US-Israel-Iran War: अमेरिका ने हॉर्मुज को खुलवाने के लिए ईरान पर दागे 5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बम
नई दिल्ली : मिडल ईस्ट में चल रही खींचतान अब आर-पार की जंग में बदल गई है। दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खुलवाने के लिए अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उनकी वायुसेना ने ईरान के उन मजबूत मिसाइल अड्डों को निशाना बनाया है, जहाँ से अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले किए जा रहे थे। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपने तरकश के सबसे घातक हथियार—5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' बमों—का इस्तेमाल किया है।
क्यों हॉर्मुज बना 'डेथ जोन' और अमेरिका ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला?
ईरान ने हॉर्मुज के उस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था, जहाँ से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस नाकेबंदी की वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 'X' पर जानकारी दी कि ईरान के तट पर बने एंटी-शिप मिसाइल अड्डों को इन भारी-भरकम बमों से पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। अमेरिका का मकसद तेल की सप्लाई को बहाल करना और ईरानी मिसाइलों के खतरे को जड़ से खत्म करना है।
क्या है ये 'बंकर बस्टर' बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा?
'बंकर बस्टर' (GBU-28) कोई साधारण बम नहीं है। आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की कई मीटर मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं।
- वजन: 5,000 पाउंड यानी करीब 2200 किलो।
- क्षमता: यह जमीन के अंदर गहराई में बने बंकरों को मिट्टी में मिलाने में सक्षम है।
- कीमत: 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है।
ईरान के इन मजबूत मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये बम काफी साबित हुए, हालांकि अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम भी मौजूद हैं।
ट्रंप की नाराजगी: "नाटो साथियों ने छोड़ दिया साथ"
इस भीषण जंग के बीच एक दिलचस्प कूटनीतिक पहलू भी सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस लड़ाई में खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंने नाटो (NATO) समेत अपने पुराने साथी देशों से मदद मांगी थी, लेकिन ज्यादातर देशों ने इस सीधे युद्ध में शामिल होने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ट्रंप इस बात से बेहद नाराज हैं कि अमेरिका ने सालों तक नाटो की मदद की, लेकिन वक्त आने पर उन्होंने साथ नहीं दिया। ट्रंप का मानना है कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए ये कदम उठाना उनकी मजबूरी थी।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और इजरायली कनेक्शन
इस पूरी कहानी के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू महीनों से अमेरिका को ईरान के खिलाफ इस सैन्य रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे।
दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है।
Iran-Israel war: इजराइली हमले मे ईरानी सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी और उनके बेटे के मौत की पुष्टि
नई दिल्ली : ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी जंग के 19वें दिन एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। ईरान के सबसे प्रभावशाली नेता और पूर्व सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की इजराइली एयरस्ट्राइक में मौत हो गई है।
तेहरान ने इस भारी नुकसान को स्वीकार कर लिया है। इस हमले में न केवल लारिजानी, बल्कि उनके बेटे और बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गोलामरेजा सुलेमानी के भी मारे जाने की खबर है।
????????????????BREAKING | Iran's state news agency Fars News has confirmed the death of the informal ruler, Secretary of the Supreme National Security Council, Ali Larijani, who was killed in yesterday's airstrike carried out by the Israeli Air Force.
— Visioner (@visionergeo) March 17, 2026
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तेहरान ने तोड़ी चुप्पी: लारिजानी की मौत पर लगी आधिकारिक मुहर
काफी समय तक सस्पेंस बने रहने के बाद आखिरकार ईरानी मीडिया और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लारिजानी की मौत की पुष्टि कर दी है। इजराइल ने इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य सफलता करार दिया है।
लारिजानी न केवल सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व प्रमुख थे, बल्कि वे सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार भी माने जाते थे। उनकी मौत को ईरान के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
Ali Larijani was one of the most powerful figures in the Islamic Republic, an architect of its security policy, and a close adviser to Ayatollah Ali Khamenei. He was killed at the age of 67, Iranian media said https://t.co/cZKAuKafHS
— Reuters (@Reuters) March 17, 2026
ईरान का खौफनाक पलटवार: तेल अवीव पर 100 से ज्यादा मिसाइलों से हमला
अपने सबसे बड़े कमांडर की मौत का बदला लेने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर भीषण हमला बोल दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने 100 से ज्यादा ठिकानों पर क्लस्टर वारहेड वाली मिसाइलों से हमला किया है।
ईरान का यह भी दावा है कि इजराइल का मजबूत 'आयरन डोम' डिफेंस सिस्टम इन मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। इस हमले के मलबे की चपेट में आने से इजराइल में एक महिला की मौत की खबर भी सामने आई है।
कौन थे अली लारिजानी और क्यों उनका जाना है बड़ा झटका?
अली लारिजानी ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के 'चाणक्य' माने जाते थे। वे संसद के पूर्व स्पीकर और परमाणु वार्ता के मुख्य रणनीतिकार रह चुके थे। इस युद्ध में ईरान के बड़े फैसलों के पीछे लारिजानी का ही दिमाग माना जाता था। उनकी मौत और सैन्य ढांचे को हुए भारी नुकसान ने तेहरान को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।
ट्रंप का बयान और नाटो देशों की बेरुखी
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि नाटो (NATO) के ज्यादातर देश ईरान के खिलाफ इस सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ नहीं देना चाहते।
ट्रंप लगातार ईरान पर कड़े हमले करने की वकालत कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने पुराने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। उधर, अपनी मौत से पहले लारिजानी ने भी मुस्लिम देशों द्वारा अपेक्षित सहयोग न मिलने पर गहरी निराशा व्यक्त की थी।
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