KAL Ka Mausam: सावधान! अगले 24 घंटे भारी, दिल्ली-एनसीआर और यूपी-उत्तराखंड समेत कई राज्यों में मौसम का तांडव
देश की राजधानी समेत उत्तर भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है. अगर दिल्ली एनसीआर की बात करें तो यहां कई हिस्सों में दिनभर बूंदाबांदी देखने को मिली. वहीं, मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो से तीन दिन तक ऐसा ही मौसम रहने वाला है.
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में छिटपुट ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी संभावना जताई गई है. अगले एक सप्ताह के दौरान देश के कई हिस्सों में लगातार आंधी-तूफान की गतिविधियों के कारण दिन का तापमान सामान्य से कम रहने की उम्मीद है, जिससे लोगों को फिलहाल गर्मी से राहत मिलेगी.
भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
साथ ही 20 मार्च को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में, जबकि 20 और 24 मार्च को असम और मेघालय में छिटपुट भारी वर्षा की संभावना है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 मार्च को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा मध्य प्रदेश, विदभच, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में 20 मार्च को ओले गिरने की संभावना है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी 20 और 21 मार्च को ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है. इन इलाकों में हवा की रफ्तार 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.
तापमान में दर्ज की गई गिरावट
पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में गरज-चमक के साथ हुई बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है. उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी कम रहा है. आज देश के मैदानी इलाकों में सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.0 डिग्री सेल्सियस पंजाब के गुरदासपुर में दर्ज किया गया. हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है. राहत की बात यह है कि अगले एक सप्ताह के दौरान देश में कहीं भी भीषण लू (Heat Wave) चलने की संभावना नहीं है.
मौसम प्रणालियों का असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं. एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान से दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है. साथ ही, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. इसके अलावा, दक्षिण भारत में मन्नार की खाड़ी से उत्तरी आंतरिक कर्नाटक तक एक ट्रफ लाइन बनी हुई है. पूर्वी भारत के ऊपर 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी जेट स्ट्रीम चल रही है, जिसकी रफ्तार 95 समुद्री मील है. इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के बड़े हिस्से में बारिश और आंधी की स्थिति बनी हुई है.
मछुआरों और आम जनता के लिए सलाह
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी मौसम खराब रहने वाला है. तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में 22 मार्च तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है. केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने मछुआरों को विशेष सलाह दी है कि वे 20 से 22 मार्च तक उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास समुद्र में न जाएं, क्योंकि वहां मौसम काफी खराब रह सकता है. वहीं, उत्तर प्रदेश में अगले दो दिनों में तापमान में 6 से 8 डिग्री की बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिसके बाद धीरे-धीरे गर्मी बढ़ेगी.
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पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में गहराया मानवीय संकट, दमन और उपेक्षा से बढ़ा असंतोष: रिपोर्ट
लंदन, 20 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में आवश्यक सेवाओं की कमी के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट जैसी समस्याएं राजनीतिक उपेक्षा और सुरक्षा-आधारित प्रशासन के साथ मिलकर हालात को और गंभीर बना रही हैं।
यूके स्थित अखबार ‘एशियन लाइट’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में महिलाओं और छात्रों की बढ़ती भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शन समाज में गहरे असंतोष का संकेत हैं, जो लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक उपेक्षा से जुड़ा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली की भारी कमी और बढ़े हुए बिल यहां के लोगों के लिए सालभर की समस्या बन गए हैं। विडंबना यह है कि बड़े जलविद्युत परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों को लंबी कटौती झेलनी पड़ती है और उनसे वाणिज्यिक दरों पर शुल्क वसूला जाता है।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात इतने बिगड़ गए कि विरोध प्रदर्शन क्षेत्रव्यापी बंद में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने महंगे बिजली बिल, बकाया वेतन और नागरिक अधिकारों में कटौती का हवाला देते हुए बिल भरने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में प्रशासन ने कई बार गिरफ्तारियां, संचार बंदी और बल प्रयोग का सहारा लिया।
वहीं, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में जमीन के मालिकाना हक का मुद्दा बड़ा विवाद बनकर उभरा है। बड़ी मात्रा में जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किए जाने से स्थानीय लोगों को अपने पुश्तैनी अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। बुनियादी ढांचा और रणनीतिक परियोजनाओं के नाम पर जमीन कब्जाने और बिना मुआवजे विस्थापन के आरोपों ने लोगों में नाराजगी बढ़ाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में उत्पादित बिजली पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड में जाती है, जबकि स्थानीय लोग बिजली संकट और महंगे टैरिफ से जूझ रहे हैं। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग बाहरी हितों के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आलोचकों का आरोप है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां, खासकर आईएसआई, समस्याओं के समाधान के बजाय विरोध को दबाने पर ज्यादा ध्यान देती हैं। निगरानी, डराने-धमकाने और जबरन गायब किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा धीरे-धीरे ध्यान खींच रहा है। 2025 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध पर पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अक्सर विरोध प्रदर्शनों को “बाहरी प्रभाव” का परिणाम बताया है, जबकि स्थानीय लोग लगातार आर्थिक और मानवीय समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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