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मध्य पूर्व संकट: तेहरान के गवर्नर बोले, '12,000 रिहायशी मकानों को पहुंचा नुकसान'

तेहरान, 16 मार्च (आईएएनएस)। सैन्य संघर्ष के कारण ईरान की बड़ी आबादी मुश्किलों का सामना कर रही है। राजधानी तेहरान को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि तेहरान में अमेरिका-इजरायल के हमलों के कारण लगभग 12,000 रिहायशी मकानों को आंशिक या पूरी तरह नुकसान पहुंचा है। यह जानकारी तेहरान के गवर्नर मोहम्मद सादेघ मोतमेदियन ने दी है।

गवर्नर के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में कई रिहायशी इमारतें प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि तेहरान शहर के भीतर मुआवजे से जुड़े दावों की प्रक्रिया संभालने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी।

उन्होंने पहले यह भी बताया था कि युद्ध के शुरुआती करीब 15 दिनों में ही 10,000 से अधिक गैर-सैन्य आवासीय इकाइयों को नुकसान पहुंच चुका था। हमलों में केवल मकान ही नहीं बल्कि व्यावसायिक केंद्र, उत्पादन इकाइयां, शैक्षणिक संस्थान और स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के कारण ईरान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और नागरिक इलाकों को नुकसान पहुंचा है, जबकि मारे गए नागरिकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, अमेरिका और इजरायल के हमले तेज हो गए हैं; इन हमलों में न केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है, बल्कि आम नागरिकों से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को भी नहीं बख्शा गया है। इजरायल ने अब खुले तौर पर इस रणनीति को स्वीकार कर लिया है। आईडीएफ ने खुद फारसी भाषा वाले सोशल मीडिया अकाउंट से, 10 मार्च को ऐलान किया कि तेहरान में मौजूद आतंकवादी शासन के बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले किए जाएंगे।

स्कूल, अस्पताल और ईंधन के गोदाम अब इस संघर्ष के केंद्र में आ गए हैं; यह संघर्ष अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के एकमात्र उद्देश्य से कहीं आगे निकल चुका है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 611 नाविकों के साथ भारतीय झंडे वाले 22 जहाज मौजूद: जलमार्ग मंत्रालय

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारत सरकार के जलमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय झंडे वाले 22 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में मौजूद हैं जिन पर 611 नाविक सवार हैं और पिछले 24 घंटे में किसी भी तरह के हादसे की खबर नहीं है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी भी यूएई से 14 मार्च को रवाना हो चुका है। प्रेस ब्रीफिंग में ये जानकारी दी गई।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर आ चुका है। ”

उन्होंने बताया कि जहाज के पहुंचने से पहले ही बंदरगाह पर सभी जरूरी दस्तावेजी प्रक्रिया, प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग और बाकी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं, ताकि इस जहाज से माल उतारने में कोई विलंब न हो।

सिन्हा ने विश्वास दिलाया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, पिछले 24 घंटों में किसी तरह की घटना की सूचना नहीं मिली है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर जहाज और उसके क्रू मेंबर के साथ संपर्क बना हुआ है। फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अभी भी भारत के झंडे वाले 22 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 611 भारतीय नाविक सवार हैं।

सिन्हा ने बताया कि यूएई से चली शिप 17 मार्च तक क्रूड लेकर भारत पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय झंडा वाले जहाज ‘जग लाडकी’ ने 14 मार्च को यूएई से रवाना होकर करीब 81 हजार टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर यात्रा शुरू की है। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह जहाज कल मुंद्रा बंदरगाह पहुंच जाएगा।”

ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संघर्ष में फंसे नागरिकों को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हमारे करीब 90 नागरिक ईरान से जमीन के रास्ते अजरबैजान पहुंचे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने मदद की। दूतावास ने उन्हें वीजा दिलाने और जरूरी इमिग्रेशन औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया।”

उन्होंने कहा, “जिन 550 लोगों के ईरान से आर्मेनिया पहुंचने की बात हमने पहले बताई थी, उनमें 284 लोग ऐसे हैं जो ईरान तीर्थ यात्रा पर गए थे। ये लोग फिलहाल इन दोनों देशों में मौजूद हैं। इनमें से कुछ भारत लौट चुके हैं और बाकी लोग अगले कुछ दिनों में लौट आएंगे।”

जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास सभी कठिन हालात के बावजूद पूरी तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा, पिछले कुछ दिनों में दूतावास ने तेहरान के बाहर मौजूद भारतीय छात्रों को भी ज्यादा सुरक्षित शहरों में पहुंचाने में मदद की है।

--आईएएनएस

केआर/

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