Donald Trump ने US में Birth Tourism रोकने के लिए दो नए आदेशों पर हस्ताक्षर किए
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) के मामलों पर सख्ती करने और जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र लोगों की संख्या सीमित करने के लिए दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ सप्ताह पहले उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में ट्रंप के पहले जारी आदेश को खारिज कर दिया था। बृहस्पतिवार को हस्ताक्षरित आदेशों में से एक उन लोगों को निशाना बनाता है जो व्यावसायिक रूप से ‘बर्थ टूरिज्म’ को चुनते हैं और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं।
इस आदेश का उद्देश्य ऐसे लोगों की अमेरिका में प्रवेश की सुविधा सीमित करना है। दूसरा आदेश उन लोगों की परिका विस्तार करता है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसमें विदेशी सरकारों की ओर से ‘लॉबिंग’ (पैरवी) करने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी शामिल किया गया है।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 30 जून को ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता समाप्त करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के ‘ओवल ऑफिस’ में इन आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उच्चतम न्यायालय के 30 जून के फैसले की आलोचना की और कहा कि नया कदम ‘‘कुछ आवश्यक बदलाव करने’’ के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।’’ इस दौरान ट्रंप के साथ ‘व्हाइट हाउस’ के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अधिकारी स्टीफन मिलर, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ मौजूद थे। नौ जुलाई 1868 को अनुमोदित अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन ने अमेरिका में जन्मे या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान की थी जिनमें पहले दास रह चुके लोग भी शामिल थे। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह प्रावधान गृहयुद्ध के तुरंत बाद बनाया गया था।
इसका उद्देश्य दासों के बच्चों को नागरिकता देना था लेकिन अब क्या हो रहा है? लोग इसके आधार पर पूरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं।’’ ट्रंप की आप्रवासन विरोधी नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले स्टीफन मिलर ने कहा कि लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करना होता है ताकि वह बच्चा स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाए। मिलर ने कहा, ‘‘इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण ऐसे लोगों को सरकारी कल्याण योजनाओं, भविष्य में मतदान के अधिकार और वे सभी अधिकार एवं विशेषाधिकार मिल जाते हैं जो केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए होने चाहिए।’’ इन आदेशों में कई ऐसी श्रेणियां सूचीबद्ध की गई हैं जिनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से संबंधित दस्तावेज जारी नहीं किए जाने चाहिए।
इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता-पिता ने ऐसा व्यावसायिक लेन-देन किया हो, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला को अमेरिका या उसके किसी क्षेत्र में प्रसव कराने के लिए लाना हो। इसके अलावा, आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे, विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चे और अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे जिन्हें संघीय कानून के तहत नागरिकता नहीं मिलती, उन्हें भी इस सूची में शामिल किया गया है। आप्रवासन विशेषज्ञों ने ट्रंप के इन नए कार्यकारी आदेशों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें असंवैधानिक बताया है।
न्यूयॉर्क स्थित आव्रजन मामलों के वकील साइरस मेहता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘ट्रंप का जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित नया कार्यकारी आदेश स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता ने अमेरिका में बच्चे के जन्म को सुनिश्चित करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन किया है, तो उसके आधार पर नागरिकता से इनकार करना 14वें संशोधन का उल्लंघन है।’’ ‘माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, सबसे व्यापक जनगणना आधारित अनुमान के मुताबिक हर वर्ष अमेरिका में 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म ‘बर्थ टूरिज्म’ के कारण होता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से केवल 9,600 बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ।
‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर पहले ही फैसला दे चुका है कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है। ऐसा कोई भी कार्यकारी आदेश, जो इस अधिकार पर हमला करने की कोशिश करेगा, उसका भी वही हश्र होगा जो राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले आदेश का हुआ था।
Boston में 9 अगस्त को होगी International India Day Parade, जुटेंगे हजारों लोग
योषिता सिंह न्यूयॉर्क, सात अगस्त बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस अवसर पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी को भी प्रदर्शित करेंगे। ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकन्स’ (एफआईए)- न्यू इंग्लैंड द्वारा नौ अगस्त को बोस्टन में 5वीं ‘इंटरनेशनल इंडिया डे परेड’ आयोजित की जाएगी।
इसे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भारत के स्वतंत्रता दिवस, उसकी सांस्कृतिक विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी मित्रता के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ष की परेड का विषय ‘स्वतंत्रता का उत्सव एवं अमेरिका-भारत मित्रता’ रखा गया है। परेड में 15 आकर्षक झांकियां शामिल होंगी।
इसके साथ ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों लोगों की भागीदारी होगी। इस समारोह के ग्रैंड मार्शल कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन होंगे। उन्हें देश की सेवा और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोस्टन में भारत के पहले महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री होंगे। उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और न्यू इंग्लैंड में तेजी से बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष की परेड अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रंगारंग आयोजन होगा, जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी के मूल्यों का उत्सव मनाया जाएगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








