बुक रिव्यू- जो राह भूलो तो कहानियों के पास जाओ:मिट्टी से उपजी हैं गोरखनाथ की कहानियां, जो दिखातीं रोशनी और नया रास्ता
किताब- लोककथाएं प्रेम की और संत गोरखनाथ (लोर्स ऑफ लव एंड सैंट गोरखनाथ का हिंदी अनुवाद) लेखक- नलिन वर्मा, लालू प्रसाद यादव अनुवाद- विजय कुमार झा प्रकाशक- पेंगुइन मूल्य- 299 रुपए भारतीय संत परंपरा में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ आध्यात्मिक मार्ग नहीं दिखाया, बल्कि समाज और संस्कृति को भी प्रभावित किया। संत गोरखनाथ ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। ‘लोककथाएं प्रेम की और संत गोरखनाथ‘ किताब में गोरखनाथ के विचारों और लोकजीवन पर पड़े उनके प्रभाव को समझाया गया है। यह किताब बताती है कि गोरखनाथ केवल एक योगी या संत नहीं, बल्कि ऐसे विचारक थे, जिनकी शिक्षा ने समाज की सोच और जीवनशैली पर भी गहरा असर डाला। किताब क्या कहती है? यह किताब बताती है कि गोरखनाथ के लिए योग सिर्फ शरीर की कसरत नहीं, बल्कि मन को जीतने का रास्ता भी है। उनकी शिक्षाओं का मूल मंत्र है, बाहरी दिखावे को छोड़कर अपने भीतर की शक्ति को पहचानना। भारतीय योग परंपरा में संत गोरखनाथ का नाम अनुशासन और आत्मज्ञान का पर्याय है। समाज को जोड़ने का संदेश इस किताब का सबसे सशक्त पक्ष ‘समानता’ है। नाथ संप्रदाय ने उस दौर में जात-पात की बेड़ियां तोड़ीं, जब समाज में यह सब बहुत गहरे व्याप्त था। इसमें किसान, जुलाहे और चरवाहे सभी को बराबर का स्थान मिला। गोरखनाथ की यह समावेशी दृष्टि आज के दौर में भी उतनी ही जरूरी है। किताब के 9 सबक ग्राफिक में देखिए- योग और वैराग्य के संत गोरखनाथ भारतीय योग परंपरा के प्रमुख संत माने जाते हैं और नाथ संप्रदाय के सबसे प्रभावशाली गुरु के रूप में उनकी पहचान है। उनकी शिक्षा का मूल आधार योग, संयम और आत्मानुशासन है। उनका मानना था कि मनुष्य अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर ही जीवन का सही अर्थ समझ सकता है। उनकी शिक्षा में यह संदेश भी मिलता है कि बाहरी वैभव और मोह से दूर रहकर सादगी और संतुलन का जीवन अपनाना ही वास्तविक आध्यात्मिकता है। समाज और संस्कृति का दस्तावेज है ये किताब यह किताब केवल धार्मिक या आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि अपने समय के समाज और संस्कृति का दस्तावेज भी है। इसमें दिखता है कि नाथ संप्रदाय में विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग शामिल थे। इससे यह संकेत मिलता है कि उस दौर में भी आध्यात्मिक परंपराएं सामाजिक सीमाओं को तोड़ने का प्रयास कर रही थीं। नाथ परंपरा ने साधारण लोगों, जुलाहों, किसानों और चरवाहों को भी आध्यात्मिक मार्ग में स्थान दिया। लोकभाषा और आसान शैली किताब की भाषा सरल है। इसमें भारी-भरकम दार्शनिक शब्दों की जगह सहज तरीका अपनाया गया है। यही वजह है कि पाठक इन कथाओं को पढ़ते समय केवल जानकारी ही नहीं प्राप्त करता, बल्कि लोकजीवन की जीवंतता भी महसूस करता है। लेखक ने लोकगाथाओं और संत परंपरा की कहानियों को इस तरह लिखा है कि वो रोचक लगती हैं और प्रेरित भी करती हैं। प्रेम और वैराग्य का संतुलन इस किताब की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें प्रेम और वैराग्य दोनों साथ-साथ चलते हैं। एक ओर लोककथाएं प्रेम की तीव्रता और भावनात्मकता को दिखाती हैं, तो दूसरी ओर गोरखनाथ की शिक्षाएं वैराग्य और आत्मसंयम की ओर संकेत करती हैं। यह विरोधाभास नहीं, बल्कि जीवन का संतुलन है। प्रेम मनुष्य को संवेदनशील बनाता है, जबकि वैराग्य उसे संतुलित और जागरूक बनाता है। किताब का यही संतुलन इसे अलग और अर्थपूर्ण बनाता है। आधुनिक समय में प्रासंगिकता आज के समय में जब रिश्तों में धैर्य कम और अपेक्षाएं अधिक हो गई हैं, तब ऐसी लोककथाएं हमें याद दिलाती हैं कि प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। इसी तरह संत गोरखनाथ की शिक्षाएं यह भी बताती हैं कि जीवन में सादगी, संयम और आत्मचिंतन का महत्व हमेशा बना रहता है। इसलिए यह किताब केवल अतीत की कहानियां नहीं बताती, बल्कि वर्तमान जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है। इसे क्यों पढ़ें? इसमें संत गोरखनाथ के प्रभाव से उपजी लोककथाओं को बेहद सहज अंदाज में लिखा गया है। यह केवल आध्यात्मिक विचार नहीं देती, बल्कि प्रेम, सादगी, समानता और आत्मचिंतन जैसे जीवन के जरूरी मूल्यों को भी समझाती है। मौजूदा वक्त में यह किताब और भी प्रासंगिक है, जो सोच को संतुलित और संवेदनशील बनाती है। किताब के बारे में मेरी राय ……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- एक शानदार एपिक करियर कैसे बनाएं: सबसे जरूरी है जानना अपना पैशन और पर्पज, इसी से बनेगा ग्रोथ माइंडसेट, आएगा डिसिप्लिन अंकुर वारिकू ने इस किताब में अपनी जिंदगी के रियल एक्सपीरियंस शेयर किए हैं और बताया है कि अपना पैशन कैसे पहचानें। उन्होंने किताब में बताया है कि सक्सेस माइंडसेट कैसे बनाएं, अच्छी आदतें कैसे डेवलप करें और खुद को कैसे पहचानें। यह ट्रेडिशनल सेल्फ-हेल्प बुक नहीं, बल्कि एक एक्शन-ओरिएंटेड किताब है। आगे पढ़िए…
जरूरत की खबर- नवरात्रि में खाएं टेस्टी और हेल्दी फलाहार:न्यूट्रिशन से भरपूर 12 रेसिपीज, व्रत का खाना हेल्दी बनाने के 8 टिप्स
आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है। इस बार नवरात्रि 19 से 27 मार्च 2026 तक है। इस दौरान बहुत से लोग पूरे नौ दिनों का व्रत रखते हैं। व्रत में खाने को लेकर संयम बरतने होते हैं। व्रत में खाने के विकल्प कम होने पर आमतौर पर लोग या तो लंबे समय तक भूखे रहते हैं या फिर तली-भुनी चीजें ज्यादा खाते हैं। इससे थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि व्रत के दौरान ऐसी डिशेज चुनी जाएं, जो स्वाद के साथ शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण भी दें। मूंगफली, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, दही और फलों से व्रत के लिए कई हेल्दी व टेस्टी डिशेज आसानी से तैयार की जा सकती हैं। इसलिए जरूरत की खबर में आज बात आसान और पौष्टिक व्रत रेसिपीज की। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- व्रत के लिए ऐसी कौन-सी डिशेज हैं, जो स्वादिष्ट होने के साथ पोषण से भरपूर भी हैं? जवाब- व्रत की डाइट में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, जैसे मूंगफली, मखाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और राजगिरा। इनसे कई हेल्दी और स्वादिष्ट डिशेज तैयार की जा सकती हैं। उदाहरण के लिए, रोस्टेड मखाना, कुट्टू चीला और राजगिरा पराठा जैसी डिशेज स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होती हैं। नीचे दिए ग्राफिक में व्रत के लिए कुछ हेल्दी डिशेज की लिस्ट देखिए- आइए, अब इन डिशेज की रेसिपीज को एक-एक करके विस्तार से समझते हैं- 1. साबूदाना खिचड़ी सामग्री साबूदाना खिचड़ी की रेसिपी 2. रोस्टेड मखाना सामग्री रोस्टेड मखाना की रेसिपी 3. राजगिरा आलू पराठा सामग्री राजगिरा आलू पराठा की रेसिपी 4. कुट्टू आलू पराठा सामग्री कुट्टू आलू पराठा की रेसिपी 5. सिंघाड़े के आटे की बेक्ड पूरियां सामग्री बेक्ड पूरियों की रेसिपी 6. फल और दही की स्मूदी सामग्री फल और दही की स्मूदी की रेसिपी 7. कुट्टू चीला सामग्री कुट्टू चीला की रेसिपी 8. लौकी रायता सामग्री लौकी रायता की रेसिपी 9. शकरकंद चाट सामग्री शकरकंद चाट की रेसिपी 10. मखाना खीर (लो-शुगर) सामग्री मखाना खीर की रेसिपी 11. फ्रूट सलाद सामग्री फ्रूट सलाद की रेसिपी 12. कुट्टू की इडली सामग्री कुट्टू की इडली की रेसिपी सवाल- व्रत के खाने को हेल्दी कैसे बना सकते हैं? जवाब- व्रत के दौरान लोग अक्सर तली-भुनी और ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खा लेते हैं। इससे व्रत का खाना हेल्दी होने के बजाय हैवी हो जाता है। हालांकि कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर व्रत के भोजन को ज्यादा पौष्टिक बनाया जा सकता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- व्रत का खाना बनाते समय कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- व्रत के दौरान लोग भोजन की शुद्धता और स्वाद पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे फलाहार हैवी हो जाता है और उसके न्यूट्रिशन कम हो जाते हैं। इसलिए व्रत का भोजन बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर व्रत का खाना ज्यादा हेल्दी और संतुलित बनाया जा सकता है। ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- नौकरीपेशा लोग कैसे रखें नवरात्रि का व्रत: 9 दिनों का कंप्लीट डाइट प्लान ताकि ऑफिस में न आए नींद, न लगे कमजोरी व्रत का मतलब है– संयम और अनुशासन। नवरात्रि व्रत में यह संयम और अनुशासन पूरे 9 दिन बरतना होता है। अगर इसके साथ नौकरी या ऑफिस के काम भी करने पड़ें, तो चुनौती बढ़ जाती है। पूरी खबर पढ़िए…
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