हॉर्मुज संकट: ग्रीस और जर्मनी ने सैन्य भागीदारी से किया किनारा
एथेंस, 16 मार्च (आईएएनएस)। ग्रीस किसी भी सैन्य अभियान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भाग लेने की योजना नहीं बना रहा है। सरकार के प्रवक्ता पावलोस मारिनाकिस ने सोमवार को कहा कि देश का युद्ध में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है।
मारिनाकिस ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यूरोपीय संघ के ऑपरेशन शील्ड में ग्रीस की मौजूदा भागीदारी केवल रेड सी (लाल सागर) क्षेत्र तक सीमित है और इसका हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस मिशन में अभी केवल ग्रीस और इटली के जहाज शामिल हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करना है।
मारिनाकिस ने कहा कि ग्रीस हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक पालन की वकालत करता है। उन्होंने साफ कहा, “किसी भी हालत में हम युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते।”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा था कि उन्होंने मध्य-पूर्व के तेल पर निर्भर कुछ देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए गठबंधन में शामिल होने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने उन देशों के नाम नहीं बताए जिनसे बातचीत चल रही है।
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने सोमवार को भी अमेरिका की इस मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस क्षेत्र में किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा।
पिस्टोरियस ने बर्लिन में अपने लातवियाई समकक्ष एंड्रिस स्प्रुड्स के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की बात कही, लेकिन यूरोप के सैन्य हस्तक्षेप की जरूरत पर संदेह जताया।
उन्होंने कहा, “यह हमारी लड़ाई नहीं है। हमने इसे शुरू नहीं किया।”
ट्रंप ने रविवार को चेतावनी दी थी कि अगर नाटो सहयोगी अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आए तो नाटो का भविष्य बहुत खराब हो सकता है।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया ने भी कहा कि वह मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष से पैदा हुए आर्थिक संकट से निपटने के लिए तैयार है और वह इस क्षेत्र में युद्धपोत नहीं भेजेगा।
ऑस्ट्रेलिया की मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि देश के पास सोमवार तक लगभग 37 दिन का पेट्रोल, 30 दिन का डीजल और 29 दिन का जेट ईंधन का भंडार है। सरकार ने ईंधन भंडारण से जुड़े कुछ नियमों में अस्थायी ढील भी दी है।
उन्होंने कहा, “हमारा देश मध्य-पूर्व की स्थिति से पैदा हुए आर्थिक संकट का सामना करने के लिए तैयार है।”
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने शनिवार को अपने नागरिकों को चेतावनी दी कि वे बहरीन, ईरान, इराक, इजरायल, कुवैत, लेबनान, फिलिस्तीन, कतर, सीरिया, यमन और संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते यात्रा न करें।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन देशों से होकर ट्रांजिट भी न करें, भले ही यात्री एयरपोर्ट से बाहर न निकलें, क्योंकि संघर्ष और बढ़ सकता है और उड़ानें अचानक बदल या रद्द हो सकती हैं।
--आईएएनएस
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अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर युद्ध जैसे हालात, बमबारी में दो बच्चों समेत कई नागरिकों की मौत, 20 हजार परिवार बेघर
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चल रहा तनाव अब खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया है. गवर्नर ऑफिस से जारी एक बयान के मुताबिक, खोस्त के अफगान दुबई इलाके में हुई मोर्टार शेलिंग में दो मासूम बच्चों की मौत हो गई है. इसके अलावा, सरकारी प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बताया कि रविवार को पूर्वी प्रांत नूरिस्तान में एक नागरिक के घर पर गोला गिरने से एक व्यक्ति की जान चली गई. अफगान अधिकारियों के अनुसार, पिछले महज एक हफ्ते के भीतर सीमा पार से हो रही इस लड़ाई में कम से कम 18 आम नागरिक मारे जा चुके हैं.
विस्थापन और भुखमरी का संकट
इस भीषण युद्ध ने हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने जानकारी दी है कि उसने इस संघर्ष की वजह से विस्थापित हुए 20,000 से अधिक परिवारों को 'जीवन रक्षक भोजन' उपलब्ध कराने के लिए काम शुरू कर दिया है. अफगानिस्तान में डब्ल्यूएफपी के कंट्री डायरेक्टर जॉन आयलीफ ने एक प्रेस रिलीज में गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान दो संघर्षों के बीच फंस गया है. किसी भी तरह की और अस्थिरता लाखों लोगों को भुखमरी की गहरी खाई में धकेल देगी और पहले से ही बदहाल इस क्षेत्र पर दबाव और बढ़ जाएगा.
पाकिस्तान की 'खुली जंग' का ऐलान
दोनों देशों के बीच यह तनाव फरवरी के अंत में तब और बढ़ गया जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में सीमा पार हमले किए. अफगानिस्तान का आरोप था कि पाकिस्तान के हमलों में उसके नागरिक मारे गए हैं. इसके जवाब में पाकिस्तान ने अफगान अधिकारियों के खिलाफ 'खुली जंग' का ऐलान कर दिया और राजधानी को निशाना बनाना शुरू कर दिया. इस्लामाबाद का आरोप है कि काबुल प्रशासन पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) के लड़ाकों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में आतंकी हमलों के जिम्मेदार हैं. हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है.
चीन ने शुरू की मध्यस्थता
इस बीच, क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए चीन आगे आया है. बीजिंग ने सोमवार को घोषणा की कि उसके विशेष दूत यू शियाओयोंग ने शनिवार तक एक सप्ताह का समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने और तत्काल युद्धविराम करने के लिए बिताया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन अपने स्तर पर और अपने चैनलों के माध्यम से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच इस संघर्ष को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि क्षेत्र को और अधिक तबाही से बचाया जा सके.
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