असम कांग्रेस में बगावत की चिंगारी! 'मेरे डीएनए में...गद्दारी मंजूर नहीं', टिकट बंटवारे को लेकर सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने छोड़ी पार्टी
असम की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नौगांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. बोरदोलोई का यह कदम कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि वह राज्य में पार्टी का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं. सोमवार को ही उन्होंने पार्टी हाईकमान को अपने कड़े रुख के संकेत दे दिए थे. उनकी मुख्य नाराजगी लहरीघाट विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक आसिफ नजर को दोबारा टिकट देने की संभावनाओं को लेकर थी. प्रद्युत बोरदोलोई ने साफ तौर पर मांग की थी कि पार्टी एक 'अपराधी' को उम्मीदवार न बनाए.
विधायक पर लगाया जानलेवा हमले का आरोप
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रद्युत बोरदोलोई ने अपना दर्द बयां किया. उन्होंने बताया कि पिछले पंचायत चुनाव के दौरान उनके अपने ही संसदीय क्षेत्र में उन पर हमला हुआ था. पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि हमला करने वाला शख्स विधायक आसिफ नजर का बेहद करीबी था. बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि जब वह हमलावर जमानत पर बाहर आया, तो विधायक आसिफ ने उसका स्वागत किया और उसे प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई से मिलवाया. बोरदोलोई ने इसे अपना व्यक्तिगत अपमान बताया और कहा कि वह ऐसी सांठगांठ को बर्दाश्त नहीं कर सकते.
डीएनए में है कांग्रेस
इस्तीफे से पहले प्रद्युत बोरदोलोई ने असम के प्रभारी जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा कि वह 16 साल की उम्र से कांग्रेस के साथ हैं, चार बार विधायक रहे और तरुण गोगोई की सरकार में 15 साल तक मंत्री पद संभाला. उनके मुताबिक कांग्रेस उनके डीएनए में है, लेकिन जब सिद्धांतों और आत्मसम्मान की बात आती है, तो वह समझौता नहीं कर सकते. सूत्रों का यह भी दावा है कि असम के मुख्यमंत्री ने उन्हें बीजेपी में शामिल होने का ऑफर दिया है, जिससे कयासों का बाजार गर्म हो गया है.
गौरव गोगोई ने आरोपों को नकारा
दूसरी तरफ, असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इन खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मीडिया के जरिए प्रद्युत बोरदोलोई की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. गोगोई ने दावा किया कि उन्होंने और प्रभारी जितेंद्र सिंह ने प्रद्युत बोरदोलोई से मुलाकात की है और आगामी चुनावों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है. गौरव गोगोई ने इस्तीफे की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि मीडिया में चल रही बातें महज एक दुष्प्रचार का हिस्सा हैं. फिलहाल, असम कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान साफ नजर आ रही है.
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नाटो सहयोगियों पर भड़के ट्रंप, समर्थन नहीं मिलने को बताया मूर्खतापूर्ण कदम
वॉशिंगटन, 17 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में यूरोपीय सहयोगियों के समर्थन नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने नाटो की आलोचना करते हुए कहा कि सहयोगी देश कार्रवाई का समर्थन तो करते हैं, लेकिन योगदान देने से पीछे हट जाते हैं।
ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया और उसे किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमें ज्यादा मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि किसी मदद की जरूरत ही नहीं है, लेकिन उन्हें हमारे साथ होना चाहिए था।”
ट्रंप ने कहा कि नाटो देशों ने सिद्धांत रूप में इस कार्रवाई का समर्थन किया, लेकिन व्यावहारिक रूप से कोई सहयोग नहीं दिया। उन्होंने इसे “मूर्खतापूर्ण” बताया।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसका रडार सिस्टम भी नष्ट हो गया है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि इस अभियान का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बना सकता था और वह एक बड़ा खतरा था।”
इस बीच, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप यूरोपीय देशों के रवैये से बेहद नाराज़ हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें कभी इतना गुस्से में नहीं देखा।” ग्राहम ने यूरोपीय सहयोगियों पर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में योगदान न देने का आरोप लगाया।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी क्षेत्र में खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर मिलिशिया हमले हो रहे हैं और ऐसे समूहों को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।
वहीं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन ने तनाव कम करने की कोशिश करते हुए अमेरिका और यूरोप के रिश्तों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों पक्षों के बीच संबंध बेहद अहम हैं और हमें फिर से संतुलन बनाना होगा।” मार्टिन ने ईरान को खतरा बताते हुए भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
--आईएएनएस
डीएससी
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