Doraemon: डोरेमोन के दिग्गज निर्देशक त्सुतोमु शिबायामा का निधन, 84 की उम्र में ली अंतिम सांस!
Doraemon: जापानी एनीमेशन इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर निर्देशक त्सुतोमु शिबायामा (Tsutomu Shibayama) का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 6 मार्च 2026 को अंतिम सांस ली। जापान में उन्हें 'फादर ऑफ नेशनल एनीमेशन' कहा जाता है। उनके काम ने एनीमे इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
फेफड़ों के कैंसर से जंग हार गए
शिबायामा लंबे समय से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे। इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो पाया और आखिरकार उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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स्टूडियो ने दी जानकारी
उनके निधन की जानकारी उनके स्टूडियो से जुड़े सहयोगी स्टूडियो 'Ajia-Do Animation Works' ने 17 मार्च को साझा की। परिवार की इच्छा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार पहले ही निजी तौर पर किया जा चुका था।
‘डोरेमोन’ से मिली पहचान
Doraemon को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने में शिबायामा का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने करीब 20 साल तक इस शो को संभाला और कई पीढ़ियों का मनोरंजन किया।
टीवी से लेकर फिल्मों तक योगदान
उन्होंने 1979 से 2005 तक ‘डोरेमोन’ टीवी सीरीज का निर्देशन किया। इसके अलावा इस फ्रेंचाइजी की 20 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन भी किया। उनकी बनाई कहानियां आज भी बच्चों और बड़ों दोनों के दिलों में बसी हैं।
करियर की शुरुआत
शिबायामा ने अपने करियर की शुरुआत 1963 में टोई एनिमेशन से की थी। बाद में उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और एनीमेशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके निधन से एनीमेशन जगत में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर फैंस और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
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वसंत में आहार से लेकर दिनचर्या में परिवर्तन जरूरी, दिन में सोने से करें परहेज
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। मार्च और अप्रैल का महीना बीमारियों वाला होता है। इस वक्त मौसम तेजी से बदलता है और सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ता है।
मार्च और अप्रैल को वसंत ऋतु का समय माना जाता है। हेमंत और शिशिर ऋतु में बदलाव के बाद वसंत ऋतु का आगमन होता है। जहां हेमंत और शिशिर ऋतु में कफ जमने की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं वसंत ऋतु में शरीर में जमा कफ तेजी से पिघलने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, सुस्ती, पाचन की कमजोरी और भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में आहार और दिनचर्या में भी परिवर्तन लाना जरूरी है।
आयुर्वेद मानता है कि वसंत ऋतु में सुबह हल्दी उठने और व्यायाम करने के बहुत सारे फायदे शरीर को मिलते हैं। अगर इस मौसम में सही खान-पान और दिनचर्या अपनाई जाए, तो शरीर संतुलित रहता है और मौसमी बीमारियों से बचाव हो सकता है। पहले जानते हैं कि आहार में क्या परिवर्तन लाया जाए।
आहार में कफ को कम करने वाली चीजों को शामिल करें और कोशिश करें कि आहार कड़वा और कसैला हो। माना जाता है कि वंसत में खाया गया कड़वा और कसैला भोजन पूरे साल शरीर को सेहतमंद रखता है। आहार में नीम के पत्ते, पुराना गेहूं, मूंग दाल और जौ को शामिल करें। जितना हो सके पानी को उबाल कर पिएं क्योंकि वसंत के महीने में मच्छर भी बढ़ जाते हैं और बीमारियां जल्दी लगने लगती हैं।
वसंत के महीने में कुछ चीजों का परहेज करना भी जरूरी है। आहार में मीठा, खट्टा, और खारी चीजों का सेवन कम करें। घी, तेल से बनी मीठी चीजों का सेवन न करें। वसंत ऋतु में दही न खाने की भी सलाह दी जाती है। दही की जगह छाछ पी सकते हैं। छाछ का सेवन काले नमक और जीरा पाउडर के साथ ही करें। इससे शरीर में कफ नहीं जमता है। वसंत के महीने में दिन में न सोने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि दिन में सोने से शरीर में कफ की मात्रा बढ़ती है और शरीर भारी और सुस्त महसूस होता है।
--आईएएनएस
पीएस/एबीएम
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