ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब और भी खतरनाक मोड़ लेता हुआ दिख रहा है। जहां अमेरिका ईरान के ऊपर और भी भीषण हमला करने की तैयारी बना रहा है। अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत को अचानक से फिर से कई गुना बढ़ाने लगा है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अब तीन और युद्धपोत, हजारों संख्या में मरीन कमांडोज़ और अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट्स को ईरान की दिशा में रवाना कर दिया। ये तमाम नई तैनाती अमेरिका की किसी बड़ी एक्शन की तैयारी की ओर संकेत देते हैं। इसका एक और मतलब जो निकल कर सामने आ रहा है वो यह है कि अमेरिका अब सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि वो ईरान के खिलाफ जमीन पर उतर कर और समुद्री मोर्चे तीनों पर ही पूरी ताकत के साथ हमला करना चाहता है और इसलिए इस नए मिशन के तहत अमेरिका ने यूएसएस बॉक्सर, यूएसएस स्पोर्टलैंड और यूएसएस कॉमस्टॉक इन तीनों ही एयरक्राफ्ट कैरियर्स को मिडिल ईस्ट की ओर भेज दिया है।
इसके साथ ही इन तीनों जहाजो पर मिलाकर करीब 2500 मरीन कमांडोस तैनात है। जबकि कुल मिलाकर बात करें तो 4000 सैनिक और नाविक इस मिशन का हिस्सा है। इन जहाजों की सबसे बड़ी ताकत है इन पर तैनात अत्याधुनिक हथियार और फाइटर जेट्स और ऐसे एम्फीवियस वाहन मौजूद है जो सीधे समुद्र से जमीन पर उतर कर हमला करने की क्षमता रखते हैं। यानी कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीन पर उतर कर बड़े ऑपरेशन को शुरू कर सकता है। जिसका इशारा पहले ही ट्रंप कई बार दे चुके हैं कि वह जमीन पर हमला करने में भी नहीं कतराएंगे और अब यह पूरा नया बेड़ा पहले से तैनात यूएसएस ट्राइपोली से जुड़ने वाला है। जिस पर पहले से ही 2200 से ज्यादा मरीन कमांडोस तैनात हैं। जब ये दोनों ताकतें एक साथ मिलकर उतरेंगी तो मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं इन जहाजों पर रोलिंग एयरफ्रेम मिसाइल, सी स्पेरो मिसाइल, एवीएट H है जेट्स और एसro जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट भी तैनात हैं। इसके साथ ही कई सारे अटैक हेलीकॉप्टर्स भी मौजूद हैं। जिनमें वाइपर और वेनम भी इस मिशन का हिस्सा हैं।
अमेरिका के इस कदम को सीधे तौर पर ईरान को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती सिर्फ डिफेंस नहीं बल्कि ऑफेंसिव ऑपरेशन की तैयारी को दिखाता है। जहां अमेरिका और भी ज्यादा ताकत के साथ ईरान पर हमला करने का प्लान बना रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना था कि ये जंग जल्द ही खत्म हो जाएगी। लेकिन ईरान ने अमेरिका के सारे सपनों को तोड़ दिया। ईरान ने अमेरिका के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया और अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाया है। जिसकी वजह से अमेरिका बौखला उठा है और अब खुद के हुए नुकसान को भरपाई करने के लिए या उसका बदला लेने के लिए वो ईरान पर और जोर से हमला करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका की लगातार बढ़ती हुई तैनाती इस बात का संकेत है कि अमेरिका लंबी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रहा है। और सबसे बड़ा सवाल जो अभी उठकर आता है वो यह है कि क्या अमेरिका जल्द ही ईरान पर बड़ा हमला करेगा और करेगा तो कितना बड़ा हमला? फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण है और हर नई चुनौती इस जंग को और खतरनाक बना रही है।
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वेस्टर्न एशिया की जंग में अब एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने पूरे खेल को बदल कर रख दिया है। जहां अब तक अमेरिका इजराइल एक साथ खड़े नजर आ रहे थे वहीं अब दोनों के बीच दरार खुलकर सामने आने लगी है। ईरान के गैस प्लांट पर हुए हमले ने इस गठबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कौन है इस हमले के पीछे अमेरिका इजराइल किसने किया वॉर? आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर शुरू हो चुका है जिसने अब दो दोस्तों में दरार पैदा कर दी है जो एक दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि डोनल्ड ट्रंप अब इस जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं।ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी जंग अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। पश्चिम एशिया का आसमान मिसाइलों और ड्रोन से भरा हुआ है। कतर से लेकर सऊदी अरेबिया तक आग के गोले बरसने की खबरें सामने आ रही हैं। अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गैस और तेल जैसी अहम ऊर्जा सुविधाएं भी हमलों के निशाने पर आ गई हैं। इसी बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है।
अमेरिका इजराइल के बीच अब दरार खुलकर नजर आने लगी है। ईरान के गैस प्लांट पर हुए हमले को लेकर दोनों देशों के बीच आरोप-प्र्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। जहां पहले दोनों एक साथ खड़े नजर आते थे, वहीं अब जिम्मेदारी लेने से दोनों पीछे हट रहे हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को ईरान की गैस फैसिलिटी पर हमला हुआ। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे इजराइल का हमला बताया गया। लेकिन इजराइल ने दावा किया कि यह कारवाई अमेरिका के साथ मिलकर की गई थी। हालांकि अमेरिका ने इस दावे से साफ इंकार कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के गैस प्लांट पर हुए हमले से उनका कोई लेना देना नहीं है और यह पूरी तरह से इजराइल की कारवाई थी। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के अधिकारियों के तौर पर खुद को इस हमले से अलग बताया गया।
इजराइली सूत्र अभी भी इसे संयुक्त ऑपरेशन बता रहे हैं। यानी एक ही हमले दो अलग-अलग दावे और यही टकराव अब इस जंग की दिशा बदलने का संकेत दे रहा है। इस पूरे विवाद के बीच डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सवाल भी उठने लगे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन अब इस जंग से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रही है। कुल मिलाकर यह नया विवाद सिर्फ एक हमले की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। बल्कि यह अमेरिका इजराइल के रिश्तों में आई दरार का संकेत भी हो सकता है जो आने वाले दिनों में इस पूरे युद्ध का रुख बदल सकता है।
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