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Goa में बड़ा Diarrhea Outbreak, एक हफ्ते में 149 लोग बीमार, पानी में ज़हर का शक!

दक्षिण गोवा जिले के डाबोलिम में एक आवासीय परिसर में एक सप्ताह के भीतर दस्त के 149 से अधिक मामले सामने आए हैं और पानी के दूषित होने को इस प्रकोप का मुख्य कारण माना जा रहा है। यह प्रकोप प्रभु वायलेटा आवासीय परिसर में देखा गया है, जिसमें लगभग 200 अपार्टमेंट हैं।

निवासियों ने बिल्डर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई

निवासियों ने बिल्डर, प्रभु रियल्टर्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें परिसर के अंदर बिना उपचारित सीवेज को अवैध रूप से बहाने का आरोप लगाया गया है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे में पड़ गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित लोगों में बच्चे और बुजुर्ग निवासी शामिल हैं, जिनमें से कई ने उल्टी, निर्जलीकरण और पेट में तेज दर्द की शिकायत की है, और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

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एक सप्ताह में 149 मामले सामने आए

कोर्टालिम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) द्वारा 14 मार्च से किए गए घर-घर सर्वेक्षण में 149 मामले सामने आए हैं, जिनमें 17 मार्च को सामने आए तीन मामले भी शामिल हैं। अधिकारियों ने इलाके के विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं, जिनमें एक आवासीय फ्लैट, नल के पानी की आपूर्ति करने वाला भूमिगत टैंक, एक स्विमिंग पूल और बागवानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली उपचारित सीवेज लाइनें शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि दूषित पानी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका है। गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीएसपीसीबी) ने भी स्वतंत्र निरीक्षण और नमूना लेने का कार्य किया है। एहतियाती कदम के तौर पर, कोर्टालिम पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. तेजन लोटलिकर ने गुरुवार को बिल्डर को निर्देश दिया कि परीक्षण रिपोर्ट आने तक निवासियों को बोरवेल का पानी तुरंत बंद कर दिया जाए, क्योंकि यह संदूषण का संभावित स्रोत हो सकता है।

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Vishwakhabram: क्या युद्ध की तैयारी में जुटा है North Korea? बेटी के साथ Tank पर बैठे नजर आये Kim Jong Un

क्या उत्तर कोरिया युद्ध की तैयारी कर रहा है? जब दुनिया का आधे से ज्यादा हिस्सा पहले ही संघर्षों में उलझा हुआ है, ऐसे में क्या किम जोंग उन एक और मोर्चा खोलकर वैश्विक संकट को और भड़का सकते हैं? हाल की तस्वीरें और घटनाक्रम इसी ओर इशारा करते नजर आते हैं। सत्ता, सैन्य शक्ति और उत्तराधिकार की कहानी अब टैंक के ऊपर से लिखी जा रही है और यह संकेत मामूली नहीं है।

हम आपको बता दें कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अपनी किशोर बेटी किम जु ए के साथ टैंक पर सवार दिखाई दिए। दोनों काले चमड़े के जैकेट में युद्धाभ्यास का निरीक्षण करते हुए नजर आए। यह एक सशक्त राजनीतिक और सैन्य संदेश था। टैंक के ऊपर बैठा यह दृश्य दुनिया को बताने के लिए काफी है कि प्योंगयांग सिर्फ तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अपने अगले कदम के लिए मानसिक रूप से भी तैयार है।

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वैसे यह पहली बार नहीं है जब किम अपनी बेटी को इस तरह के सैन्य कार्यक्रमों में साथ ला रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में किम जु ए मिसाइल परीक्षण, गोलीबारी अभ्यास और हथियार कारखानों के दौरे में लगातार नजर आई हैं। वह राइफल और पिस्तौल चलाती भी दिखाई दीं। यह साफ संकेत है कि उन्हें केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार किया जा रहा है।

अगर इस घटनाक्रम को व्यापक संदर्भ में देखें तो तस्वीर और भी गंभीर हो जाती है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने जापान सागर की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह कदम उस समय उठाया गया जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे। प्योंगयांग पहले ही चेतावनी दे चुका था कि इन अभ्यासों के गंभीर परिणाम होंगे। ऐसे में यह मिसाइल परीक्षण एक सीधा सैन्य संकेत था।

इधर पश्चिम एशिया में भी हालात विस्फोटक बने हुए हैं। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और वहां के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक तनाव चरम पर है। ऐसे माहौल में किम का आक्रामक सैन्य प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह इस वैश्विक अस्थिरता को अवसर के रूप में देख रहे हैं।

रणनीतिक दृष्टि से देखें तो किम जोंग उन दो मोर्चों पर खेल रहे हैं। एक तो है सैन्य आधुनिकीकरण। उत्तर कोरिया लगातार अपने पारंपरिक और परमाणु हथियारों को उन्नत कर रहा है। नए टैंक, ड्रोन से बचाव की क्षमता, और लंबी दूरी की मिसाइलें इस रणनीति का हिस्सा हैं। इसके अलावा दूसरा मोर्चा है सत्ता का उत्तराधिकार। किम जु ए को सार्वजनिक मंचों पर लाकर वह दुनिया और अपने देश दोनों को यह संदेश दे रहे हैं कि सत्ता की अगली कड़ी तैयार है।

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है। किम की बहन किम यो जोंग, जो देश की दूसरी सबसे ताकतवर शख्सियत मानी जाती हैं, वह एक बड़ी चुनौती बन सकती हैं। उनके पास राजनीतिक और सैन्य दोनों तरह का समर्थन है। ऐसे में उत्तराधिकार की यह कहानी अंदरूनी सत्ता संघर्ष को भी जन्म दे सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है हालिया चुनाव। उत्तर कोरिया में हुए संसदीय चुनाव में किम की पार्टी को लगभग सौ प्रतिशत वोट मिले। हर सीट पर वही उम्मीदवार था जिसे सत्ता ने पहले से तय किया था। विपक्ष का कोई अस्तित्व नहीं था। केवल शून्य दशमलव शून्य सात प्रतिशत लोगों ने ना में वोट डाला। यह आंकड़ा भले ही छोटा लगे, लेकिन दशकों बाद पहली बार इसे सार्वजनिक किया गया। यह भी एक तरह का संकेत है कि सत्ता अपनी पकड़ को दिखाने के साथ-साथ नियंत्रित पारदर्शिता का खेल भी खेल रही है।

अब सवाल यह है कि क्या यह सब केवल शक्ति प्रदर्शन है या वास्तव में युद्ध की तैयारी। जवाब सीधा नहीं है, लेकिन संकेत बेहद स्पष्ट हैं। जब एक नेता अपनी किशोर बेटी को टैंक चलाना सिखा रहा हो, जब मिसाइलें लगातार दागी जा रही हों और जब वैश्विक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हो, तब इसे केवल दिखावा मानना भूल होगी।

किम जोंग उन का यह कदम केवल अपने दुश्मनों को डराने के लिए नहीं है, बल्कि अपने देश के भीतर सत्ता की स्थिरता और निरंतरता का संदेश देने के लिए भी है। देखा जाये तो यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है, जो टैंक की गर्जना और मिसाइल की आग के साथ-साथ छवि और प्रतीक के स्तर पर भी लड़ा जा रहा है।

दुनिया को अब यह समझना होगा कि उत्तर कोरिया केवल एक अलग थलग देश नहीं है, बल्कि एक ऐसा खिलाड़ी है जो सही समय का इंतजार कर रहा है। और जब वह समय आएगा, तो उसका असर केवल कोरियाई प्रायद्वीप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक संतुलन को भी हिला सकता है।

-नीरज कुमार दुबे

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  Sports

दहशत के साये में पाकिस्तान, तालिबानी हमलों से मोहसिन नकवी की कांपी रूह, बंद दरवाजों के भीतर होगा पीएसएल

PSL 2026 News: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) 2026 के शुरुआती मैच खाली स्टेडियमों में खेले जाएंगे. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा हालातों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने घोषणा की कि इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद टूर्नामेंट अपने तय समय यानी 26 मार्च से शुरू होगा, लेकिन स्टेडियम में दर्शकों को आने की अनुमति नहीं होगी. मुकाबले सिर्फ दो शहरों (कराची और लाहौर) में खेले जाएंगे. Sun, 22 Mar 2026 17:32:08 +0530

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