तेहरान पर परमाणु हमला करेगा इजरायल? जानें ईरान से जंग के बीच क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
US Iran War: अमेरिका और इजरायल के ईरान में हमले जारी है. जिससे ईरान लगातार कमजोर होता जा रहा है. बावजूद इसके ईरान हार मानने को तैयार नहीं है. ईरान भी लगातार इजरायल और मध्य पूर्व के देशों पर हमले कर रहा है. इस युद्ध का आज 18वां दिन है. इस बीच ईरान में परमाणु हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है. अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उन्हें इस बात का विश्वास नहीं है कि इजरायल ईरान के खिलाफ युद्ध में परमाणउ हथियारों का इस्तेमाल करेगा.
इजरायल कभी नहीं करेगा परमाणु हथियार का इस्तेमाल- ट्रंप
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर कहा कि, "इजरायल ऐसा नहीं करेगा. इजरायल ऐसा कभी नहीं करेगा." राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणी व्हाइट हाउस के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्रिप्टो प्रमुख डेविड सैक्स द्वारा हाल ही में एक इंटरव्यूह में संभावित युद्ध वृद्धि की आशंका जताने के बाद आई है. बता दें कि डेविड सैक्स ने कहा था कि , "आपको इस बात की चिंता करनी होगी कि इजरायल परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर विचार करके युद्ध को और बढ़ा सकता है."
ट्रंप का ये बयान उनके द्वारा एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल के सैन्य उद्देश्यों के बीच तालमेल के बारे में दिए गए बयान के बाद आया है. रविवार को ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि, "संबंध बहुत अच्छे रहे हैं. दोनों सेनाओं का समन्वय बहुत अच्छा है." उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष में दोनों देशों के लक्ष्य शायद पूरी तरह एक जैसे न हों.
ईरान पर कार्रवाई न करने का पूर्व राष्ट्रपति को पछतावा- ट्रंप
इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि, एक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में उनसे कहा था कि काश उन्होंने अपने कार्यकाल में ईरान के खिलाफ कार्रवाई की होती. हालांकि, ट्रंप ने उस नेता की पहचान बताने से इनकार कर दिया. ट्रंप ने कहा कि, "मैंने एक पूर्व राष्ट्रपति से बात की है, जिन्हें मैं पसंद करता हूं. उन्होंने कहा, 'काश मैंने ऐसा किया होता. काश मैंने किया होता.' लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. मैं ऐसा कर रहा हूं." बता दें कि अमेरिका के चार पूर्व राष्ट्रपति अभी जीवित हैं. जिनमें बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और जो बाइडेन का नाम शमिल है. ट्रंप ने उनका नाम नहीं बताया और कहा कि वह उन्हें शर्मिंदा नहीं करना चाहते.
अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों का चीनी पायलटों को ट्रेनिंग देना चिंताजनक: सीनेटर बैंक्स
वॉशिंगटन, 17 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका में एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों में चीनी नागरिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जो अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को मदद पहुंचा सकती है।
सीनेटर जिम बैंक्स ने ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (टीएसए) को लिखे एक पत्र में कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से चिंता पैदा करता है। उन्होंने चीन की “मिलिटरी–सिविल फ्यूजन (एमसीएफ)” रणनीति का जिक्र किया, जिसके तहत सेना और व्यापारिक क्षेत्रों के बीच की सीमाएं जानबूझकर धुंधली कर दी जाती हैं।
उन्होंने कहा कि इस नीति की वजह से चीन की कई कंपनियां, चाहे वे सरकारी हों या निजी उन्नत उद्योगों में वैश्विक बाजार का बड़ा हिस्सा हासिल करने में सफल रही हैं। साथ ही इससे चीन की सरकार को आपात स्थिति या युद्ध के समय राष्ट्रीय संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता भी मिलती है।
बैंक्स ने कहा कि प्रशिक्षित पायलटों की बढ़ती मांग भी इस रुझान की बड़ी वजह है। सीनेटर ने खत में कहा कि चीन को 2043 तक 130,000 कमर्शियल और जनरल एविएशन पायलटों की ज़रूरत होगी। पायलटों की यह कमी उसकी फ़ौज में भी है, जहां ट्रेनिंग की समय-सीमा कम कर दी गई है और मांग को पूरा करने के लिए भर्ती का दायरा बढ़ा दिया गया है।
खत में बताई गई रिसर्च रिपोर्टिंग के मुताबिक, चीन को हर साल लगभग 5,000 पायलट कैडेटों की ज़रूरत होती है, जबकि उसके अपने संस्थान सिर्फ़ 1,200 के आस-पास ही तैयार कर पाते हैं। नतीजतन, कई ट्रेनी ट्रेनिंग के लिए अमेरिका के फ़्लाइट स्कूलों का रुख कर रहे हैं।
सीनेटर ने कुछ खास संस्थानों का भी जिक्र किया। इनमें एरिजोना स्थित एरोगार्ड फ्लाइट ट्रेनिंग सेंटर शामिल है, जिसके चीन से जुड़े विमानन संगठनों के साथ साझेदारी होने की बात कही गई है। चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस संस्थान के करीब दो-तिहाई छात्र चीनी नागरिक हैं। इसके अलावा कैलिफोर्निया की सिएरा एकेडमी ऑफ एरोनॉटिक्स में भी हर साल सैकड़ों चीनी पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
सिएरा एकेडमी के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि चूंकि यह संस्थान लंबे समय से चीनी सरकार, संस्थानों और एयरलाइनों के साथ काम कर रहा है, इसलिए उसके पास इस तरह के कार्यक्रम चलाने के लिए जरूरी संपर्क मौजूद हैं।
बैंक्स का कहना है कि भले ही इन प्रशिक्षुओं में से कई लोग नागरिक विमानन में ही करियर बनाएं, लेकिन चीन की सरकारी व्यवस्था में नागरिक और सैन्य उपयोग के बीच साफ सीमा तय करना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि जितने अधिक चीनी नागरिक विमानन प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे, उतने ही अधिक विकल्प चीनी सेना के पास पायलट और प्रशिक्षक भर्ती करने के लिए होंगे।
उन्होंने टीएसए से अपील की कि फ्लाइट ट्रेनिंग सिक्योरिटी प्रोग्राम के तहत विदेशी आवेदकों की जांच प्रक्रिया को और सख्त किया जाए। फिलहाल इस कार्यक्रम के तहत आवेदकों की जांच आव्रजन रिकॉर्ड, निगरानी सूचियों और आपराधिक इतिहास के आधार पर की जाती है।
बैंक्स ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य विदेशी प्रतिद्वंद्वी देशों से पैदा होने वाले खतरे को देखते हुए जांच प्रक्रिया में इसे भी एक अतिरिक्त कारक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने एजेंसी से इस प्रोग्राम को अपडेट करने की अपील की, ताकि चीन जैसे दुश्मन देशों के लोगों को अमेरिका में फ्लाइट ट्रेनिंग लेने से रोका जा सके। उन्होंने कहा, हमें यह पक्का करना होगा कि अमेरिकी फ़्लाइट ट्रेनिंग प्रोग्राम अमेरिकी हितों की सेवा करें न कि शी जिनपिंग के सपनों की।
--आईएएनएस
एएस/
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