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क्यों बढ़ी परिसीमन की चर्चा? क्या बदल सकता है देश का राजनीतिक नक्शा? किस राज्य को होगा फायदा और किसे नुकसान?

Delimitation: देश में परिसीमन की चर्चा ने इन दिनों काफी जोर पकड़ लिया है और इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं. परिसीमन की चर्चा हाल ही में संसद में परिसीमन विधेयक, 2026 और संविधान विधेयक, 2026 के पेश होने के बाद तेजी से बढ़ी है. इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 815 से 850 करने का प्रस्ताव है, जिसका सीधा संबंध महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने से भी है.

नए लोकसभा कक्ष 888 सदस्यों के बैठने की क्षमता

हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की शर्त भी सीधे तौर पर परिसीमन और नई जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ी है. नए संसद भवन का निर्माण भी इस चर्चा को हवा दे रहा है क्योंकि वहां लोकसभा कक्ष को 888 और राज्यसभा को 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता के साथ बनाया गया है. वर्तमान में लोकसभा की सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं और पिछले पांच दशकों में देश की आबादी के साथ-साथ राज्यों के जनसांख्यिकीय अनुपात में बड़ा बदलाव आया है, जिसके कारण सीटों के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

क्या बदल सकता है देश का राजनीतिक नक्शा?

अगर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन होता है, तो भारत का राजनीतिक नक्शा और सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल सकता है. सबसे पहला बदलाव संसद के आकार में देखने को मिलेगा, जहां लोकसभा की कुल सीटें वर्तमान 543 से बढ़कर 800 के पार जा सकती है. सीटों का यह आवंटन चूंकि आबादी के अनुपात में होता है, इसलिए उत्तर भारत, विशेषकर हिंदी भाषी राज्यों का केंद्र सरकार बनाने में दबदबा और अधिक बढ़ जाएगा. दक्षिणी राज्यों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने राष्ट्रीय नीतियों का पालन करते हुए परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में शानदार काम किया है. ऐसे में केवल आबादी के आधार पर परिसीमन होने से राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव घट जाएगा और यह उनके अच्छे काम की सजा मिलने जैसा होगा.

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किस राज्य को होगा फायदा और किसे नुकसान?

परिसीमन के संभावित गणित को समझें तो इसका सबसे बड़ा फायदा उत्तर और मध्य भारत के राज्यों को होगा. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ी आबादी के कारण लोकसभा सीटों में भारी वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे केंद्र की सत्ता की चाबी पूरी तरह से इन राज्यों के पास आ सकती है. दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक को इस प्रक्रिया में सापेक्ष रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है. भले ही इन राज्यों की कुल सीटों की संख्या कम न हो, लेकिन पूरे सदन में उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रतिशत) काफी कम हो जाएगा. वहीं, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पूर्वी एवं पहाड़ी राज्यों पर इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि दर मध्यम रही है. दक्षिण की इन चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने आश्वस्त किया है कि किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा. 

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'जबरदस्ती किसिंग सीन करवाया', पवन सिंह पर काजल राघवानी ने लगाया आरोप, निरहुआ-आम्रपाली को लेकर कही ये बात

Kajal Raghwani on Pawan Singh: कलर्स टेलीविजन का नया रियलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. शो में भोजपुरी इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आ रहे हैं, जहां मनोरंजन के साथ-साथ कई पुराने विवाद और अनसुने किस्से भी सामने आ रहे हैं. हाल ही में शो का नया प्रोमो रिलीज हुआ है, जिसमें भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी ने इंडस्ट्री से जुड़े कई ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है.

प्रोमो में काजल राघवानी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों को साझा करती दिखाई देती हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने एक्टर और सिंगर पवन सिंह को लेकर गंभीर आरोप लगाए. काजल का दावा है कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन पर किसिंग सीन करने का दबाव बनाया गया था.

'मैंने किसिंग सीन से मना किया'

शो के प्रोमो में काजल राघवानी कहती हैं, "पवन सिंह का तुमको पता ही है. वहां उनका किसिंग सीन हुआ था. जबरदस्ती करवाया. जब मैंने किसिंग सीन के लिए मना किया, तो वो सेट छोड़कर चले गए." काजल का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम और अपने साथ काम करने वाले लोगों का सम्मान किया है, लेकिन बदले में उन्हें वही सम्मान नहीं मिला. उन्होंने कहा, "मैंने सबकी इज्जत की है, लेकिन कोई इसके काबिल नहीं है." 

आम्रपाली दुबे और निरहुआ पर भी साधा निशाना

काजल राघवानी ने बातचीत के दौरान सिर्फ पवन सिंह का ही नाम नहीं लिया, बल्कि भोजपुरी सिनेमा की चर्चित जोड़ी आम्रपाली दुबे और दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, "आम्रपाली का भी मैं कुछ नहीं बोलना चाहती. दिनेश जी के चलते उन्होंने मुझे काम से हटवाया. वो चीज मुझे हमेशा बुरी लगेगी." काजल के इस बयान से ऐसा लगता है कि उनके मन में इंडस्ट्री के कुछ पुराने अनुभवों को लेकर आज भी नाराजगी बनी हुई है. 

'पहले इंडस्ट्री चला लें, फिर देश चलाएं'

शो के दौरान काजल राघवानी ने एक और तीखा बयान दिया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने कहा, "पहले लोग इंडस्ट्री चला लें, फिर देश चलाएं तो ज्यादा अच्छा है. उन लोगों को दस जगह मुंह मारना है." उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग काजल के समर्थन में नजर आ रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों पर सभी पक्षों की बात सामने आना भी जरूरी है.

प्रोमो के बाद सोशल मीडिया पर मची हलचल

'भोजपुरी बवाल' का ये प्रोमो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. फैंस लगातार इस पर अपनी राय दे रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि अगर काजल के आरोप सही हैं तो इस मामले पर खुलकर बात होनी चाहिए, वहीं कुछ लोग पवन सिंह और अन्य कलाकारों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं. शो के अगले एपिसोड को लेकर भी दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है. माना जा रहा है कि आने वाले एपिसोड्स में इस मुद्दे पर और भी खुलासे देखने को मिल सकते हैं.

लंबे समय तक साथ कर चुके हैं काम

गौरतलब है कि काजल राघवानी और पवन सिंह भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रिय ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में गिने जाते रहे हैं. दोनों ने कई फिल्मों और म्यूजिक वीडियोज में साथ काम किया है. उनकी जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया, लेकिन समय-समय पर दोनों के बीच मतभेद और विवाद की खबरें भी सामने आती रही हैं. वहीं आम्रपाली दुबे और निरहुआ भी भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे चर्चित जोड़ियों में शामिल हैं. 

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