तमिलनाडु में एनडीए का असली नेतृत्व कौन कर रहा है - एडप्पाडी के पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके या भाजपा के उच्च कमान - इस सवाल ने तब और भी तीखा रुख अपना लिया है जब सीट बंटवारे की वार्ता से पहले गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली का तांता लगा लिया। एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए दो बार दिल्ली गए, जो दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता की सहयोगी दलों को चेन्नई बुलाने की शैली से बिल्कुल उलट है।
इस घटनाक्रम ने सत्ताधारी डीएमके को राजनीतिक हथियार मुहैया करा दिए हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने तीखा हमला करते हुए एआईएडीएमके पर दिल्ली में खुद को गिरवी रखने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि तमिलनाडु को उन ताकतों के कारण नुकसान उठाना पड़ेगा जो चुनाव लड़ने के लिए भी दिल्ली से मंजूरी मांग रही हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को लिखे एक पत्र में स्टालिन ने इस यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया और इसे राज्य के व्यापक राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की कार्रवाइयां दर्शाती हैं कि फैसले दिल्ली में लिए जा रहे हैं। क्या वे तमिलनाडु के लिए धन सुरक्षित करने, रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करवाने या राज्य के अधिकारों की रक्षा करने के लिए वहां गए हैं? नहीं। उनका ध्यान कहीं और है। लोग इसे अच्छी तरह समझते हैं... तमिलनाडु की जनता दिल्ली या उसके परोक्ष प्रतिनिधियों के प्रभुत्व को कभी स्वीकार नहीं करेगी। वे जानते हैं कि राज्य के अधिकारों और विकास के लिए कौन खड़ा है। स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करने का आह्वान किया और दावा किया कि डीएमके और उसका गठबंधन जीत के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव उनके द्वारा वर्णित 'द्रविड़ मॉडल 2.0' के तहत शासन की निरंतरता है और कार्यकर्ताओं से बिना किसी समझौते के काम करने का आग्रह किया।
आज सुबह पीएमके नेता अंबुमणि रामदास और एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन के भी दिल्ली रवाना होने से राजनीतिक उथल-पुथल और गहरी हो गई, जिससे गठबंधन वार्ता में भाजपा नेतृत्व की केंद्रीय भूमिका रेखांकित होती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसी अटकलें हैं कि भाजपा, राज्य में अपनी सीमित चुनावी उपस्थिति के बावजूद, अपने अधीन अधिक सीटें हासिल करने की कोशिश कर सकती है, जिन्हें वह अन्य सहयोगियों के साथ साझा या वितरित करेगी। गठबंधन में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने का यह एक चतुर तरीका हो सकता है। राज्य के एक वरिष्ठ भाजपा नेता, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की, ने संकेत दिया कि पार्टी अपने कोटे से केवल एएमएमके को ही सीटें आवंटित कर सकती है।
इस मामले में एक और पेचीदगी यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक पलानीस्वामी को एनडीए के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने से परहेज किया है, बल्कि उन्होंने व्यापक रूप से "एनडीए सरकार" का जिक्र किया है - यह सूक्ष्म संकेत तमिलनाडु के एनडीए में अंततः किसकी सत्ता है, इस पर बहस को और हवा दे रहा है।
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केंद्रीय विद्यालय संगठन ने 2026-27 के लिए एडमिशन रजिस्ट्रेशन 20 मार्च से शुरू कर दिए हैं। इस बार क्लास 1 के फॉर्म सिर्फ ऑनलाइन ही भरे जाएंगे। वहीं इससे छोटी क्लासेस (किंडरगार्डन/बालवाटिका) के लिए कुछ अलग नियम रखे गए हैं। देशभर में 1200 से ज्यादा केवी स्कूल हैं, अच्छी पढ़ाई और कम फीस की वजह से यहां एडमिशन के लिए काफी ज्यादा भीड़ रहती है। इसीलिए पेरेंट्स को सलाह दी गई है कि फॉर्म भरने से पहले बच्चे की उम्र और कैटेगरी की जानकारी अच्छे से चेक कर लें और जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवा लें, ताकि बाद में कोई दिक्कत न हो। पूरी जानकारी ऑफिशियल वेबसाइट kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर मिल जाएगी।
कब तक चलेंगे रजिस्ट्रेशन?
केंद्रीय विद्यालय के शेड्यूल के मुताबिक, क्लास 1 के लिए रजिस्ट्रेशन अप्रैल के पहले हफ्ते तक चलेगा। इसके बाद पहली लिस्ट 8 अप्रैल 2026 के आसपास आ सकती है। अधिकारियों ने कहा है कि सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट kvsonlineadmission.kvs.gov.in का ही इस्तेमाल करें और किसी भी गलत लिंक से बचें।
रजिस्ट्रेशन उम्र की शर्तें क्या हैं?
उम्र के हिसाब से क्लास 1 में एडमिशन के लिए बच्चे की उम्र 31 मार्च 2026 तक 6 से 8 साल के बीच होनी चाहिए। बालवाटिका-1 के लिए 3 से 4 साल, बालवाटिका-2 के लिए 4 से 5 साल और बालवाटिका-3 के लिए 5 से 6 साल की उम्र तय की गई है। अगर बच्चे का जन्म 1 अप्रैल को हुआ है, तो उसे उम्र में थोड़ी छूट मिलती है।
जरूरी डॉक्यूमेंट्स
एडमिशन के समय कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स देने होंगे, जैसे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो, एड्रेस प्रूफ (आधार कार्ड या बिजली बिल) और कैटेगरी सर्टिफिकेट। अगर पैरेंट्स सरकारी नौकरी में हैं, तो उन्हें पिछले 7 साल की नौकरी और ट्रांसफर की जानकारी भी देनी होगी।
सीट और कोटा सिस्टम के बारे में
केंद्रीय विद्यालय में एडमिशन सिर्फ नंबर के आधार पर नहीं होता, बल्कि एक प्राथमिकता सिस्टम भी होता है। इसमें सरकारी कर्मचारियों और डिफेंस वालों के बच्चों को पहले मौका मिलता है। आरटीई के तहत 25% सीटें भी रिजर्व होती हैं। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी के लिए भी सीटें तय होती हैं। सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए भी अलग कोटा है।
ऑनलाइन फॉर्म कैसे भरें?
ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए सबसे पहले वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा। फिर अपनी डिटेल्स भरकर लॉगिन बनाना होगा और पूरा फॉर्म भरना होगा। इसके बाद जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करके अपने पास के तीन केवी स्कूल चुनने होंगे और फॉर्म सबमिट करना होगा। फॉर्म भरने के बाद उसका प्रिंट या स्क्रीनशॉट जरूर अपने पास रखें।
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