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मध्य पूर्व तनाव के बीच व्हाइट हाउस में ट्रंप और सनाए ताकाइची की मुलाकात, ईरान संकट और ऊर्जा व्यापार पर हुई बात

वाशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक ने वैश्विक राजनीति में एक अहम संदेश दिया। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दोनों नेताओं ने न सिर्फ रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की, बल्कि अपने रिश्तों की गर्मजोशी भी दिखाई।

गुरुवार को ओवल ऑफिस से लेकर स्टेट डाइनिंग रूम तक पूरे दिन चली इस मुलाकात में औपचारिकता और रणनीतिक बातचीत का संतुलन देखने को मिला। राष्ट्रपति ट्रंप ने सनाए ताकाइची को बेहतरीन दोस्त और मजबूत साझेदार बताया और उनकी हालिया चुनावी जीत की तारीफ की। वहीं जापान के प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी ट्रंप का समर्थन करते हुए कहा कि दुनिया में शांति सिर्फ आप ही ला सकते हैं।

ओवल ऑफिस में शुरुआती बातचीत के बाद ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, चीन और अमेरिका के सहयोगियों की भूमिका जैसे विषयों पर बात हुई।

राष्ट्रपति ट्रंप ने जापान को अमेरिका का सबसे अहम सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले साल हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने जापान के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश और अमेरिकी सैन्य उपकरणों की खरीद का भी स्वागत किया।

वहीं प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस दौरे को रणनीतिक और व्यक्तिगत दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय बहुत गंभीर सुरक्षा माहौल का सामना कर रही है और मध्य पूर्व के संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि वह वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए ठोस प्रस्ताव लेकर वाशिंगटन आई हैं।

ईरान के मुद्दे पर सनाए ताकाइची का रुख साफ और सख्त रहा। उन्होंने कहा, ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति कभी नहीं दी जा सकती। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में हमलों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी बंद होने की स्थिति की भी कड़ी निंदा की।

जापानी मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री ताकाइची ने बताया कि दोनों देशों ने अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। जापान, अमेरिका से खरीदे गए कच्चे तेल का संयुक्त भंडारण (स्टॉकपाइल) भी करना चाहता है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री संसाधनों और मिनामितोरिशिमा के पास पाए जाने वाले रेयर अर्थ मड पर भी बातचीत आगे बढ़ी है।

सुरक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें मिसाइलों का संयुक्त विकास और उत्पादन शामिल है। साथ ही चीन, उत्तर कोरिया और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक पर भी समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी।

व्हाइट हाउस डिनर के दौरान रिश्तों की गर्मजोशी साफ नजर आई। सनाए ताकाइची ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर बधाई दी और 250 अतिरिक्त चेरी ब्लॉसम के पेड़ उपहार में देने की घोषणा की। उन्होंने ट्रंप के बेटे बैरोन ट्रंप को जन्मदिन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए उनकी तारीफ भी की।

राष्ट्रपति ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री ताकाइची को शानदार महिला बताते हुए कहा कि उनका स्वागत करना सम्मान की बात है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ताकाइची ने पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के प्रसिद्ध वाक्य को दोहराते हुए कहा, जापान वापस आ गया है।

अमेरिका-जापान गठबंधन लंबे समय से पूर्वी एशिया में सुरक्षा का मजबूत आधार रहा है। अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और रक्षा सहयोग इस रिश्ते को मजबूती देते हैं। हाल के वर्षों में यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और सप्लाई चेन तक फैल गई है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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विदेशी छात्रों के लिए वैकल्पिक शिक्षा योजना का समर्थन करता है अमेरिकी विधेयक

वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सुरक्षा के उद्देश्य से एक द्विदलीय बिल पेश किया है। इससे कुशल प्रतिभाओं के लिए बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत सहित हजारों विदेशी स्नातकों को अमेरिका में बनाए रखा जा सकेगा।

प्रतिनिधियों सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे और भारतीय अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति ने वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम को कानून में संहिताबद्ध करने के लिए कीप इनोवेटर्स इन अमेरिका एक्ट का अनावरण किया। इससे छात्रों, विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं के लिए दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान की जा सकेगी।

यह विधेयक इमीग्रेशन एंड नेशनिलिटी एक्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव रखता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार की औपचारिक अनुमति मिल सके, जिसमें डिग्री पूरी करने के बाद का समय भी शामिल है।

तीन दशकों से अधिक समय से, दोनों दलों की सरकारें नियमों के जरिए ओपीटी को बनाए रखती आई हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि इसे कानून में शामिल करने से अचानक नीतिगत बदलावों को रोका जा सकेगा और निरंतरता सुनिश्चित होगी।

लिकार्डो ने कहा, “हमारे पास एक विकल्प है कि अमेरिका में सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षित कर देश की सफलता में योगदान दें या फिर उन्हें चीन, भारत और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों में वापस भेज दें, जहां वे हमारे खिलाफ कंपनियां शुरू करें।”

ओबर्नोल्टे ने कहा कि यह बिल कार्यक्रम में स्पष्टता और जवाबदेही लाएगा। “ओपीटी कार्यक्रम को कानून में शामिल करने से उस व्यवस्था को स्पष्टता और जवाबदेही मिलेगी, जो छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने की अनुमति देती है।” उन्होंने जोड़ा कि बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रतिभा को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

यह कदम ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने नवंबर में संकेत दिया था कि वह OPT कार्यक्रम को समाप्त कर सकता है, जिससे यह चिंता बढ़ गई थी कि अमेरिका में प्रशिक्षित प्रतिभाएं अन्य देशों की ओर रुख कर सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केवल 2024–2025 शैक्षणिक वर्ष में ही उन्होंने 42.9 अरब डॉलर का योगदान दिया, जिससे व्यवसायों, शोध संस्थानों और स्थानीय समुदायों को समर्थन मिला।

इस बिल को उद्योग समूहों, विश्वविद्यालयों और आप्रवासन समर्थकों के व्यापक गठबंधन का समर्थन मिला है।

यूएस फॉर सक्सेस कोएलिशन की कार्यकारी निदेशक जिल वेल्च ने कहा कि कांग्रेस के पास “ओपीटी को कानून में शामिल कर स्पष्टता और स्थिरता प्रदान करने का अवसर है, जिससे अमेरिका वैश्विक प्रतिभा के लिए शीर्ष गंतव्य बना रह सके।”

टेकनेट की अध्यक्ष और सीईओ लिंडा मोरे ने इस बिल को “अमेरिकी नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की दिशा में एक समझदारी भरा, द्विदलीय कदम” बताया और कहा कि इससे छात्रों, विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं को दीर्घकालिक निश्चितता मिलेगी।

एफडब्ल्यूडीडॉटअस के अध्यक्ष टॉड सल्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देना “सिर्फ सामान्य समझ की बात नहीं बल्कि हमारे देश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक है।”

अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बेंजामिन जॉनसन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय छात्र “अमेरिका की नवाचार प्रणाली की आधारशिला और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मजबूत चालक” हैं। उन्होंने बताया कि वे हर साल 40 अरब डॉलर से अधिक का योगदान देते हैं और लाखों नौकरियों का समर्थन करते हैं।

शिक्षा समूहों के अनुसार, 2024–2025 शैक्षणिक वर्ष में 2.9 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने ओपीटी किया, जिनमें से कई विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में थे, जिससे कार्यबल की कमी को पूरा करने में मदद मिली।

उद्योग जगत के नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री काउंसिल के अध्यक्ष और सीईओ जैसन ऑक्समैन ने कहा कि यह बिल सुनिश्चित करता है कि “बेहतरीन छात्र अमेरिका में ही व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार की अनुमति प्राप्त करें न कि विदेशों में।”

कंपिट अमेरिका के कार्यकारी निदेशक स्कॉट कोर्ले ने कहा कि ओपीटी को बनाए रखना “शीर्ष प्रतिभाओं को अमेरिका में बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम है कि हमारी अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और नवाचार प्रणाली दुनिया में सबसे मजबूत बनी रहे।”

भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है। भारतीय छात्र अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं, और उनमें से कई शिक्षा और रोजगार के बीच सेतु के रूप में ओपीटी पर निर्भर रहते हैं।

ओपीटी लंबे समय से एच-1बी वीजा प्रणाली का पूरक रहा है, जिससे स्नातकों को दीर्घकालिक रोजगार के रास्तों पर जाने से पहले कार्य अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिकी नियोक्ताओं को लगातार प्रतिभा की कमी का सामना करना पड़ता है।

हाल के वर्षों में कुशल श्रमिकों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हुई है और कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्पों का विस्तार किया है।

--आईएएनएस

पीएम

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IPL 2026: सांसद पप्पू यादव के बेटे का धमाका, सार्थक रंजन ने की छक्के-चौकों की बारिश, मारे इतने रन

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