एनपीसीआई ने श्रीलंका में यूपीआई की स्वीकार्यता का विस्तार किया, अर्थव्यवस्था के साथ पर्यटकों को होगा फायदा
नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट लिमिटेड (एनआईपीएल) ने मंगलवार को कहा कि वह श्रीलंका में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की स्वीकार्यता में विस्तार कर रहा है।
एनपीसीआई ने आगे कहा कि इससे भारतीय यात्रियों के लिए श्रीलंका में भुगतान का अनुभव अच्छा होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
भारत में 700 मिलियन से अधिक क्यूआर टचपॉइंट्स के साथ, प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर वैश्विक प्रणालियों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाती है, जिसमें श्रीलंका का लंकापे-संचालित लंकाक्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है।
पर्यटन क्षेत्र के लिए भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा स्रोत बाजार बना हुआ है। 2024 में 4.16 लाख से अधिक भारतीय पर्यटकों श्रीलंका गए थे, यह आंकड़ा 2025 में बढ़कर 5.31 लाख हो गया। इस स्थिर वृद्धि ने घूमने, खरीदारी, शादियों और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए द्वीप पर आने वाले भारतीय यात्रियों के लिए सुविधाजनक और विश्वसनीय भुगतान समाधानों की मांग को बढ़ा दिया है।
एनपीसीआई ने कहा, एनआईपीएल और लंकापे के बीच सहयोग के माध्यम से, भारतीय पर्यटक अब यूपीआई-सक्षम ऐप का उपयोग करके लंकाक्यूआर कोड को स्कैन करके पूरे श्रीलंका में डिजिटल भुगतान कर सकते हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो जाएगी।
यह सेवा प्रमुख प्रतिष्ठानों, जिनमें होटल चेन, खुदरा दुकानें और सुपरमार्केट शामिल हैं, में उपलब्ध है।
इस सेवा की व्यापक स्वीकृति के लिए, एनआईपीएल श्रीलंका के घरेलू भुगतान ढांचे के अनुरूप, श्रीलंका के केंद्रीय बैंक, अधिग्रहण करने वाले बैंकों और व्यापारियों जैसे प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
एनपीसीआई के अनुसार, इस पहल से यात्रियों और व्यापारियों दोनों को लाभ होने की उम्मीद है। पर्यटकों को वास्तविक समय में भुगतान, पारदर्शी विनिमय दरें और एक परिचित भुगतान इंटरफेस की सुविधा मिलेगी, वहीं श्रीलंकाई व्यवसाय एक बड़े डिजिटल ग्राहक आधार का लाभ उठा सकेंगे, नकदी प्रबंधन में सुधार कर सकेंगे और भौतिक मुद्रा पर निर्भरता कम कर सकेंगे।
एनपीसीआई इंटरनेशनल के एमडी और सीईओ रितेश शुक्ला ने कहा कि कंपनी सीमा पार लेनदेन को सरल बनाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अंतर-संचालनीय भुगतान गलियारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उन्होंने कहा, “यूपीआई के बढ़ते उपयोग के साथ, हमारा लक्ष्य आतिथ्य, खुदरा और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भुगतान स्वीकृति को बढ़ाना है, जिससे व्यवसायों के लिए मूल्य सृजित हो और समग्र यात्रा अनुभव बेहतर हो।”
--आईएएनएस
एबीएस/
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Chaitra Navratri Ashtami 2026: 25 या 26 मार्च कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी? नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व
Chaitra Navratri Ashtami 2026: सनातन धर्म में मां दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. खासतौर से चैत्र नवरात्रि को बहुत अहम माना जाता है. नवरात्र में पूरे 9 दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी. इन 9 दिनों में देवी के 9 रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि बेहद खास होती है. चलिए जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि में महाअष्टमी की तारीख और इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त क्या रहेंगे.
चैत्र नवरात्रि 2026 अष्टमी तिथि (Chaitra Navratri Ashtami 2026 Date)
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि 25 मार्च 2026 दोपहर 01 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 26 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है.
चैत्र नवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त
सुबह मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शाम 07 बजकर 52 मिनट पर होगा
दूसरा मुहूर्त: सुबह 10 बजकर 56 मिनट से शाम दोपहर 02 बजकर 01 मिनट पर होगा.
शाम का मुहूर्त: शाम 05 बजकर 06 मिनट से शाम 09 बजकर 33 मिनट तक होगा.
चैत्र नवरात्रि का महत्व (Chaitra Navratri Ashtami 2026 Significance)
चैत्र नवरात्रि का मुख्य महत्व माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना, आत्म-शुद्धि, और नई ऊर्जा के संचार से जुड़ा है. यह हिंदू नववर्ष की शुरुआत, ऋतु परिवर्तन, और नकारात्मकता को दूर कर राम नवमी तक चलने वाला नौ दिवसीय उपवास व साधना का समय है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और अध्यात्म लाता है.
चैत्र नवरात्रि में माता की सवारी
इस बार चैत्र नवरात्रि में माता का आगमन पालकी पर हो रहा है और विदाई हाथी से होगी. शास्त्रों और देवी पुराण के अनुसार, मां का पालकी पर आना ज्यादा शुभ माना जाता है. इसे एक संकेत के रूप में देखा जाता है जो आने वाले समय में स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों की ओर इशारा कर सकता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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