असम कांग्रेस ने उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी की:कर्नाटक उपचुनाव- पार्टी की घोषणा के बिना उम्मीदवारों का नामांकन, कोलकाता में बीजेपी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने शुक्रवार को सात उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी की। इससे 126 सीटों वाली विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की कुल संख्या 94 हो गई है। इस लिस्ट 2024 में BJP छोड़कर कांग्रेस में आए में जयंत बोरा भी शामिल हैं। उन्हें बिस्वनाथ सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कर्नाटक में बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए कांग्रेस के टिकट के दावेदारों ने शुक्रवार को अपने नामांकन दाखिल कर दिए। पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है और दावेदारों के बीच टिकट को लेकर खींचतान जारी है। उधर, कोलकाता में BJP कार्यकर्ताओं के एक गुट ने शुक्रवार को पार्टी के पश्चिम बंगाल मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। बेलेघाटा इलाके के करीब 50 पार्टी कार्यकर्ता इसमें शामिल रहे। उन्होंने उम्मीदवार पार्थ चौधरी को तुरंत बदलने की मांग की। उनका आरोप था कि संगठनात्मक कामों में चौधरी की भागीदारी बहुत कम है। साथ ही चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट 23 मार्च को जारी होने की संभावना है। 19 मार्च को होने वाली लिस्ट की रिलीज आखिरी समय पर टाल दी गई थी, क्योंकि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी। असम में कांग्रेस ने रइजर दल के लिए 11 सीटें छोड़ीं AICC की प्रेस रिलीज के अनुसार, कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगी राइजर दल के लिए 11 सीटें छोड़ी हैं। कांग्रेस ने अपने गठबंधन का विस्तार किया है और असम विधानसभा चुनावों के लिए राइजर दल के साथ हाथ मिलाया है। असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और राइजर दल के नेता अखिल गोगोई ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में असम जातीय परिषद (AJP), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (CPI ML), और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (APHLC) भी शामिल हैं। कर्नाटक उपचुनाव- कांग्रेस विधायकों के निधन के बाद खाली हुईं सीटें कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीटों पर उपचुनाव मौजूदा कांग्रेस विधायकों एच.वाई. मेती और शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद हो रहे हैं। कांग्रेस के उम्मीदवारों ने इन सीटों पर ही बिना घोषणा के नामांकन दाखिल कर दिए। ये तब हुआ जब कर्नाटक के प्रभारी AICC महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डी.के. शिवकुमार सीटों के लिए उम्मीदवारों के बारे में चर्चा कर रहे थे। बाद में पत्रकारों से सुरजेवाला ने कांग्रेस के दोनों सीटें जीतने का विश्वास जताया और जोर देकर कहा कि पार्टी एकजुट है। BJP ने अपनी केंद्रीय चुनाव समिति की मंज़ूरी के बाद बागलकोट से वीरभद्रय्या चारंतिमठ और दावणगेरे दक्षिण से श्रीनिवास टी. दासकरियप्पा के नामों की घोषणा पहले ही कर दी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है और चुनाव 9 अप्रैल को होंगे। पुडुचेरी सीएम रंगासामी ने दो विधानसभा सीटों से नामांकन भरा मुख्यमंत्री और AINRC के संस्थापक एन. रंगासामी ने शुक्रवार को विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन भरा। उन्होंने रंगासामी ने थट्टांचवाडी और मंगलम सीटों से नामांकन भरा। थट्टांचवाडी उनकी पारंपरिक सीट रही है और अब वह इस सीट को अपने पास बनाए रखना चाहते हैं। कृषि मंत्री थेनी सी. जेकुमार (AINRC) 2021 के चुनावों में मंगलम सीट से विजयी रहे थे। वह आगामी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। रंगासामी ने 2021 के चुनाव दो सीटों से लड़े थे - थट्टांचवाडी और यनम, जो आंध्र प्रदेश में स्थित एक क्षेत्र है। वह थट्टांचवाडी से विजयी रहे, वहीं 2021 में यनम में उन्हें एक निर्दलीय उम्मीदवार, गोलापल्ली श्रीनिवास अशोक के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल… 4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। केरल- दक्षिण का इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है। गुजरात-महाराष्ट्र सहित 6 राज्यों की 8 सीटों पर उपचुनाव
युद्धों से सबक-भारत नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी कर रहा:6th जेनरेशन फाइटर जेट्स पर भी काम; संसद में पेश हुई रक्षा समिति की रिपोर्ट
ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है। भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है। संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है। उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘6th जेन’ विमान देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है। ये खूबियां होंगी… हाइपरसोनिक गति: सिक्स्थ जेन प्लेन में ध्वनि की गति से 5 गुना तक तेज उड़ने की क्षमता हो सकती है अडैप्टिव शेप: विमान के विंग्स जरूरत के हिसाब से हवा में ही बनावट बदलने में सक्षम होंगे फ्लाइंग सी4आईएसआर: यह एक उड़ते हुए ‘कमांड सेंटर’ की तरह काम कर सकेगा डुअल मोड इंजन: इसमें एक उन्नत इंजन होगा जो न केवल विमान को शक्ति देगा बल्कि एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ठंडा रखने और बिजली देने में मदद करेगा। डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है। ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर… रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़ 1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है। सेना को मिलने वाले बजट में मुख्य रूप से 4 पार्ट होते हैं : 1. कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी हथियार खरीद के बजट में 22% की बढ़त इस बार तीनों सेनाओं के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर 2.19 लाख करोड़ रुपए मिले हैं, जो पिछले साल से 21.84% ज्यादा है। पिछले साल यह 1.80 लाख करोड़ रुपए था। इस बजट के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल हथियार खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर होता है। 2. रेवेन्यू खर्च यानी सैलरी भी बढ़ सकती है इसमें सेना के वेतन, भत्ते और दैनिक संचालन का खर्च शामिल है। इसमें लगातार वृद्धि हुई है। 3.रिटायर्ड सैनिकों के लिए पेंशन बजट डिफेंस पेंशन का बजट एक बड़ा हिस्सा है, जो पूर्व सैनिकों के लिए है, जिसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 4. सिविल डिफेंस बजट में मामूली कटौती इसमें रक्षा मंत्रालय के नागरिक प्रशासनिक खर्च और कोस्ट गार्ड के खर्चे शामिल होते हैं, जिनमें समय-समय पर मामूली बदलाव होते रहते हैं। डिफेंस बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का असर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बजट देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे सेना की तैयारियां और ज्यादा मजबूत होंगी।’ 114 राफेल की डील, नए एयरक्राफ्ट और इंजन पर खर्च रक्षा बजट में सबसे ज्यादा ध्यान लड़ाकू विमान और एयरो इंजन पर दिया गया है। इसके लिए 63,733 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, नेवी बेड़े के लिए 25,024 करोड़ रुपए दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-फ्रांस के बीच 114 राफेल जेट की डील होने वाली है। रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 17 हजार करोड़ रुपए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी खर्च बढ़ाया गया है। इसके लिए 17,250 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस रकम से नई तकनीक, स्वदेशी हथियार और आधुनिक सिस्टम विकसित किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि भारत सिर्फ हथियार खरीदे नहीं, बल्कि बनाए भी। कस्टम ड्यूटी हटाने से डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा वित्त मंत्री ने बजट में विमान और रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होने वाले इम्पोर्टेड कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे फैसले से देश की डिफेंस और एयरोस्पेस इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलेगा। उत्पादन सस्ता होगा और निजी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा। डिफेंस बजट में भारत, चीन से पीछे लेकिन पाकिस्तान से आगे पिछले साल चीन का रक्षा बजट करीब 247 बिलियन डॉलर यानी 22.6 लाख करोड़ रुपए रहा। अनुमान है कि इस साल 2026 में ये 300 बिलियन डॉलर यानी 27 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है। वहीं पाकिस्तान ने भी रक्षा बजट में तेज बढ़ोतरी की है। पिछले साल उसने ऑपरेशन सिंदूर के बाद 81 हजार करोड़ का डिफेंस बजट पेश किया, जो 2024 से 20% ज्यादा था। हालांकि, 2025 में रक्षा बजट में बढ़ोतरी के लिए पाकिस्तान को अपने कुल बजट में 7% की कटौती करनी पड़ी थी। जबकि भारत ने कुल बजट को पिछले साल से लगभग 8% बढ़ाते हुए रक्षा बजट को 15% बढ़ाया है। ------------ ये खबर भी पढ़ें… 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान के मॉडल को मंजूरी:बनाने में निजी कंपनियां मदद करेंगी भारत में बनने वाले 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोडक्शन मॉडल को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने पिछले साल 27 मई को यह जानकारी दी थी। रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए सरकारी के साथ निजी कंपनियों को भी बोली लगाने का मौका दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
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