बाजार की पाठशाला: शेयर बाजार से कमाई पर भी देना पड़ता है टैक्स; जानिए क्या कहते हैं डिविडेंड, कैपिटल गेन और एफआईएफओ के नियम
मुंबई, 17 मार्च (आईएएनएस)। शेयर बाजार में निवेश से होने वाली कमाई पर भी इनकम टैक्स के नियम लागू होते हैं। आमतौर पर निवेशकों को शेयर बाजार से दो तरीकों से आय होती है। पहला कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला डिविडेंड और दूसरा शेयर बेचकर होने वाला कैपिटल गेन। इन दोनों तरह की आय पर टैक्स के नियम अलग-अलग होते हैं। इसलिए निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इनकम टैक्स की गणना कैसे होती है और एफआईएफओ जैसे नियम इसमें क्या भूमिका निभाते हैं।
अगर किसी निवेशक को कंपनी से डिविडेंड मिलता है तो उसे उसकी कुल आय में जोड़ा जाता है। आयकर कानून के अनुसार, यह आय अन्य स्रोतों से आय के अंतर्गत आती है और इस पर व्यक्ति के लागू इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होता है। इसका मतलब यह है कि कम आय वाले निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम होगा, जबकि ज्यादा आय वालों को अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।
जानकारों के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने शेयर खरीदने के लिए लोन लिया है, तो उस लोन पर दिए गए ब्याज पर टैक्स में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि यह कटौती कुल डिविडेंड इनकम के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही सीमित रहती है। ब्रोकरेज, कमीशन या सर्विस चार्ज जैसे अन्य खर्चों पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक को 1 लाख रुपए का डिविडेंड मिला है और उसने शेयर खरीदने के लिए लिए गए लोन पर 35,000 रुपए का ब्याज दिया है, तो वह अधिकतम 20,000 रुपए तक की ही कटौती का दावा कर सकता है। ऐसे में उसकी टैक्सेबल डिविडेंड इनकम 80,000 रुपए मानी जाएगी।
वहीं, शेयर बेचने से होने वाले मुनाफे को पूंजीगत लाभ यानी कैपिटल गेन कहा जाता है। होल्डिंग अवधि के आधार पर इसे दो भागों में बांटा जाता है। पहला, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) और दूसरा, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी)।
अगर किसी निवेशक ने लिस्टेड शेयरों को 12 महीने से ज्यादा समय तक अपने पास रखा है, तो उन्हें बेचने से होने वाला मुनाफा दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ यानी एलटीसीजी माना जाता है। ऐसे मामलों में 1.25 लाख रुपए तक के लाभ पर कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि इससे अधिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है। यह नियम तभी लागू होता है जब शेयर खरीदते और बेचते समय सिक्योर्टीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का भुगतान किया गया हो।
वहीं अगर शेयरों को 12 महीने से कम समय तक रखने के बाद बेचा जाता है, तो उससे होने वाला लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ यानी एसटीसीजी माना जाता है, जिस पर 20 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है, बशर्ते कि उस लेनदेन पर एसटीटी का भुगतान किया गया हो।
इसके अतिरिक्त, शेयर बाजार में अक्सर निवेशक एक ही कंपनी के शेयर अलग-अलग समय पर खरीदते हैं। ऐसे में जब वे शेयर बेचते हैं तो यह तय करना जरूरी होता है कि कौन से शेयर पहले बेचे गए। इसके लिए एफआईएफओ यानी फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट नियम लागू होता है। इस नियम के अनुसार, डीमैट खाते में सबसे पहले खरीदे गए शेयरों को ही सबसे पहले बेचा हुआ माना जाता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय टैक्स नियमों के तहत डीमैट खाते में रखे गए शेयरों और म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए लागत और होल्डिंग अवधि की गणना इसी एफआईएफओ पद्धति से की जाती है। इससे टैक्स गणना में पारदर्शिता और एकरूपता बनी रहती है और निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग लॉट चुनकर टैक्स बचाने की कोशिश नहीं कर पाते।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के लिए दो अलग-अलग डीमैट अकाउंट रखना फायदेमंद हो सकता है। एक खाता लंबी अवधि के निवेश के लिए और दूसरा ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे टैक्स प्रबंधन ज्यादा आसान हो जाता है।
अगर सभी लेनदेन एक ही डीमैट खाते से किए जाते हैं, तो एफआईएफओ नियम के कारण कई बार ऐसा हो सकता है कि आपकी कम लागत वाली और लंबे समय से रखी गई होल्डिंग्स पहले बिकी हुई मानी जाएं, जिससे अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर ज्यादा टैक्स लग सकता है। अलग-अलग खातों के इस्तेमाल से दीर्घकालिक निवेश और अल्पकालिक ट्रेडिंग के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आसान हो जाता है।
हालांकि, कई डीमैट खाते रखना पूरी तरह वैध है और नियामक संस्थाएं इसकी अनुमति देती हैं। लेकिन निवेशकों को अपने सभी खातों में किए गए लेनदेन को अपने पैन के आधार पर आयकर रिटर्न में घोषित करना जरूरी होता है।
--आईएएनएस
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एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर, जहां बंद कपाटों के बाद भी गूंजती है घंटियों की आवाज, जानें क्या है इसके पीछे का राज
Maihar Temple Mystery: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी दिव्यता और रहस्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर जिसे देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. इसे मां शारदा धाम के नाम से भी जाना जाता है. यह मंदिर विंध्य पर्वतमाला की त्रिकूट पहाड़ी पर बना हुआ है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं. लेकिन यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है. यह अपने रहस्यमयी घटनाओं के कारण भी काफी चर्चा में रहता है.
रात में अपने आप बजती हैं घंटियां
मैहर माता मंदिर से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य है रात में अपने आप घंटियों का बजना. स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी अंदर से घंटियों की आवाज सुनाई देती है. सबसे हैरानी की बात यह है कि उस समय मंदिर के अंदर कोई भी मौजूद नहीं होता. फिर भी घंटियां लगातार बजती रहती हैं. भक्त इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मानते. उनका भरोसा है कि रात के समय मां शारदा स्वयं मंदिर में विराजमान रहती हैं. उसी दौरान पूजा होती है और घंटियां बजती हैं. यह घटना आज भी एक रहस्य बनी हुई है. इसका कोई वैज्ञानिक कारण सामने नहीं आया है.
क्या है इसके पीछे जुड़ी कथा?
इस मंदिर का संबंध प्राचीन वीर योद्धाओं आल्हा-ऊदल से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं में कहा जाता है कि आल्हा आज भी जीवित हैं. मान्यता है कि वे हर दिन ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले मंदिर पहुंचते हैं और मां शारदा की पूजा करते हैं. कई लोग दावा करते हैं कि जब सुबह मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तो वहां ताजे फूल और पूजा के निशान मिलते हैं. इससे इस कहानी पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो जाता है. हालांकि, इन बातों का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह गहरी आस्था का विषय है.
कहां स्थित है यह दिव्य धाम?
यह मंदिर त्रिकूट पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित है. यहां से पूरे मैहर शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है. भक्त यहां दो तरीकों से पहुंच सकते हैं. एक तो सीढ़ियों के जरिए और दूसरा रोपवे के माध्यम से. मंदिर में विराजमान मां शारदा को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का रूप माना जाता है. यही कारण है कि छात्र-छात्राएं यहां बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं. परीक्षाओं से पहले यहां आकर पूजा करना शुभ माना जाता है.
नवरात्रि में उमड़ती है भीड़
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान इस मंदिर का माहौल बिल्कुल अलग होता है. देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. भक्त मां शारदा से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां को पुकारने पर हर इच्छा पूरी होती है. इसी वजह से यहां हर साल आस्था का सैलाब देखने को मिलता है.
आस्था और रहस्य का संगम
मैहर माता मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं है. यह आस्था, विश्वास और रहस्य का अनोखा संगम है. रात में बजती घंटियां, आल्हा-ऊदल की कथा और दैवीय उपस्थिति की मान्यताएं इस मंदिर को और भी खास बनाती हैं. भले ही इन घटनाओं का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट न हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह सब मां शारदा की कृपा का प्रतीक है. यही वजह है कि यह मंदिर आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और हर दिन यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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