छुट्टी नहीं देने पर कर्मचारी ने मैनेजर की हत्या, केबिन में घुसकर मार दी गोली
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां पंजाब एंड सिंध बैंक की एक शाखा में दिनदहाड़े बैंक मैनेजर की हत्या कर दी गई. बैंक के अंदर हुई इस फायरिंग से वहां मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच भगदड़ मच गई. जानकारी के मुताबिक, बैंक मैनेजर अभिषेक शर्मा और बैंक के सुरक्षा गार्ड रविन्द्र हुड्डा के बीच पिछले कुछ समय से छुट्टी को लेकर विवाद चल रहा था. इसी विवाद का अंत आज एक दर्दनाक हत्या के रूप में हुआ, जिसने बैंकिंग जगत और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है.
छुट्टी को लेकर शुरू हुआ था विवाद
बताया जा रहा है कि गार्ड रविन्द्र हुड्डा छुट्टी मांग रहा था, जिसे लेकर मैनेजर अभिषेक शर्मा के साथ उसकी कहासुनी हुई थी. विवाद इतना बढ़ गया था कि रविन्द्र आज ड्यूटी पर नहीं आया था. इसके बाद मैनेजर अभिषेक ने उसे फोन करके बैंक बुलाया ताकि काम को लेकर बात की जा सके. फोन आने के कुछ देर बाद ही रविन्द्र हुड्डा बैंक पहुंचा, लेकिन उसके इरादे बेहद खतरनाक थे. वह सीधा मैनेजर के केबिन में दाखिल हुआ और बिना कुछ सोचे-समझे अपनी बंदूक से अभिषेक पर गोलियां चला दीं.
केबिन में ही तोड़ दिया दम
गोली लगने के बाद मैनेजर अभिषेक शर्मा लहूलुहान होकर अपनी कुर्सी पर ही गिर पड़े. बैंक के अन्य कर्मचारी जब तक कुछ समझ पाते और उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश करते, अभिषेक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. केबिन के अंदर हुई इस अचानक फायरिंग से पूरे बैंक परिसर में सन्नाटा पसर गया. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी गार्ड वहां से फरार होने की कोशिश करने लगा. पुलिस को सूचना मिलते ही आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू कर दी.
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पटना के रहने वाले थे मैनेजर
मृतक मैनेजर अभिषेक शर्मा बिहार की राजधानी पटना के निवासी थे और गाजियाबाद में बैंक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उनकी पहचान एक मेहनती और सुलझे हुए अधिकारी के रूप में होती थी. वहीं, इस हत्या का आरोपी गार्ड रविन्द्र हुड्डा उत्तर प्रदेश के ही बागपत जिले का रहने वाला है. एक छोटे से विवाद में जिस तरह से उसने कानून को अपने हाथ में लिया और एक अधिकारी की जान ली, उसने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और बैंक के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है. पुलिस का कहना है कि आरोपी गार्ड की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगा दी गई हैं और उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा. बैंक के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि विवाद की असल जड़ और घटनाक्रम की पूरी जानकारी मिल सके. इस घटना के बाद से बैंक कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है.
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Odisha Rajyasabha Elections 2026: ओडिशा में BJP का दबदबा, जानें BJD के खाते में कितनी सीट आईं?
Odisha Rajyasabha Elections 2026: ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चार में से दो सीटों पर जीत हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि एक सीट बीजू जनता दल (BJD) और एक सीट भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई. चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया कि 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं.
BJP के दो उम्मीदवारों की जीत
राज्यसभा चुनाव में BJP ने अपने दो आधिकारिक उम्मीदवारों को जीत दिलाई. पार्टी की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार को विधानसभा में पर्याप्त समर्थन मिला और वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए.
यह जीत बीजेपी के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2024 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी लगातार राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने इस रणनीति को और मजबूती दी है.
दिलीप राय ने दिलचस्प मुकाबले में दर्ज की जीत
चुनाव की चौथी सीट पर सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला. इस सीट पर BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय और बीजेडी के उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता आमने-सामने थे. कड़े मुकाबले के बाद दिलीप राय ने डॉ. होता को हरा दिया.
इस जीत को राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है क्योंकि दिलीप राय को कई विधायकों का समर्थन मिला, जिससे मुकाबले का रुख बदल गया। इससे यह भी संकेत मिला कि राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं.
BJD को मिली एक सीट
विपक्षी बीजू जनता दल (BJD) को इस चुनाव में केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा. पार्टी के उम्मीदवार संतृप्त मिश्रा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए.
हालांकि BJD लंबे समय तक राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन हाल के चुनावों में पार्टी को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने भी यह संकेत दिया कि पार्टी को भविष्य की रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा.
सभी विधायकों ने किया मतदान
ओडिशा विधानसभा के सभी 147 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में मतदान किया. पूर्ण मतदान के कारण परिणाम पूरी तरह स्पष्ट और निर्णायक रहे.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. 2024 के विधानसभा चुनाव में BJP ने BJD के 24 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की थी और अब राज्यसभा चुनाव में भी पार्टी ने अपनी ताकत दिखा दी है. कुल मिलाकर, ओडिशा के राज्यसभा चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है.
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