बिहार सरकार की पहल, फिर से शुरू होगी 120 साल पुरानी मढ़ौरा चीनी मिल; निरीक्षण करने पहुंचे तमिलनाडु के निवेशक
Bihar News: बिहार के सारण जिले में स्थित ऐतिहासिक मढ़ौरा चीनी मिल को दोबारा चालू करने की दिशा में अब वास्तविक हलचल दिखाई देने लगी है. कई वर्षों से बंद पड़ी इस मिल को लेकर सरकार की पहल अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है. रविवार को तमिलनाडु से आए निवेशकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मिल परिसर का दौरा किया और यहां की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण किया. इस दौरे से क्षेत्र के लोगों और किसानों में नई उम्मीद जगी है.
पूरे परिसर का किया निरीक्षण
निवेशकों के इस प्रतिनिधिमंडल ने मिल के पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने वहां मौजूद पुराने ढांचे, मशीनरी और उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया. साथ ही यह भी समझने की कोशिश की कि अगर मिल को दोबारा शुरू करना हो तो किस तरह के सुधार और निवेश की जरूरत पड़ेगी.
निरीक्षण से जगी नई उम्मीद
कई सालों से बंद रहने के कारण मढ़ौरा चीनी मिल धीरे-धीरे जर्जर होती चली गई है. मिल परिसर का एक बड़ा हिस्सा अब खंडहर जैसा नजर आने लगा है. ऐसे में जब बाहरी निवेशकों ने यहां आकर संभावनाओं का आकलन किया, तो स्थानीय लोगों के बीच उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी.
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का मानना है कि अगर यहां के आधारभूत ढांचे को आधुनिक तकनीक के साथ फिर से विकसित किया जाए तो यह मिल एक बार फिर क्षेत्र के आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बन सकती है. इससे न सिर्फ चीनी उत्पादन बढ़ेगा बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिल सकता है.
सात निश्चय-3 योजना से मिला नया अवसर
बिहार सरकार राज्य में बंद पड़ी पुरानी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने के लिए कई प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत नई पहल शुरू की गई है. इस योजना के माध्यम से राज्य की बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ नई चीनी मिलें स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है.
सरकार का लक्ष्य राज्य में करीब 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का है. इसी पहल के तहत तमिलनाडु की SNJ Group of Companies के निवेशकों ने मढ़ौरा चीनी मिल में संभावनाएं तलाशने के लिए यह दौरा किया. अगर निवेशकों को यहां पर्याप्त संभावनाएं नजर आती हैं तो आने वाले समय में मिल को दोबारा शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं.
किसानों से की सीधी बातचीत
निरीक्षण के दौरान निवेशकों ने सिर्फ मिल परिसर ही नहीं देखा, बल्कि आसपास के गांवों में जाकर गन्ना किसानों से भी बातचीत की. किसानों ने उन्हें गन्ना उत्पादन से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में बताया. उन्होंने खेती की लागत, मजदूरी, सिंचाई, बाजार और भुगतान से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी दी.
निवेशकों ने खेतों में जाकर गन्ने की फसल की स्थिति भी देखी. उनका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि यदि मिल दोबारा शुरू होती है तो कच्चे माल यानी गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति हो पाएगी या नहीं. किसानों ने भी उम्मीद जताई कि अगर मिल फिर से शुरू होती है तो उन्हें अपनी फसल का बेहतर बाजार मिलेगा.
ऐतिहासिक पहचान रखती है यह मिल
मढ़ौरा चीनी मिल का इतिहास काफी पुराना और महत्वपूर्ण है. इसकी स्थापना वर्ष 1904 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. उस समय यह बिहार की शुरुआती चीनी मिलों में से एक थी और आसपास के किसानों की आय का बड़ा स्रोत मानी जाती थी.
बढ़ेंगी रोजगार और आर्थिक गतिविधियां
समय के साथ-साथ कई कारणों से यह मिल बंद हो गई और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा. लेकिन अब सरकार की पहल और निजी निवेशकों की दिलचस्पी से इस ऐतिहासिक मिल के फिर से शुरू होने की उम्मीद एक बार फिर मजबूत होती दिखाई दे रही है. यदि यह योजना सफल होती है तो इससे न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि पूरे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी.
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