कतर ने रास लफान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमलों से नुकसान की जानकारी दी
नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। ईरान की ओर से रास लफ्फान औद्योगिक शहर पर किए गए हमले के नुकसान के बारे में कतर ने जानकारी दी। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि मिसाइल हमलों के कारण कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की कमी आई और वार्षिक राजस्व में लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने बताया कि हमारी उत्पादन फैसिलिटी को भारी नुकसान हुआ है। जिसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और इसके चलते हमें दीर्घकालिक फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा।
कतर एनर्जी का अनुमान है कि बुधवार 18 मार्च 2026 और गुरुवार 19 मार्च 2026 की सुबह हुए मिसाइल हमलों के कारण उसके रास लफान औद्योगिक शहर को हुए नुकसान से सालाना लगभग 20 अरब डॉलर का राजस्व नुकसान होगा और मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा, जिससे यूरोप और एशिया के बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी।
रास लफान औद्योगिक शहर में उत्पादन केंद्रों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए, ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ, साद शेरिदा अल-काबी ने कहा कि मुझे यह पुष्टि करते हुए राहत मिली है कि इन अनुचित और संवेदनहीन हमलों में कोई भी घायल नहीं हुआ। ये हमले न केवल कतर राज्य पर, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर भी हमले थे। यह हम सभी पर हमला था जो विकास और मानवीय प्रगति के लिए खड़े हैं, जो ऊर्जा तक निष्पक्ष, विश्वसनीय और सुरक्षित पहुंच पर आधारित है।
इन हमलों में द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) उत्पादन करने वाली छह ट्रेनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 12.8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है, जो कतर के निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है। ट्रेन 4 कतर एनर्जी (66 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (34 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है, और ट्रेन 6 कतर एनर्जी (70 प्रतिशत) और एक्सॉनमोबिल (30 प्रतिशत) का संयुक्त उद्यम है।
अल-काबी ने कहा कि एलएनजी संयंत्रों को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल लगेंगे। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ रहा है। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंधों पर पांच साल तक के लिए फोर्स मेज्योर घोषित करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
हमलों में शेल की ओर से संचालित उत्पादन-साझाकरण समझौते के तहत संचालित पर्ल जीटीएल (गैस-टू-लिक्विड्स) संयंत्र को भी निशाना बनाया गया, जो प्राकृतिक गैस को उच्च गुणवत्ता वाले स्वच्छ ईंधन में बदलता है और प्रीमियम इंजन तेल और स्नेहक, साथ ही पैराफिन और मोम बनाने में उपयोग होने वाले बेस ऑयल का उत्पादन करता है।
अल-काबी ने आगे कहा कि पर्ल जीटीएल के दो संयंत्रों में से एक को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और इसके कम से कम एक साल तक बंद रहने की उम्मीद है।
कतर ने बताया कि 18.6 मिलियन बैरल कंडेनसेट की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 24 प्रतिशत है। 1.281 मीट्रिक टन एलपीजी की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है। 0.594 मीट्रिक टन नेफ्था की हानि होगी। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है। 0.18 मीट्रिक टन सल्फर का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग छह प्रतिशत है और 309.54 एमसीएफए हीलियम का नुकसान होगा। यह कतर के निर्यात का लगभग 14 प्रतिशत है।
ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री, कतर एनर्जी के अध्यक्ष और सीईओ ने कतर की सैन्य और सुरक्षा बलों और ऊर्जा क्षेत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके साहस और असाधारण व्यावसायिकता ने यह सुनिश्चित किया कि स्थिति को जल्दी और सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया जा सके।
--आईएएनएस
एसडी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ट्रंप की पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी से जापान की प्रधानमंत्री नाराज
वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को गुप्त रखने के फैसले का बचाव करते हुए पर्ल हार्बर का हवाला दिया। हालांकि इस टिप्पणी से व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची असहज नजर आईं। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग के गर्मजोशी भरे प्रदर्शन के बीच एक अटपटा क्षण पैदा हो गया।
यह बातचीत उस समय हुई जब ट्रंप से पूछा गया कि यूरोप और एशिया के सहयोगी देशों, जिनमें जापान भी शामिल है, को हमले से पहले क्यों नहीं बताया गया।
ट्रंप ने कहा, “देखिए, एक बात यह है कि आप बहुत ज्यादा संकेत नहीं देना चाहते।” उन्होंने कहा कि जब हम गए, तो हम बहुत जोरदार तरीके से गए, और हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम उन्हें चौंकाना चाहते थे।
इसके बाद उन्होंने जापान के 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, “सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है, ठीक है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया।” आप सरप्राइज में हमसे कहीं ज्यादा विश्वास रखते हैं, और हमें उन्हें चौंकाना था, और हमने ऐसा किया।
उन्होंने तर्क दिया कि सहयोगियों को पहले से जानकारी न देने का फैसला सैन्य बढ़त बनाए रखने के लिए था। “इसी सरप्राइज की वजह से, पहले दो दिनों में हमने शायद 50 प्रतिशत लक्ष्य को खत्म कर दिया और जितना हमने अनुमान लगाया था उससे भी ज्यादा। तो अगर मैं पहले ही सबको बता देता, तो फिर सरप्राइज नहीं रहता, है ना?”
विदेशी मीडिया पूल रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की इस तुलना पर ताकाइची ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी आंखें चौड़ी हो गईं और मुस्कान गायब हो गई और वह “पीछे की ओर झुक गईं, अपने हाथ समेटते हुए, पर्ल हार्बर का अचानक जिक्र होने से स्पष्ट रूप से चौंक गईं।”
यह टिप्पणी इसलिए भी अलग नजर आई क्योंकि बाकी दौरे के दौरान दोनों नेताओं की भाषा असामान्य रूप से दोस्ताना रही थी।
ट्रंप ने बार-बार ताकाइची की तारीफ करते हुए उन्हें “महान महिला” बताया और कहा कि उनके बीच “बहुत अच्छे संबंध” हैं। डिनर के दौरान उन्होंने उन्हें “शानदार महिला” कहा और कहा, “व्हाइट हाउस में आपका हमारे साथ होना सम्मान की बात है।”
ताकाइची ने भी इस व्यक्तिगत तालमेल को आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्रंप से कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि डोनाल्ड और मैं इस साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे अच्छे साथी हैं,” और बाद में कहा, “जापान वापस आ गया है।”
फिर भी, पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी ने कुछ समय के लिए इस सावधानीपूर्वक बनाए गए माहौल को तोड़ दिया।
जापान के लिए उनका व्यापक संदेश यह था कि जब अपने हित सीधे जुड़े हों, तो सहयोगी देशों को “आगे आना चाहिए”, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि जापान आगे आएगा क्योंकि हमारे बीच ऐसा संबंध है। जापान के मामले में, मैंने सुना है कि वह अपना 90 प्रतिशत से अधिक तेल इसी जलडमरूमध्य से प्राप्त करता है।”
बैठक के दौरान ताकाइची ने पर्ल हार्बर वाली टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन के मुद्दे पर उन्होंने संतुलित रुख अपनाया और कहा कि जापान “चीन के साथ संवाद के लिए लगातार खुला रहा है” और उसे उम्मीद है कि अमेरिका-चीन संबंध “क्षेत्रीय सुरक्षा” और “वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला” को मजबूत करेंगे।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और जापान ने अपने संबंधों को फिर से मजबूत किया और यह वॉशिंगटन के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक बन गया। पर्ल हार्बर आज भी एक बेहद प्रतीकात्मक और संवेदनशील ऐतिहासिक संदर्भ है, भले ही अब दोनों देश रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा में घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं।
--आईएएनएस
पीएम
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