सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल के पदों पर निकली बंपर भर्ती, 10वीं पास कर सकते हैं आवेदन
SSB Recruitment 2026: दसवीं पास के लिए सरकारी नौकरी करने का शानदार मौका है. क्योंकि सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने कांस्टेबल ट्रेड्समैन ( Constable Tradesman) पर पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है. अगर आपने भी हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली है तो जल्द से जल्द अपने डॉक्यूमेंट तैयार कर लें और जैसे ही आवेदन शुरू हों, पहले ही दिन अपना फॉर्म भर दें. जिससे बाद में आपको एसएसबी की वेबसाइट पर ट्रैफिक की समस्या का सामना ना करना पड़े.
SSB कांस्टेबल ट्रेड्समैन के कितने पदों पर होगी भर्ती?
सशस्त्र सीमा बल (SSB) इस भर्ती के माध्यम से कुल 827 पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन करेगा. इनमें कांस्टेबल (पशु चिकित्सा) के 34 पद, पुरुष कांस्टेबल (चालक) के 553 पद, कांस्टेबल (माली) के 41 पद, कांस्टेबल (वाटर कैरियर) के पांच पद, कांस्टेबल (मोची) के 25 पद, कांस्टेबल (दर्जी) के 41 पद, कांस्टेबल (धोबी) के 74 पद, कांस्टेबल (नाई) के 43 पद, कांस्टेबल (वेटर) के 03 पद, कांस्टेबल (बढ़ई) के 07 पद और कांस्टेबल (नर्सिंग ऑर्डरली) का 01 पद शामिल है.
कौन कर सकता है एसएसबी कांस्टेबल ट्रेड्समैन के पदों पर आवेदन?
सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल ट्रेड्समैन के पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड, संस्थान या विश्वविद्यालय से 10वीं यानी हाईस्कूल की परीक्षा पास की हो. साथ ही कम से कम 1 वर्ष का अनुभव, या वैध HMV ड्राइविंग लाइसेंस, या प्राथमिक चिकित्सा प्रमाणपत्र के साथ 1 वर्ष का अनुभव, या 2 वर्ष का अनुभव, या संबंधित ट्रेड में 1 वर्ष का आईटीआई डिप्लोमा के साथ 1 वर्ष का अनुभव, या संबंधित ट्रेड में 2 वर्ष का आईटीआई डिप्लोमा किया हो.
क्या है आयु सीमा और शारीरिक योग्यता
इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु (कुछ पदों के लिए) 18 वर्ष और कुछ पदों के लिए 21 वर्ष होनी चाहिए. वहीं अधिकतम आयु सीमा 23 वर्ष और 27 वर्ष रखी गई थी. जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट भी दी जाएगी. इन पदों के लिए आवेदन करने वाले सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों की लंबाई कम से कम 170 सेंटीमीटर और महिलाओं की लंबाई कम से कम 157 सेमी होनी चाहिए. जबकि एसटी वर्ग के पुरुष उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 162.5 सेमी और महिलाओं की न्यूनतम लंबाई 150 सेमी होनी चाहिए.
कितनी मिलेगी सैलरी?
एसएसबी कांस्टेबल के पदों के लिए चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग और पे लेबल 3 के हिसाब से 21,700 से 69,100 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा.
कब शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया?
सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल ट्रेड्समैन के पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 मार्च 2026 से शुरू होगी. जबकि आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल 2026 है.
कितना देना होगा आवेदन शुल्क?
सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल ट्रेड्समैन के पदों के लिए सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 100 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. जबकि एससी, एसटी और सभी वर्ग की महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन निःशुल्क है.
ये भी पढ़ें: यूपी में स्पेशल टीचर बनने का शानदार मौका, जल्द करें आवेदन; जानें कितने पदों पर होगी भर्ती
कैसे करें आवेदन?
सशस्त्र सीमा बल में कांस्टेबल ट्रेड्समैन के पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है. 21 मार्च को आवेदन शुरू होने के बाद उम्मीदवार को सबसे पहले सशस्त्र सीमा बल (SSB) की आधिकारिक वेबसाइट https://ssb.gov.in/ पर जाना होगा. यहां भर्ती वाले लिंक पर क्लिक करें. मांगी गई सभी जानकारियां दर्ज कर रजिस्ट्रेशन कर लें. उसके फॉर्म को पूरी तरह से भरकर फीस जमा करें और सबमिट कर दें.
ये भी पढ़ें: यूपी रोडवेज में नौकरी करने का शानदार मौका, कंडक्टर के 1000 पदों पर निकली भर्ती
बाजार की पाठशाला: शेयर बाजार से कमाई पर भी देना पड़ता है टैक्स; जानिए क्या कहते हैं डिविडेंड, कैपिटल गेन और एफआईएफओ के नियम
मुंबई, 17 मार्च (आईएएनएस)। शेयर बाजार में निवेश से होने वाली कमाई पर भी इनकम टैक्स के नियम लागू होते हैं। आमतौर पर निवेशकों को शेयर बाजार से दो तरीकों से आय होती है। पहला कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड और दूसरा शेयर बेचकर होने वाला कैपिटल गेन। इन दोनों तरह की आय पर टैक्स के नियम अलग-अलग होते हैं। इसलिए निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इनकम टैक्स की गणना कैसे होती है और एफआईएफओ जैसे नियम इसमें क्या भूमिका निभाते हैं।
अगर किसी निवेशक को कंपनी से डिविडेंड मिलता है तो उसे उसकी कुल आय में जोड़ा जाता है। आयकर कानून के अनुसार, यह आय अन्य स्रोतों से आय के अंतर्गत आती है और इस पर व्यक्ति के लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है। इसका मतलब यह है कि कम आय वाले निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम होगा, जबकि ज्यादा आय वालों को अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।
जानकारों के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने शेयर खरीदने के लिए लोन लिया है, तो उस लोन पर दिए गए ब्याज पर टैक्स में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि यह कटौती कुल डिविडेंड इनकम के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही सीमित रहती है। ब्रोकरेज, कमीशन या सर्विस चार्ज जैसे अन्य खर्चों पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक को 1 लाख रुपए का डिविडेंड मिला है और उसने शेयर खरीदने के लिए लिए गए लोन पर 35,000 रुपए का ब्याज दिया है, तो वह अधिकतम 20,000 रुपए तक की ही कटौती का दावा कर सकता है। ऐसे में उसकी टैक्सेबल डिविडेंड इनकम 80,000 रुपए मानी जाएगी।
वहीं, शेयर बेचने से होने वाले मुनाफे को पूंजीगत लाभ यानी कैपिटल गेन कहा जाता है। होल्डिंग अवधि के आधार पर इसे दो भागों में बांटा जाता है। पहला, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) और दूसरा, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी)।
अगर किसी निवेशक ने लिस्टेड शेयरों को 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा है, तो उन्हें बेचने से होने वाला मुनाफा दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ यानी एलटीसीजी माना जाता है। ऐसे मामलों में 1.25 लाख रुपए तक के लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि इससे अधिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है। यह नियम तभी लागू होता है जब शेयर खरीदते और बेचते समय सिक्योर्टीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का भुगतान किया गया हो।
वहीं अगर शेयरों को 12 महीने से कम समय तक रखने के बाद बेचा जाता है, तो उससे होने वाला लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ यानी एसटीसीजी माना जाता है, जिस पर 20 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है, बशर्ते कि उस लेनदेन पर एसटीटी का भुगतान किया गया हो।
इसके अतिरिक्त, शेयर बाजार में अक्सर निवेशक एक ही कंपनी के शेयर अलग-अलग समय पर खरीदते हैं। ऐसे में जब वे शेयर बेचते हैं तो यह तय करना जरूरी होता है कि कौन से शेयर पहले बेचे गए। इसके लिए एफआईएफओ यानी फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट नियम लागू होता है। इस नियम के अनुसार, डीमैट खाते में सबसे पहले खरीदे गए शेयरों को ही सबसे पहले बेचा हुआ माना जाता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय टैक्स नियमों के तहत डीमैट खाते में रखे गए शेयरों और म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए लागत और होल्डिंग अवधि की गणना इसी एफआईएफओ पद्धति से की जाती है। इससे टैक्स गणना में पारदर्शिता और एकरूपता बनी रहती है और निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग लॉट चुनकर टैक्स बचाने की कोशिश नहीं कर पाते।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के लिए दो अलग-अलग डीमैट अकाउंट रखना फायदेमंद हो सकता है। एक खाता लंबी अवधि के निवेश के लिए और दूसरा ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे टैक्स प्रबंधन ज्यादा आसान हो जाता है।
अगर सभी लेनदेन एक ही डीमैट खाते से किए जाते हैं, तो एफआईएफओ नियम के कारण कई बार ऐसा हो सकता है कि आपकी कम लागत वाली और लंबे समय से रखी गई होल्डिंग्स पहले बिकी हुई मानी जाएं, जिससे अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर ज्यादा टैक्स लग सकता है। अलग-अलग खातों के इस्तेमाल से दीर्घकालिक निवेश और अल्पकालिक ट्रेडिंग के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आसान हो जाता है।
हालांकि, कई डीमैट खाते रखना पूरी तरह वैध है और नियामक संस्थाएं इसकी अनुमति देती हैं। लेकिन निवेशकों को अपने सभी खातों में किए गए लेनदेन को अपने पैन के आधार पर आयकर रिटर्न में घोषित करना जरूरी होता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






















