वीकेंड बॉक्स ऑफिस फीका, ‘कैनाता कैनम’ बनी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म
गिरीश वानखेड़े ने बताया कि 13 मार्च के हफ्ते में कुल 11 फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कारोबार काफी कमजोर रहा. हिंदी की दोनों फिल्में “किस्सा कोट कचहरी का” और “राम्या” क्रमश 11 लाख और 21 लाख का कलेक्शन ही कर सकीं. इंग्लिश और गुजराती फिल्मों का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा. हालांकि तीन फिल्मों ने थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया. तीसरे नंबर पर तमिल फिल्म “कलाई सेवल” रही, जिसने 24 लाख कमाए. दूसरे नंबर पर हॉरर इंग्लिश फिल्म “आयरन लंग” रही, जिसका कलेक्शन 26 लाख रहा. वहीं तमिल फिल्म “कैनाता कैनम” 68 लाख के साथ वीकेंड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. आने वाली “धुरंधर 2” की रिलीज के कारण इस हफ्ते फिल्मों को कम समय मिला.
नीतीश के राज्यसभा जाते ही KC Tyagi ने छोड़ी JDU? 22 मार्च को करेंगे नई भूमिका का ऐलान
बिहार की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते ही वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से अपना नाता तोड़ लिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही बदलाव के दौर से गुजर रही है. दरअसल उन्होंने पार्टी के सदस्यता अभियान में हिस्सा नहीं लिया है. इसके साथ ही केसी त्यागी ने भविष्य की राह भी बता दी है.
सदस्यता नवीनीकरण नहीं कराया, खुद किया अलग होने का ऐलान
केसी त्यागी ने साफ तौर पर कहा कि वे अब जदयू के सदस्य नहीं रहे. उन्होंने पार्टी की सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया, जिससे उनका पार्टी से औपचारिक रिश्ता समाप्त हो गया. उन्होंने कहा कि मैंने अभी पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है. लेकिन सदस्यता अभियान में हिस्सा नहीं लिया.
बता दें कि पिछले कुछ महीनों से वे पार्टी की गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे, जिससे उनके अलग होने के संकेत पहले ही मिलने लगे थे। अब उनके इस कदम ने उन अटकलों पर मुहर लगा दी है.
नीतीश कुमार के प्रति सम्मान बरकरार
हालांकि पार्टी से अलग होने के बावजूद केसी त्यागी ने नीतीश कुमार के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही है. उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार के साथ उनका संबंध 50 वर्षों से अधिक पुराना है. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में कोई कड़वाहट नहीं आई है. यह बयान दर्शाता है कि त्यागी अपने पुराने संबंधों को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहते.
जदयू में लंबे समय तक निभाई अहम भूमिका
केसी त्यागी जदयू के गठन के समय से ही पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं. समता पार्टी के विलय के बाद बनी जदयू में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वे महासचिव, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव, राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार जैसे पदों पर रह चुके हैं। उनकी गिनती पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में होती रही है.
नई राजनीतिक रणनीति की तैयारी
त्यागी ने बताया कि 22 मार्च को नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में समान विचारधारा वाले लोगों की एक बैठक बुलाई गई है. इसी बैठक में आगे की राजनीतिक रणनीति तय की जाएगी. यहीं पर वह अपनी नई भूमिका के बारे में भी जानकारी देंगे.
उन्होंने संकेत दिया कि वे चौधरी चरण सिंह, डॉ. राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के विचारों पर आगे बढ़ते रहेंगे. साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि वे उत्तर प्रदेश के किसी क्षेत्रीय दल के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं.
जदयू में बढ़ती असहजता बनी वजह
पिछले कुछ समय से केसी त्यागी पार्टी में खुद को असहज महसूस कर रहे थे. जदयू और भाजपा के बीच बढ़ती नजदीकी उन्हें पसंद नहीं आ रही थी.
इसके अलावा, उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश और घरेलू नीतियों की खुलकर आलोचना की थी, जिस पर पार्टी नेतृत्व ने आपत्ति जताई थी. सितंबर 2024 में उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से भी इस्तीफा दे दिया था. केसी त्यागी का जदयू से अलग होना केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि यह बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत का संकेत भी हो सकता है.
अब नजर इस बात पर होगी कि उनकी नई राजनीतिक रणनीति क्या रूप लेती है और इसका असर आने वाले चुनावों पर कितना पड़ता है.
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