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iQOO Neo 11 Ultra का लॉन्च अगले हफ्ते कन्फर्म, दमदार प्रोसेसर के साथ मिलेगी बड़ी बैटरी

iQOO Neo 11 Ultra की लॉन्च डेट आधिकारिक तौर पर कन्फर्म हो गई है। यह स्मार्टफोन 10 अगस्त को चीन में लॉन्च होगा। इसके संभावित फीचर्स भी सामने आ गए हैं। 

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क्यों बढ़ी परिसीमन की चर्चा? क्या बदल सकता है देश का राजनीतिक नक्शा? किस राज्य को होगा फायदा और किसे नुकसान?

Delimitation: देश में परिसीमन की चर्चा ने इन दिनों काफी जोर पकड़ लिया है और इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं. परिसीमन की चर्चा हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक, 2026 और संविधान विधेयक, 2026 के पेश होने के बाद तेजी से बढ़ी है. इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 815 से 850 करने का प्रस्ताव है, जिसका सीधा संबंध महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने से भी है.

नए लोकसभा कक्ष 888 सदस्यों के बैठने की क्षमता

हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की शर्त भी सीधे तौर पर परिसीमन और नई जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ी है. नए संसद भवन का निर्माण भी इस चर्चा को हवा दे रहा है क्योंकि वहां लोकसभा कक्ष को 888 और राज्यसभा को 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता के साथ बनाया गया है. वर्तमान में लोकसभा की सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं और पिछले पांच दशकों में देश की आबादी के साथ-साथ राज्यों के जनसांख्यिकीय अनुपात में बड़ा बदलाव आया है, जिसके कारण सीटों के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

क्या बदल सकता है देश का राजनीतिक नक्शा?

अगर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन होता है, तो भारत का राजनीतिक नक्शा और सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल सकता है. सबसे पहला बदलाव संसद के आकार में देखने को मिलेगा, जहां लोकसभा की कुल सीटें वर्तमान 543 से बढ़कर 800 के पार जा सकती है. सीटों का यह आवंटन चूंकि आबादी के अनुपात में होता है, इसलिए उत्तर भारत, विशेषकर हिंदी भाषी राज्यों का केंद्र सरकार बनाने में दबदबा और अधिक बढ़ जाएगा. दक्षिणी राज्यों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने राष्ट्रीय नीतियों का पालन करते हुए परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में शानदार काम किया है. ऐसे में केवल आबादी के आधार पर परिसीमन होने से राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव घट जाएगा और यह उनके अच्छे काम की सजा मिलने जैसा होगा.

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किस राज्य को होगा फायदा और किसे नुकसान?

परिसीमन के संभावित गणित को समझें तो इसका सबसे बड़ा फायदा उत्तर और मध्य भारत के राज्यों को होगा. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ी आबादी के कारण लोकसभा सीटों में भारी वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे केंद्र की सत्ता की चाबी पूरी तरह से इन राज्यों के पास आ सकती है. दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक को इस प्रक्रिया में सापेक्ष रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है. भले ही इन राज्यों की कुल सीटों की संख्या कम न हो, लेकिन पूरे सदन में उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रतिशत) काफी कम हो जाएगा. वहीं, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पूर्वी एवं पहाड़ी राज्यों पर इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि दर मध्यम रही है. दक्षिण की इन चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. 

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