अशोक गहलोत पर CM भजनलाल शर्मा का पलटवार, कहा – ‘दिल्ली जाकर खाली नहीं लौटता’, जानिए पूरा मामला
राजस्थान में एक बार फिर सियासी टकराव खुलकर सामने आया है। दरअसल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अशोक गहलोत के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा है कि उनकी दिल्ली यात्राएं बेकार नहीं होतीं, बल्कि हर बार राज्य के लिए कुछ हासिल करके लौटते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि उनकी सरकार …
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि कब से शुरू है? देवी माता का पालकी पर आना क्यों अशुभ, जानें देवी पुराण की कहानी
Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है. यह पर्व दुर्गा माता की उपासना का सबसे पवित्र समय होता है, जिसमें भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर और पूजा-अर्चना कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो रही है, जबकि इसका समापन 27 मार्च 2026 को शुक्रवार के दिन राम नवमी के साथ हो रहा है. नवरात्र पर देवी मां खास वाहन पर विराजमान होकर आती है. इस साल दुर्गा माता की सवारी डोली है, जिसे धरती के लिए शुभ नहीं माना जाता है. दरअसल, देवी पुराण के अनुसार, माता की सवारी वार यानी दिन के हिसाब से होती है. आइए जानते हैं क्यों माता का पालकी पर बैठकर आना अशुभ माना जाता है.
नवरात्रि का धार्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि को नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी कहा जाता है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों-शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इन दिनों माता की आराधना करता है, उसके सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
ये भी पढ़ें- Chaitra Navratri Ashtami 2026: 25 या 26 मार्च कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है. 19 मार्च को सुबह का समय घटस्थापना के लिए शुभ माना जा रहा है. इस दौरान कलश स्थापित कर देवी मां का आवाहन किया जाता है.
देवी माता का पालकी पर आगमन क्यों अशुभ माना जाता है?
शशिसूर्य गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीत्तिर्ता।।
देवी पुराण के इस श्लोक के अनुसार, हर साल नवरात्रि के दौरान यह माना जाता है कि माता दुर्गा किसी वाहन पर सवार होकर पृथ्वी पर प्रवेश करतीहैं. यह वाहन उनके आगमन के दिन के अनुसार तय होता है. मान्यता है कि जब नवरात्रि की शुरुआत सोमवार या रविवार को होती है, तब माता रानी हाथी पर आती है, वहीं शनिवार और मंगलवार को देवी मां घोड़े पर सवार होकर आती है. गुरुवार-शुक्रवार के दिन माता का आगमन पालकी पर होता है. वहीं, बुधवार को माता नौका पर होती है.
बता दें कि धार्मिक दृष्टि से माता का पालकी पर आना शुभ नहीं माना जाता. इसका अर्थ होता है कि आने वाले समय में देश-दुनिया में कुछ अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाएं या रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है. हालांकि, यह पूरी तरह आस्था और मान्यता पर भी आधारित होता है.
हाथी पर सवार होकर लौटेंगी दुर्गा मां
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ विष्टिकारा
देवी मां के आगमन की तरह उनके प्रस्थान का वाहन भी वार पर सुनिश्चित किया जाता है. इस श्लोक के अनुसार, माता का प्रस्थान इस साल हाथी पर होने वाला है. जब भी मां बुधवार या शुक्रवार के दिन प्रस्थान करती हैं तो उनका वाहन हाथी होता है. देवी पुराण के अनुसार, जब देवी माता हाथी पर विराजमान होकर जाती है तो यह भारी बारीश का संकेत होता है. गजवाहन शक्ति, समृद्धि और कृषकों के लिए शुभ समाचार लेकर आता है.
देवी पुराण की कहानी
देवी पुराण में माता दुर्गा के आगमन और प्रस्थान से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. एक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था, तब देवताओं ने मां दुर्गा से सहायता मांगी. मां दुर्गा ने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर असुरों का संहार किया और धर्म की रक्षा की थी.
इसी दौरान यह माना गया कि माता का वाहन उनके स्वभाव और आने वाले समय का संकेत देता है. जैसे
हाथी पर आगमन- अच्छी वर्षा और समृद्धि का संकेत
घोड़े पर आगमन- युद्ध या तनाव का संकेत
पालकी पर आगमन- दुख, रोग और अशांति का संकेत
यह मान्यता समय के साथ धार्मिक परंपरा का हिस्सा बन गई और आज भी लोग इसे गंभीरता से लेते हैं.
क्या सच में अशुभ होता है पालकी का संकेत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह संकेत केवल संभावनाओं को दर्शाता है, न कि निश्चित घटनाओं को. इसलिए इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है. दुर्गा माता की भक्ति, पूजा और सकारात्मक सोच से हर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है.
नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें?
नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है, जैसे कि-
- घर में साफ-सफाई रखें और सात्विक भोजन का सेवन करें.
- लहसुन-प्याज और मांसाहार से परहेज करें.
- रोजाना माता की पूजा और आरती करें.
- कन्या पूजन जरूर करें.
- वहीं, इस दौरान झूठ बोलने, क्रोध करने और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
ये भी पढ़ें- Cheti Chand 2026: कौन हैं भगवान झूलेलाल? जानें सिंधी समाज में जल देवता की कहानी
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News
News Nation





















