आपका पैसा- क्या बैंक ले रहा है ज्यादा स्प्रेड रेट:कैसे कराएं कम, जानें कैसे तय होता इंटरेस्ट रेट, कम ब्याज पर कैसे मिलेगा लोन
फर्ज करिए, आपको अचानक किसी इमरजेंसी में लाखों रूपए की जरूरत है और इतने पैसे किसी दोस्त या रिश्तेदार से नहीं ले सकते हैं तो क्या करेंगे? जाहिर है कि बैंक से लोन लेंगे। बैंक से लोन लेते समय आमतौर पर लोगों का पहला सवाल होता है कि इस पर ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) कितनी होगी? क्या आपको पता है कि- जब कोई बैंक के पास लोन लेने जाता है तो उसकी ब्याज दर हरेक कस्टमर के लिए एक जैसी नहीं होती है। लेकिन सवाल ये है कि ये तय कैसे होता है कि किस कस्टमर को किस इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा? बैंक ये कैसे तय करता है कि आपके लोन पर ब्याज दर कितनी रहेगी? ये तय करने के लिए बैंक ‘स्प्रेड रेट’ का सहारा लेते हैं। बैंक अलग-अलग कस्टमर से अलग-अलग स्प्रेड रेट चार्ज कर सकते हैं। हर बैंक का स्प्रेड रेट तय करने का क्राइटेरिया भी अलग हो सकता है। यही वजह है कि बैंक हर कस्टमर को अलग ब्याज दर पर लोन देते हैं। इसलिए अगर आप होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन लेने की सोच रहे हैं, तो स्प्रेड रेट के बारे में जानना बेहद जरूरी है। इससे आपको यह पता चलेगा कि किस बैंक से लोन लेना फायदेमंद रहेगा और कहां कम ब्याज चुकाना पड़ेगा। आज आपका पैसा कॉलम में जानेंगे कि- सवाल- स्प्रेड रेट क्या होता है और यह लोन की ब्याज दर से कैसे जुड़ा है? जवाब- स्प्रेड रेट वह अतिरिक्त ब्याज (मार्जिन) है, जो बैंक अपनी तय लोन दर (बेस रेट) के ऊपर जोड़ता है। इसी से फाइनल ब्याज दर और EMI तय होती है। अगर किसी बैंक का बेस रेट 7% है और वह आपसे 2% स्प्रेड लेता है तो आपको कुल 9% ब्याज देना होगा। इसे एक उदाहरण से समझिए- सवाल- बेस रेट, रेपो रेट और स्प्रेड रेट में क्या अंतर है? जवाब- तीनों ब्याज दरें अलग-अलग हैं, पर तीनों से मिलकर ही हमारी फाइनल लोन दर तय होती है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- बैंक लोन पर स्प्रेड रेट कैसे तय करते हैं? जवाब- बैंक कई फैक्टर्स के आधार पर स्प्रेड रेट तय करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण क्रेडिट स्कोर और रिपेमेंट ट्रैक रिकॉर्ड होता है। अगर व्यक्ति की आय स्थिर है और पहले लिए गए सभी लोन समय पर चुकाए गए हैं तो बैंक कम स्प्रेड रेट ऑफर कर सकता है। इसके अलावा लोन का प्रकार भी मायने रखता है। सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन) पर स्प्रेड कम होता है, जबकि बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन पर बैंक ज्यादा रिस्क कवर करने के लिए स्प्रेड रेट बढ़ा देते हैं। सवाल- क्या अलग-अलग बैंकों के स्प्रेड रेट में फर्क होता है? अगर हां, तो क्यों? जवाब- हां, हर बैंक की लागत, बिजनेस स्ट्रेटेजी और रिस्क कैलकुलेटिंग मॉडल अलग होता है। इसलिए स्प्रेड रेट में भी फर्क होता है। सवाल- कम स्प्रेड रेट का मतलब क्या हमेशा सस्ता लोन होता है? जवाब- ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए असली तुलना हमेशा फाइनल या इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट के आधार पर करनी चाहिए। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्ज, प्री-पेमेंट पेनल्टी और फ्लोटिंग रेट की शर्तें भी टोटल स्प्रेड रेट को प्रभावित करती हैं। फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट वो होता है, जिसमें ब्याज दर निश्चित नहीं होती। वो रेपो रेट के अनुसार बदलती रहती है। सवाल- ग्राहक स्प्रेड रेट को कैसे समझे और तुलना करे? जवाब- अगर कोई व्यक्ति लोन ले रहा है तो सिर्फ स्प्रेड रेट ही नहीं देखना चाहिए, बल्कि बैंक से कुछ सवाल जरूर पूछने चाहिए। सभी सवाल ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या बैंक स्प्रेड रेट को समय-समय पर बदल सकते हैं? जवाब- हां, बैंक समय-समय पर अपने इंटरनल रिव्यू के आधार पर स्प्रेड रेट एडजस्ट कर सकते हैं। RBI की गाइडलाइन के अनुसार, बैंक बेस रेट या RLLR (रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट) भी बदलते रहते हैं। हालांकि कई मामलों में लोन सैंक्शन के समय तय स्प्रेड पूरी अवधि के लिए स्थिर भी रहता है। इसलिए लोन एग्रीमेंट पढ़ते समय यह जरूर देखें कि स्प्रेड फिक्स है या रीसेटेबल है। इसका असर यह होता है कि आपकी EMI अचानक बढ़ या घट सकती है। सवाल- स्प्रेड रेट कम कराने के लिए ग्राहक क्या कर सकता है? जवाब- स्प्रेड रेट तय करने का तरीका मनमाना नहीं होता है। बैंक स्प्रेड रेट तय करते हुए कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखते हैं- कुल मिलाकर कहने का आशय ये है कि बैंक कस्टमर का चेहरा देखकर स्प्रेड रेट डिसाइड नहीं करते हैं। वे बेसिकली रिस्क कैलकुलेशन कर रहे होते हैं। वे यह जांचते हैं कि इस लोन के समय पर वापस आने के चांस कितने हैं। कस्टमर के लिए स्प्रेड रेट कम करवाने का एक ही तरीका है कि उसकी फाइनेंशियल प्रोफाइल बहुत स्ट्रॉन्ग हो। स्प्रेड रेट कम करवाने के तरीके नीचे ग्राफिक में देखिए। सवाल- किन गलतियों के कारण बैंक स्प्रेड रेट ज्यादा लगाते हैं? जवाब- बैंक कस्टमर की कुछ गलतियों या जोखिमों के कारण ज्यादा स्प्रेड रेट लगा सकते हैं। जैसेकि- ……………… ये खबर भी पढ़िए आपका पैसा- जरूरत पर लें इमरजेंसी लोन: जानें कहां और कैसे करें अप्लाई, लोन लेने की पूरी प्रोसेस, फ्रॉड लोन एप्स से बचाव के टिप्स इमरजेंसी लोन एक 'अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन' है, जिसे विशेष रूप से इमरजेंसी के लिए डिजाइन किया गया है। सामान्य होम लोन या कार लोन में लंबे कागजी काम और संपत्ति के मूल्यांकन की जरूरत होती है, जिसमें हफ्तों लग सकते हैं। इसके विपरीत इमरजेंसी लोन पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया है। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- व्रत के फू़ड में होती ज्यादा कैलोरीज:बढ़ सकता है वजन, डाइटीशियन से जानें व्रत की थाली को कैसे बनाएं हेल्दी?
आज नवरात्रि का तीसरा दिन है। कई लोग नवरात्रि में पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं। इस दौरान लोग आमतौर पर डीप फ्राइड आलू, साबूदाना वड़े, मूंगफली और मिठाइयां खाते हैं। इससे खाने का स्वाद तो बढ़ जाता है, लेकिन ये वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इससे थकान और भारीपन महसूस होता है। डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए व्रत की ये डाइट फायदे की बजाय नुकसान पहुंचाती है। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में बात व्रत की थाली की। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: शिल्पी गोयल, डाइटीशियन, छत्तीसगढ़ सवाल- क्या व्रत के खाने में ज्यादा कैलोरीज होती हैं? जवाब- हां, आमतौर पर व्रत के खाने में ज्यादा कैलोरी होती हैं। इसके कई कारण हैं- सवाल- व्रत के किन फूड्स में सबसे ज्यादा कैलोरी होती है? जवाब- कार्ब्स, स्टार्च, शुगरी फूड्स की कैलोरी हाई होती है। ऐसे सभी फूड्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या व्रत का खाना डायबिटिक और ओबीज के लिए जोखिम बढ़ा सकता है? जवाब- हां, व्रत के खाने से डायबिटिक और ओबीज लोगों की समस्या बढ़ सकती है- सवाल- क्या व्रत में हाई कार्ब फूड खाने से वजन बढ़ सकता है? जवाब- हां, व्रत के ज्यादातर फूड्स में कार्ब्स की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें लगातार खाने से वजन बढ़ सकता है। इसके और भी कई कारण हैं- सवाल- व्रत की थाली को लो-कैलोरी और बैलेंस्ड कैसे बनाया जा सकता है? जवाब- व्रत की थाली में कैलोरी काउंट कम करने के लिए कुछ बाताें का खास ख्याल रखें- सवाल- व्रत की हेल्दी थाली कैसी होनी चाहिए, इसमें कौन-सी चीजें शामिल करनी चाहिए? जवाब- थाली में कार्ब्स की मात्रा कम करें, बस इतनी रखें कि ऊर्जा मिलती रहे। इसके लिए थाली कैसी होनी चाहिए, ग्राफिक में देखिए- सवाल- व्रत में किस तरह के कुकिंग मेथड अपनाने चाहिए? जवाब- व्रत के खाने को हेल्दी बनाने के लिए ये कुकिंग मेथड अपना सकते हैं- सवाल- व्रत के दौरान ज्यादा भूख क्यों लगती है, ओवरईटिंग से कैसे बचें? जवाब- व्रत में ज्यादा भूख लगने के कारण- सवाल- अगर व्रत के दौरान वजन या सुस्ती बढ़ने लगे तो क्या करना चाहिए? जवाब- व्रत के दौरान खानपान और दिनचर्या में बदलाव के कारण कई लोगों को सुस्ती या वेट गेन की समस्या हो सकती है। ऐसे में सही हाइड्रेशन, हल्की एक्टिविटी और संतुलित विकल्पों से ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा और क्या कर सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- व्रत में डिहाइड्रेशन से कैसे बचें? क्या बॉडी हाइड्रेटेड रखकर हाई कैलोरी इनटेक से बच सकते हैं? जवाब- हां, अगर हाइड्रेटेड रहेंगे तो भूख कम लगेगी- सवाल- क्या सिर्फ पानी पीना काफी है या नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूरी हैं? जवाब- पानी से सिर्फ प्यास बुझती है, लेकिन इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए सिर्फ पानी पीना काफी नहीं है। सवाल- किन लोगों को व्रत की फ्राइड, हाई-कैलोरी डाइट से ज्यादा सावधान रहना चाहिए? जवाब- इन लोगों को फ्राइड फूड और हाई कार्ब फूड से बचना चाहिए- ……………………… जरूरत की खबर- नवरात्रि में खाएं टेस्टी और हेल्दी फलाहार: न्यूट्रिशन से भरपूर 12 रेसिपीज, व्रत का खाना हेल्दी बनाने के 8 टिप्स व्रत की डाइट में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जैसे मूंगफली, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और राजगिरा। इनसे कई हेल्दी और स्वादिष्ट डिशेज तैयार की जा सकती हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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