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विदेशी छात्रों के लिए वैकल्पिक शिक्षा योजना का समर्थन करता है अमेरिकी विधेयक

वॉशिंगटन, 20 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सुरक्षा के उद्देश्य से एक द्विदलीय बिल पेश किया है। इससे कुशल प्रतिभाओं के लिए बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत सहित हजारों विदेशी स्नातकों को अमेरिका में बनाए रखा जा सकेगा।

प्रतिनिधियों सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे और भारतीय अमेरिकी राजा कृष्णमूर्ति ने वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम को कानून में संहिताबद्ध करने के लिए कीप इनोवेटर्स इन अमेरिका एक्ट का अनावरण किया। इससे छात्रों, विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं के लिए दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान की जा सकेगी।

यह विधेयक इमीग्रेशन एंड नेशनिलिटी एक्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव रखता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार की औपचारिक अनुमति मिल सके, जिसमें डिग्री पूरी करने के बाद का समय भी शामिल है।

तीन दशकों से अधिक समय से, दोनों दलों की सरकारें नियमों के जरिए ओपीटी को बनाए रखती आई हैं। प्रतिनिधियों का कहना है कि इसे कानून में शामिल करने से अचानक नीतिगत बदलावों को रोका जा सकेगा और निरंतरता सुनिश्चित होगी।

लिकार्डो ने कहा, “हमारे पास एक विकल्प है कि अमेरिका में सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षित कर देश की सफलता में योगदान दें या फिर उन्हें चीन, भारत और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों में वापस भेज दें, जहां वे हमारे खिलाफ कंपनियां शुरू करें।”

ओबर्नोल्टे ने कहा कि यह बिल कार्यक्रम में स्पष्टता और जवाबदेही लाएगा। “ओपीटी कार्यक्रम को कानून में शामिल करने से उस व्यवस्था को स्पष्टता और जवाबदेही मिलेगी, जो छात्रों को उनके अध्ययन क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने की अनुमति देती है।” उन्होंने जोड़ा कि बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रतिभा को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

यह कदम ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने नवंबर में संकेत दिया था कि वह OPT कार्यक्रम को समाप्त कर सकता है, जिससे यह चिंता बढ़ गई थी कि अमेरिका में प्रशिक्षित प्रतिभाएं अन्य देशों की ओर रुख कर सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। केवल 2024–2025 शैक्षणिक वर्ष में ही उन्होंने 42.9 अरब डॉलर का योगदान दिया, जिससे व्यवसायों, शोध संस्थानों और स्थानीय समुदायों को समर्थन मिला।

इस बिल को उद्योग समूहों, विश्वविद्यालयों और आप्रवासन समर्थकों के व्यापक गठबंधन का समर्थन मिला है।

यूएस फॉर सक्सेस कोएलिशन की कार्यकारी निदेशक जिल वेल्च ने कहा कि कांग्रेस के पास “ओपीटी को कानून में शामिल कर स्पष्टता और स्थिरता प्रदान करने का अवसर है, जिससे अमेरिका वैश्विक प्रतिभा के लिए शीर्ष गंतव्य बना रह सके।”

टेकनेट की अध्यक्ष और सीईओ लिंडा मोरे ने इस बिल को “अमेरिकी नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने की दिशा में एक समझदारी भरा, द्विदलीय कदम” बताया और कहा कि इससे छात्रों, विश्वविद्यालयों और नियोक्ताओं को दीर्घकालिक निश्चितता मिलेगी।

एफडब्ल्यूडीडॉटअस के अध्यक्ष टॉड सल्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देना “सिर्फ सामान्य समझ की बात नहीं बल्कि हमारे देश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक है।”

अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बेंजामिन जॉनसन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय छात्र “अमेरिका की नवाचार प्रणाली की आधारशिला और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मजबूत चालक” हैं। उन्होंने बताया कि वे हर साल 40 अरब डॉलर से अधिक का योगदान देते हैं और लाखों नौकरियों का समर्थन करते हैं।

शिक्षा समूहों के अनुसार, 2024–2025 शैक्षणिक वर्ष में 2.9 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने ओपीटी किया, जिनमें से कई विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में थे, जिससे कार्यबल की कमी को पूरा करने में मदद मिली।

उद्योग जगत के नेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक महत्व पर भी जोर दिया। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री काउंसिल के अध्यक्ष और सीईओ जैसन ऑक्समैन ने कहा कि यह बिल सुनिश्चित करता है कि “बेहतरीन छात्र अमेरिका में ही व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार की अनुमति प्राप्त करें न कि विदेशों में।”

कंपिट अमेरिका के कार्यकारी निदेशक स्कॉट कोर्ले ने कहा कि ओपीटी को बनाए रखना “शीर्ष प्रतिभाओं को अमेरिका में बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक जरूरी कदम है कि हमारी अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और नवाचार प्रणाली दुनिया में सबसे मजबूत बनी रहे।”

भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है। भारतीय छात्र अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं, और उनमें से कई शिक्षा और रोजगार के बीच सेतु के रूप में ओपीटी पर निर्भर रहते हैं।

ओपीटी लंबे समय से एच-1बी वीजा प्रणाली का पूरक रहा है, जिससे स्नातकों को दीर्घकालिक रोजगार के रास्तों पर जाने से पहले कार्य अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिकी नियोक्ताओं को लगातार प्रतिभा की कमी का सामना करना पड़ता है।

हाल के वर्षों में कुशल श्रमिकों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज हुई है और कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए पढ़ाई के बाद काम करने के विकल्पों का विस्तार किया है।

--आईएएनएस

पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Chaitra Navratri 2026: कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी? जानें देवी के दूसरे स्वरूप की कथा और महत्व

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान नौ दिनों तक देवी के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. आज यानी 20 मार्च 2026 को नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. यह स्वरूप तप, त्याग और साधना का प्रतीक माना जाता है. मां का ये स्वरूप भक्तों को शुभ और अनंत फल देने वाला है. मां श्वेत वस्त्र में सुशोभित हैं और उनके दाहिने हाथ में जप माला तो वहीं बाएं हाथ में कमण्डल है. चलिए जानते हैं कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी और उनके दूसरे स्वरूप की कथा और महत्व के बारे में. 

कौन हैं मां ब्रह्मचारिणी? 

मां ब्रह्मचारिणी का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है. ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तप या साधना और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली. यानी वह देवी जो तप और संयम का पालन करती हैं. इस रूप में मां दुर्गा ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. मां ब्रह्मचारिणी का रूप बेहद सरल और शांत होता है. वह सफेद वस्त्र धारण करती हैं. उनके दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल होता है. उनका यह रूप सादगी और आत्मबल को दर्शाता है.

मां ब्रह्मचारिणी की कथा ( Maa Brahmacharini Ki Katha) 

पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. उन्होंने कई वर्षों तक केवल फल और फूल खाए. बाद में उन्होंने केवल बेलपत्र पर जीवन बिताया. अंत में उन्होंने अन्न और जल तक का त्याग कर दिया. उनकी इस कठिन साधना से देवता भी प्रभावित हुए. अंत में भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. यही कारण है कि मां पार्वती को ब्रह्मचारिणी कहा जाता है.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति को धैर्य और आत्मसंयम की शक्ति मिलती है. यह दिन साधना और मन को स्थिर करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. जो लोग जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस दिन मां की पूजा अवश्य करनी चाहिए. ऐसा करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है.

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा? 

इस दिन सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें. फिर मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें. उन्हें फूल, फल और मिश्री अर्पित करें. दीप जलाएं और मंत्रों का जाप करें. माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य, तप और समर्पण जरूरी है. नवरात्रि का यह दिन हमें आत्मबल बढ़ाने और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.

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