अवैध प्रवासियों को लेकर अमेरिका की नई नीति ने पूरी दुनिया में बहस की आग भड़का दी है। हम आपको बता दें कि अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने जहां एक तरफ सियासी हलकों में हलचल मचा दी है, वहीं आम लोगों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने घोषणा की है कि जो अवैध प्रवासी स्वेच्छा से अपने देश लौटना चाहते हैं, उन्हें मुफ्त हवाई यात्रा के साथ करीब दो हजार छह सौ डॉलर की नकद सहायता भी दी जाएगी। इस योजना में भारत के लोग भी शामिल हैं और प्रचार के लिए ताजमहल जैसी प्रतीकात्मक तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है।
इस पूरी पहल को प्रोजेक्ट होमकमिंग नाम दिया गया है, जिसकी शुरुआत पिछले साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आरंभ के बाद की गई थी। यह योजना दरअसल उन लाखों अवैध प्रवासियों को लक्ष्य बनाकर तैयार की गई है जो अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं। विभाग का दावा है कि यह योजना उन्हें डर और दबाव के बजाय एक सम्मानजनक विकल्प देती है।
सरकार ने इस योजना को प्रचारित करने के लिए सोशल मीडिया मंचों पर जोरदार अभियान चलाया है। पोस्ट में ताजमहल के साथ कोलंबिया और चीन के प्रमुख स्थलों की तस्वीरें लगाई गईं और संदेश दिया गया कि अब घर लौटने का मौका है, वह भी एक नई शुरुआत के साथ। विभाग ने साफ कहा कि जो लोग खुद से वापस लौटेंगे उन्हें न तो गिरफ्तार किया जाएगा, न हिरासत में रखा जाएगा और न ही किसी तरह की बेड़ियों में बांधा जाएगा।
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग का एक विशेष एप भी तैयार किया गया है। इसके जरिये प्रवासी अपने लौटने की इच्छा दर्ज कर सकते हैं, अपनी जानकारी दे सकते हैं और यात्रा तथा आर्थिक सहायता से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2025 से अब तक करीब 22 लाख से ज्यादा अवैध प्रवासी इस योजना का लाभ उठा चुके हैं, जो इस पहल के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
सबसे चौंकाने वाली बात इस योजना के पीछे का आर्थिक गणित है। अमेरिका में किसी एक व्यक्ति को जबरन निर्वासित करने पर करीब 18 हजार दो सौ पैंतालीस डॉलर का खर्च आता है। इसके मुकाबले स्वेच्छा से लौटने वाले व्यक्ति पर कुल खर्च लगभग पांच हजार एक सौ डॉलर तक सीमित रह जाता है। यानी हर व्यक्ति पर तेरह हजार डॉलर से ज्यादा की बचत। सरकार इसे करदाताओं के पैसे की सुरक्षा के रूप में पेश कर रही है।
हालांकि यह योजना पूरी तरह विवादों से घिरी हुई है। जब इसे शुरू किया गया था तब सहायता राशि एक हजार डॉलर थी, जिसे बाद में बढ़ाकर तीन हजार डॉलर तक कर दिया गया। फिर जनवरी में इसे दो हजार छह सौ डॉलर कर दिया गया। यह उतार चढ़ाव खुद इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार इस योजना को लगातार बदलते हालात के हिसाब से ढाल रही है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया बेहद तीखी और व्यंग्य से भरी रही। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह करदाताओं के पैसे का सही इस्तेमाल है? एक व्यक्ति ने लिखा कि क्या अमेरिकी नागरिकों को भी दो हजार छह सौ डॉलर मिल सकते हैं। दूसरे ने तंज कसा कि यह करदाताओं के पैसे का अद्भुत उपयोग है। किसी ने पूछा कि क्या कानून का पालन करने वाले और मेहनत करने वाले नागरिकों को भी कोई इनाम मिलेगा? वहीं कुछ लोगों ने इसे सरकारी तंत्र की विफलता और मजाक तक बता दिया।
स्पष्ट है कि यह योजना केवल एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। जहां सरकार इसे व्यवस्थित और सस्ता समाधान बता रही है, वहीं जनता का एक बड़ा वर्ग इसे नीतिगत विफलता और संसाधनों की बर्बादी के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना वास्तव में कितनी सफल होती है और क्या यह अमेरिका की आव्रजन नीति को एक नई दिशा दे पाएगी या फिर यह केवल एक और विवादित प्रयोग बनकर रह जाएगी।
Jasprit Bumrah central contract: भारतीय क्रिकेट में सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बीसीसीआई ने 2025-26 सीजन (1 अक्तूबर 2025 से 30 सितंबर 2026) के लिए नई कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट जारी की है,जिसमें कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे अहम फैसला रहा A+ ग्रेड को पूरी तरह खत्म करना। इस फैसले का सीधा असर टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ियों पर पड़ा है, खासतौर पर जसप्रीत बुमराह पर।
नई लिस्ट में कुल 30 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। टॉप ग्रेड अब सिर्फ A है, जिसमें शुभमन गिल, बुमराह और रवींद्र जडेजा को जगह मिली है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पहले A+ ग्रेड में रहने वाले खिलाड़ियों को अब नीचे लाया गया है। पुराने सिस्टम में A+ खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपये मिलते थे, जबकि अब A ग्रेड में यह रकम घटकर 5 करोड़ रह गई है।
बुमराह को 2 करोड़ का होगा नुकसान? यानी बुमराह जैसे खिलाड़ी,जो तीनों फॉर्मेट में लगातार टीम के अहम सदस्य हैं,उन्हें सीधे 2 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता। यह फैसला इसलिए भी सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि बुमराह का प्रदर्शन लगातार शानदार रहा है और वह टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में गिने जाते हैं।हालांकि, खबरों के मुताबिक बोर्ड इस मामले पर दोबारा विचार कर सकता है।
बुमराह को मुआवजा दे सकता बीसीसीआई सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बीसीसीआई इस बात पर काम कर रहा है कि बुमराह को कैसे मुआवजा दिया जाए। बोर्ड के अंदर यह भी माना जा रहा है कि उनकी सैलरी में इतनी बड़ी कटौती करना पूरी तरह सही नहीं होगा। इसलिए कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
सिर्फ बुमराह ही नहीं, बल्कि कई और खिलाड़ियों को भी इस बदलाव का असर झेलना पड़ा है। केएल राहुल, मोहम्मद सिराज, हार्दिक पंड्या और ऋषभ पंत को ए से हटाकर बी ग्रेड में डाल दिया गया है। वहीं अक्षर पटेल को ग्रुप-सी में रखा गया है, जिसके कॉन्ट्रैक्ट की भी समीक्षा हो सकती है।
दूसरी ओर, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी अब कुछ फॉर्मेट से रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनका नीचे आना समझ में आता है। लेकिन जो खिलाड़ी लगातार तीनों फॉर्मेट खेल रहे हैं, उनके लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया है।अब नजर इस बात पर है कि क्या BCCI अपने इस फैसले में बदलाव करेगा या नहीं। अगर रिविजन होता है, तो बुमराह समेत कई खिलाड़ियों को राहत मिल सकती है।
बांग्लादेश द्वारा 2026 टी20 विश्व कप का बहिष्कार करने के फैसले पर आईसीसी ने कोई दंड नहीं दिया। लेकिन बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की कड़ी जांच हो सकती है। बीसीसीआई द्वारा केकेआर को मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 टीम से बाहर करने का निर्देश देने के बाद, बांग्लादेश ने आईसीसी को अपने इस फैसले की जानकारी दी और अंततः स्कॉटलैंड ने टूर्नामेंट में बांग्लादेश की जगह ले ली। आईसीसी के साथ कई बैठकों के बावजूद, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) किसी सहमति पर नहीं पहुंच सका और उसने टी20 विश्व कप में भाग लेने से इनकार कर दिया।
अब खबर है कि खेल मंत्री अमीनुल हक एक समिति का गठन करेंगे, जो इस बात की जांच करेगी कि बांग्लादेश ने टूर्नामेंट में भाग क्यों नहीं लिया। हक ने जोर देकर कहा कि समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या यह निर्णय खेल कूटनीति की विफलता का परिणाम था। टी20 विश्व कप 2026 की मेजबानी भारत और श्रीलंका ने संयुक्त रूप से की थी। उन्होंने कहा कि हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि हम विश्व कप में क्यों नहीं जा पाए। हमें यह समझना होगा कि हमारी खेल कूटनीति में कहां कमी रह गई। ईद के बाद हम इस विषय पर एक जांच समिति का गठन करेंगे। हमें अपनी खेल कूटनीति को मजबूत करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में हम यह गलती न दोहराएं।
हक ने यह भी दोहराया कि पिछले बीसीबी चुनावों में कथित अनियमितताओं, हेराफेरी और कदाचार की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। खेल मंत्री ने आगे कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, अंतिम निर्णय लेने से पहले वे आईसीसी से परामर्श करेंगे। बीसीबी ने सरकार को पहले ही चेतावनी दे दी थी कि वह उनके सिस्टम में दखल देना बंद करे। हक ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि हमारी पिछली सरकार ने पिछले साल बीसीबी चुनावों में सीधा दखल दिया था। मैंने इस बारे में कई बार बात की है। ढाका क्लबों और ज़िलों से मिले आरोपों के बाद हमने एक जांच समिति का गठन किया है। मैं उनकी रिपोर्ट पढूंगा, लेकिन मेरा अगला कदम आईसीसी से बात करने के बाद ही होगा।