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अमेरिकी सीनेटरों ने स्वास्थ्य खर्च पर द्विदलीय पहल को आगे बढ़ाया

वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। बढ़ती स्वास्थ्य सेवा लागत और पहुंच में अंतराल का सामना करते हुए अमेरिकी सीनेटरों ने दवाओं की कीमत, मातृ देखभाल और बीमा सुधार से जुड़े द्विदलीय प्रस्तावों को आगे बढ़ाया।

सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और पेंशन समिति की सुनवाई में, दोनों दलों के सांसदों ने लागत कम करने, पहुंच बढ़ाने और कार्यबल की कमी को दूर करने के उद्देश्य से कई तरह के विधेयक पेश किए।

सत्र की शुरुआत करते हुए समिति के अध्यक्ष बिल कैसिडी ने व्यावहारिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “अध्यक्ष के रूप में मेरा ध्यान शोर-शराबे से ऊपर उठकर लुइसियाना और पूरे अमेरिका के लिए काम करने पर है,” और परिवारों पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि “स्वास्थ्य सेवाएं, दवाओं की कीमतें और कॉलेज की फीस बहुत महंगी हो चुकी हैं।”

कई सीनेटरों ने स्वास्थ्य सेवा और बाल देखभाल की वहनीयता पर ध्यान केंद्रित किया। Tim Kaine ने एक द्विदलीय बिल का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य बाल देखभाल क्षेत्र में कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाकर सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि लागत और मजदूरी के बीच बड़ा अंतर है। हमारे 43 प्रतिशत बाल देखभाल कर्मी सार्वजनिक सहायता पर निर्भर हैं जबकि परिवारों को भारी फीस चुकानी पड़ती है।

केन ने प्रसव से जुड़े व्यक्तिगत खर्च को खत्म करने वाले विधेयक का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा, कोई भी मां केवल इस डर से इलाज से वंचित न रहे कि वह इसे वहन नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि नियोक्ता-प्रायोजित बीमा के तहत गर्भावस्था और प्रसव की औसत लागत लगभग 3,000 डॉलर है।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी एक बड़ा मुद्दा रही। मैगी हसन ने कहा कि कई क्षेत्रों में मातृत्व सेवाओं तक पहुंच सीमित है। न्यू हैम्पशायर के कुछ इलाकों में नजदीकी प्रसव केंद्र तक पहुंचने में एक घंटे से अधिक समय लग सकता है। उन्होंने ग्रामीण अस्पतालों को सुसज्जित करने और आपातकालीन प्रसूति देखभाल के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने वाले बिल का समर्थन किया।

दवाओं की कीमतों पर बोलते हुए हसन ने उन उद्योग प्रथाओं की आलोचना की जो सस्ते विकल्पों के आने में देरी करती हैं। उन्होंने कहा, फार्मास्युटिकल कंपनियां पेटेंट सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर अपने उत्पादों के चारों ओर ‘पेटेंट वॉल’ खड़ी कर देती हैं, जिससे वर्षों तक जेनेरिक प्रतिस्पर्धा रुक सकती है।

कीमतों में पारदर्शिता को दोनों दलों का समर्थन मिला। रोजर मार्शल और जॉन हिकेनलूपर ने पेशेंट डिजर्व प्राइस टैग एक्ट को आगे बढ़ाया, जिसके तहत अस्पतालों और बीमा कंपनियों को वास्तविक कीमतें पहले से बतानी होंगी।

हिकेनलूपर ने कहा, “स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी बेहद चिंताजनक है जबकि मार्शल ने कहा कि यह बिल परिवारों को संभावित रूप से हर महीने 1,000 डॉलर तक की बचत करा सकता है।”

अन्य प्रस्तावों में एएलएस अनुसंधान का विस्तार, इंसुलिन तक पहुंच में सुधार, नर्सिंग कार्यबल को बढ़ावा देना, प्रोस्टेट कैंसर की जांच की उपलब्धता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना शामिल था।

पूरी सुनवाई के दौरान सांसदों ने बार-बार अपने विधेयकों को द्विदलीय बताते हुए कहा कि वे कार्रवाई के लिए तैयार हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि व्यापक राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सहयोग की गुंजाइश बनी हुई है।

कैसिडी ने कहा कि समिति के कर्मचारी सक्रिय रूप से प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं और तकनीकी पहलुओं पर काम कर रहे हैं और कई उपायों को आगे बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई जा रही है।

--आईएएनएस

पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आज है World Oral Health Day 2026, बच्चों के दांत क्यों जल्दी खराब हो जाते हैं? वजहें जान रह जाएंगे हैरान

World Oral Health Day 2026: आज के समय में छोटे बच्चों में दांतों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. पहले जहां कैविटी और दांतों का सड़ना बड़े लोगों में ज्यादा देखी जाती थी. वहीं, अब कम उम्र के बच्चों में भी यह आम हो गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल, खराब खानपान और ओरल हाइजीन का सही न होना है.

डेंटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों की दांतों की सेहत को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि शुरुआती उम्र में ही खराब हुए दांत आगे चलकर पर्मानेंट दांतों की बीमारी बन सकती है.

आज मनाया जा रहा है World Oral Health Day 2026

आज यानी 20 मार्च 2026 को दुनियाभर में वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जा रहा है. इसे विश्व मुख स्वास्थ्य दिवस भी कहते हैं. इस दिन की शुरुआत आधिकारीक तौर पर 20 मार्च 2013 से शुरू हुई थी. इस दिन की शुरुआत FDI द्वारा की गई थी. ओरल हेल्थ डे का मुख्य उद्देश्य लोगों को मुंह के स्वास्थ्य के बारे में बताना है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एशियन हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, डेंटल सर्विसेज के डॉ. जुल्फिकार हफीज बताते हैं कि आज के बच्चे बहुत ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड खा रहे हैं, जिससे Tooth Decay का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. इसके लिए माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चों की डाइट सीधे तौर पर उनके दांतों की सेहत को प्रभावित करती है.

जंक फूड बन रहा है सबसे बड़ा कारण

बच्चों में चॉकलेट, कैंडी, बिस्किट, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन काफी बढ़ गया है. इन सभी में हाई शुगर होती है, जो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के साथ मिलकर एसिड बनाती है. यह एसिड दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) को नुकसान पहुंचाता है और धीरे-धीरे कैविटी का कारण बनता है. बार-बार मीठा खाने से दांतों को रिकवर होने का समय नहीं मिलता, जिससे नुकसान और तेजी से बढ़ता है.

ब्रशिंग की गलत आदतें

कई बच्चे सही तरीके से ब्रश नहीं करते हैं या दिन में सिर्फ एक बार ब्रश करते हैं. कुछ बच्चे जल्दी-जल्दी ब्रश कर लेते हैं, जिससे दांत पूरी तरह साफ नहीं हो पाते है. इसका नतीजा होता है प्लाक का जमना, जो आगे चलकर दांतों को कमजोर करता है. ये माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सही तरीके से ब्रश करना सिखाएं और खुद भी इस प्रक्रिया की निगरानी करते रहे.

रात में दूध पीकर सोने की सबसे खतरनाक आदत! 

अक्सर, छोटे बच्चों में एक आम आदत होती है कि रात में दूध पीकर सो जाना है. हालांकि, यह आदत आरामदायक लग सकती है लेकिन दांतों के लिए यह हानिकारक है. दूध में मौजूद चीनी दांतों पर जमा हो जाती है और रातभर बैक्टीरिया को बढ़ावा देती है, जिससे कैविटी का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए, जब भी बच्चों को दूध पिलाते हैं तो उसके बाद उनके मुंह को साफ करना या पानी पिलाना चाहिए.

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान आदतों को अपनाकर बच्चों के दांतों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. जैसे कि-

  • दिन में कम से कम दो बार ब्रश कराएं.
  • मीठे और जंक फूड का सेवन सीमित करें.
  • बच्चों को हेल्दी डाइट जैसे फल, सब्जियां और कैल्शियम युक्त आहार दें.
  • हर 6 महीने में डेंटल चेकअप जरूर कराएं.
  • फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें.

समय पर ध्यान देना क्यों जरूरी है?

अगर शुरुआती स्तर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो Tooth Decay बच्चों के दांतों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इससे न सिर्फ दर्द और इंफेक्शन होता है, बल्कि बच्चों के खाने-पीने और बोलने की क्षमता पर भी असर पड़ता है.

ओरल हेल्थ के लिए जरूरी सलाह

एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों के दांतों की देखभाल सिर्फ ब्रश कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही खानपान, अच्छी आदतें और नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी होती है. माता-पिता अगर समय रहते सतर्क हो जाएं, तो बच्चों को दांतों की गंभीर समस्याओं से बचाया जा सकता है.

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