नेपाल बस हादसे पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जताया दुख, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में हुए सड़क हादसे पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा शोक प्रकट किया है। इस हादसे में तमिलनाडु के 7 भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इस दुखद घटना के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ है और उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। साथ ही, संबंधित अधिकारियों और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ मृतकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने लिखा, नेपाल में हुई दुखद बस दुर्घटना के बारे में जानकर मुझे गहरा दुख हुआ, जिसमें तमिलनाडु के सात भारतीय तीर्थयात्रियों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। इस दुखद घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।
उपराष्ट्रपति ने आगे लिखा, मैंने संबंधित अधिकारियों और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास से यह भी कहा है कि वे सभी आवश्यक सहायता प्रदान करें, जिसमें घायलों को मदद पहुँचाना और मृतकों के पार्थिव शरीर को वापस लाने की व्यवस्था करना शामिल है।
बता दें कि यह दर्दनाक हादसा शनिवार को गोरखा जिले में हुआ था। भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक माइक्रोबस जब तनाहुन जिले के अंबुखैरेनी इलाके (जो मनकामना मंदिर से थोड़ा पश्चिम में है) की ओर जा रही थी, तब शहीद लखन ग्रामीण नगरपालिका के कांतार इलाके में सड़क से फिसलकर एक खाई में गिर गई थी।
हादसे में मारे गए भारतीय तीर्थयात्रियों के शवों को जल्द स्वदेश लाने के लिए भारतीय दूतावास सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारतीय दूतावास ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों ने बचाव कार्य चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
स्थानीय पुलिस के अनुसार, माइक्रोबस में सवार तीर्थयात्री मनकामना मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद लौट रहे थे तभी बस खाई में जा गिरी। इस हादसे में सात भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत हो गई जबकि सात अन्य भारतीय तीर्थयात्री घायल हो गए।
--आईएएनएस
पीएसके
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झारखंड सरकार की नई पहल, अब सालों से अटके मामलों का होगा त्वरित निपटारा, सभी विभागों को मिला नया आदेश
Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों को तेजी से निपटाने के लिए एक नई पहल शुरू की है. अब इन मामलों का समाधान मध्यस्थता (मीडिएशन) के माध्यम से करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि अदालतों और सरकारी विभागों पर मुकदमों का बोझ कम किया जा सके.
क्या है अभियान का उद्देश्य
यह कदम देशभर में चल रहे “मीडिएशन फॉर द नेशन 2.0” अभियान के तहत उठाया गया है. इस अभियान का उद्देश्य ऐसे मामलों को आपसी सहमति से सुलझाना है, जिन्हें अदालत में लंबा समय लग सकता है. झारखंड सरकार ने इस अभियान को तेज करने के लिए सभी विभागों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं.
आवश्यक कदम उठाने के दिए निर्देश
राज्य के विधि विभाग के प्रधान सचिव नीरज कुमार श्रीवास्तव ने इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और विभागाध्यक्षों को पत्र भेजा है. इस पत्र में कहा गया है कि वे अपने-अपने विभागों में ऐसे मामलों की पहचान करें, जिन्हें मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है. साथ ही इन मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
बैठक में लिया गया था फैसला
दरअसल, 24 फरवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि राज्य के हर विभाग को एक नोडल पदाधिकारी नियुक्त करना होगा. यह अधिकारी अपने विभाग में लंबित मामलों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि कौन-कौन से मामले मध्यस्थता के जरिए सुलझाए जा सकते हैं.
नोडल पदाधिकारी की क्या होगी जिम्मेदारी?
नोडल पदाधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह ऐसे मामलों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करे. इसके बाद यह सूची सीधे झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सदस्य सचिव को भेजी जाएगी. झालसा इन मामलों को मध्यस्थता की प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने में मदद करेगा.
लंबित मुकदमों की संख्या हो कम
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या को कम करना है. कई बार छोटे या आपसी सहमति से सुलझाए जा सकने वाले मामलों में भी लंबी कानूनी प्रक्रिया चलती रहती है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती है. मीडिएशन की प्रक्रिया के जरिए ऐसे मामलों का समाधान जल्दी और सरल तरीके से किया जा सकता है.
पुलिस मुख्यालय ने भी सभी जिलों को जारी किया पत्र
बैठक के बाद राज्य पुलिस मुख्यालय ने भी इस संबंध में सभी जिलों को पत्र जारी किया है. पुलिस विभाग को भी निर्देश दिया गया है कि वह अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करे और ऐसे मामलों की पहचान करे जिन्हें मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है.
सभी विभागों को जल्द देने होंगे नोडल अधिकारियों के मांग
सरकार ने सभी विभागों से यह भी कहा है कि वे अपने-अपने नोडल अधिकारियों के नाम जल्द से जल्द झालसा कार्यालय को भेजें. इसके साथ ही उन लंबित मामलों की सूची भी उपलब्ध कराई जाए जिन्हें मीडिएशन के लिए उपयुक्त माना गया है. विधि विभाग के प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. इसलिए सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपने यहां लंबित मामलों की समीक्षा करें और उपयुक्त मामलों की सूची तैयार करें.
न्यायिक प्रक्रिया होगी सरल
सरकार का मानना है कि यदि इस प्रक्रिया को सही तरीके से लागू किया गया, तो न केवल अदालतों पर मुकदमों का दबाव कम होगा, बल्कि लोगों को भी लंबे समय तक न्याय के इंतजार से राहत मिलेगी. मध्यस्थता के जरिए कई मामलों का समाधान कम समय में और आपसी सहमति से किया जा सकता है, जिससे विवाद भी जल्दी समाप्त हो जाते हैं. कुल मिलाकर, झारखंड सरकार की यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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