अपने आप में दुष्कर है पर हालिया संकट को अलग कर दिया जाए तो पिछले कुछ सालों से एलपीजी या पेट्रोल आदि को लेकर देश में किसी तरह का संकट देखने को नहीं मिला। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार्मुज जलडमरुमध्य से दो जहाज भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। सरकार द्वारा भारतीय जहाजों को निर्बाध रुप से रास्ता दिलाने के प्रयास जारी है। ऐसे हालातों के बावजूद सकारात्मक परिणाम प्राप्त होना बड़ी बात है।

इस संकट के दौर में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे आना देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व हो जाता है। हालात हमारे सामने हैं, सरकार के प्रयास भी हमारे सामने हैं, ऐसे में जमाखोरी और कालाबाजारी को निरुत्साहित करना हम सबका दायित्व होना चाहिए। आवश्यकता नहीं होने पर भी जबरदस्ती सिलेण्डर का स्टॉक करने से बचना चाहिए। वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाये रखने में सहभागी बनना चाहिए। जब तक हालात सामान्य नहीं होते हैं तब तक जबरदस्ती पेनिक होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसे तत्व जो हालात को व्यवस्थित करने के स्थान पर बिगाडने व पेनिक करने व जमाखोरी और कालाबाजारी को प्रोत्साहित कर रहे हो उन्हें बेनकाब करने के लिए आगे आना होगा। यदि ऐसे दौर में हमें एक जुट होना होगा और राष्ट्रहित को ही सर्वोपरी मानना होगा।

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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