केंद्र ने आयकर नियम 2026 के लिए अधिसूचना जारी की, रिटर्न फाइल करना आसान हुआ
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आयकर नियम, 2026 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इससे नए आयकर अधिनियम 2025 के लिए मंच तैयार होगा, जो कि 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, जिसमें पारदर्शिता, अधिक सख्त डिस्क्लोजर और बेहतर अनुपालन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने ई-राजपत्र में आयकर नियम, 2026 प्रकाशित किए हैं, जो पूर्ववर्ती प्रावधानों का स्थान लेते हैं और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक विस्तृत ढांचा निर्धारित करते हैं।
नए नियमों का उद्देश्य प्रोसेस को आसान करना और कैपिटल गेन, स्टॉक मार्केट लेनदेन और एनआरआई टैक्स से जुड़े रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड को सख्त करना है।
ये नियम इस साल की शुरुआत में जारी किए गए मसौदा प्रस्तावों के बाद आए हैं और भारत की कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, “इन बदलावों से कोई नया कर लागू नहीं होता, बल्कि बेहतर निगरानी और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिसके लिए अधिक डिस्क्लोजर और डिजिटल ट्रैकिंग की आवश्यकता होगी।”
आयकर नियम, 2026 में सबसे बड़ी हाईलाइट हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) है। नए नियम के तहत अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के लोग भी सैलरी के 50 प्रतिशत हिस्से पर एचआरए क्लेम कर सकते हैं, पहले यह लिमिट केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए थी।
हालांकि, बाकी के अन्य शहरों के लिए यह लिमिट अभी भी 40 प्रतिशत बनी हुई है।
अब करदाताओं को एक निर्दिष्ट प्रपत्र में मकान मालिक के साथ अपने संबंधों का खुलासा करना भी आवश्यक होगा, जिससे पारदर्शिता में और सुधार होगा।
इन नियमों में स्टॉक एक्सचेंजों के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु सख्त शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।
एक्सचेंजों को सेबी से अनुमोदन प्राप्त करना होगा और पैन और विशिष्ट आईडी जैसे ग्राहक-स्तरीय डेटा सहित सभी लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।
उन्हें सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल रखना होगा और ट्रेडिंग गतिविधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कर विभाग को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने नए आयकर नियम 2026 में यह स्पष्ट किया है कि पूंजीगत लाभ अल्पकालिक है या दीर्घकालिक, यह निर्धारित करने के लिए परिसंपत्तियों की होल्डिंग अवधि की गणना कैसे की जाएगी।
आय घोषणा योजना, 2016 के तहत घोषित परिसंपत्तियों के लिए, परिसंपत्ति के प्रकार के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होंगे।
ये नियम कुछ संस्थाओं के लिए पूंजीगत लाभ पर कराधान को भी स्पष्ट करते हैं। अल्पकालिक परिसंपत्तियों या स्व-निर्मित परिसंपत्तियों से जुड़े लाभों को अल्पकालिक माना जाएगा, जबकि अन्य को अंतर्निहित परिसंपत्ति की प्रकृति के आधार पर दीर्घकालिक के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बांग्लादेश के उच्चायुक्त से मुलाकात, घरेलू जरूरतों के संतुलन के साथ भारत देता रहेगा ऊर्जा सहायता
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि उनकी बातचीत का मुख्य फोकस द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करना था।
इससे एक दिन पहले भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश और दूसरे पड़ोसी देशों की ऊर्जा जरूरतों में मदद जारी रखे हुए है। हालांकि भारत यह काम अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखकर कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से ऊर्जा आपूर्ति के अनुरोध मिले हैं। उन्होंने बताया कि भारत 2007 से अलग-अलग माध्यमों से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति करता रहा है और यह मदद अभी जारी है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से ऊर्जा आपूर्ति के समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं। इस कारण एलपीजी की सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है।
जायसवाल ने कहा कि भारत फिलहाल सबसे पहले अपनी घरेलू खपत और उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रहा है। पहले देश के लोगों की जरूरतें पूरी की जाएंगी, उसके बाद यह तय किया जाएगा कि व्यावसायिक संस्थानों के लिए एलपीजी आपूर्ति कैसे संभाली जाए।
इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने वहां की नई सरकार के मंत्रियों से कई मुलाकात की थीं। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई थी।
भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के स्थानीय शासन, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि सहकारिता और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध लोगों के बीच मजबूत रिश्तों पर आधारित हैं और भारत आपसी हित तथा आपसी लाभ के आधार पर सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।
प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध मामलों के मंत्री हाफिज उद्दीन अहमद से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों को फिर से रेखांकित किया गया।
दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर मिलकर काम करके दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और मजबूत किया जा सकता है।
आईएएनएस
वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















