होर्मुज खुलवाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा अमेरिका, अपाचे से लेकर फाइटर जेट्स तक लगा दिए
विश्लेषकों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है तो पश्चिम एशिया के तेल उत्पादक देश अधिकतम 25 दिनों तक ही उत्पादन बनाए रख सकेंगे। सऊदी अरब, इराक, कतर, UAE और खुद ईरान अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए इस संकरे मार्ग पर निर्भर हैं।
Iran-Israel War: ईरान के ताबड़तोड़ मिसाइल हमले से दहला इजरायल, अब तक 16 अमेरिकी विमान तबाह; ट्रंप को लेकर क्या बोल गए नेतन्याहू
Iran-Israel War: मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ताज़ा घटनाक्रम में ईरान ने इजरायल पर कई मिसाइलें दागीं, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए।
गुरुवार आधी रात से ठीक पहले हुए इस हमले के बाद यरूशलम, मध्य इजरायल और वेस्ट बैंक के कई इलाकों में सायरन गूंज उठे। लोग डर के माहौल में घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। इस हमले ने साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
अमेरिका को भारी नुकसान
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। अब तक उसके 16 सैन्य विमान नष्ट हो चुके हैं। इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया।
चौंकाने वाली बात यह है कि कई नुकसान तकनीकी खराबी और 'फ्रेंडली फायर' के कारण भी हुए हैं। कुवैत में गलती से हुई फायरिंग में अमेरिका के तीन F-15 लड़ाकू विमान गिर गए। वहीं, एक KC-135 टैंकर हवा में ही विस्फोट का शिकार हो गया, जिसमें सवार सभी 6 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। इसके अलावा, सऊदी अरब के एक सैन्य ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमले में 5 टैंकर विमान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
ट्रंप पर क्या बोले नेतन्याहू?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस पूरे मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इजरायल अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोपों पर उन्होंने तीखा जवाब दिया।
नेतन्याहू ने कहा, “क्या कोई सोच सकता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए? राष्ट्रपति वही करते हैं जो अमेरिका के हित में होता है।”
बढ़ता जा रहा है खतरा
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से यह साफ है कि हालात जल्द शांत होने वाले नहीं हैं। अगर यही स्थिति बनी रही तो यह संघर्ष बड़े स्तर के युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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