'ये भारतीयों की मौत का कारण बन सकता है...', काव्या मारन के पाकिस्तानी क्रिकेटर को खरीदने पर भड़के सुनील गावस्कर, दिया ऐसा बयान
Sunil Gavaskar On Kavya Maran: हाल ही में काव्या मारन ने द हंड्रेड की नीलामी से अपनी टीम के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदा. इसके बाद से ही मामले पर बवाल मचा हुआ है. सोशल मीडिया पर तमाम यूजर्स ने काव्या मारन को खरी-खोटी सुनाई और उन्हें देशद्रोही तक कह डाला. अब इस बीच पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने इस मुद्दे पर तीखा बयान दिया है. उनका कहना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदना सही नहीं है, क्योंकि इससे अप्रत्यक्ष रूप से पैसा तो ऐसे सिस्टम को मिल रहा है, जो भारतीयों की मौत का कारण बनता है.
क्या बोले सुनील गावस्कर?
पूर्व भारतीय दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर अपनी बातों को बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं. अब गावस्कर ने काव्या मारन द्वारा द हंड्रेड में पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीदने को लेकर बयान दिया है. उनका कहना है कि यदि कोई भारतीय की मालिकाना हक वाली टीम पाकिस्तानी खिलाड़ी को खरीददती है, तो अप्रत्यक्ष रूप से ये पैसे ऐसी सरकार के पास जाते हैं, जिसका इस्तेमाल भारतीयों के खून के लिए किया जा सकता है.
गावस्कर ने मिड-डे में अपने कॉलम में लिखा, "यदि मालिक भारतीय है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे सिस्टम को पैसा दे रहा है जो भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत का कारण बन सकता है. क्या एक ऐसे टूर्नामेंट को जीतना भारतीय जानों से क्या ज्यादा जरूरी है, जिसमें दुनिया के बहुत कम देशों के खिलाड़ी खेलते हैं."
काव्या मारन ने अबरार अहमद को खरीदा
गुरुवार को विदेशी फ्रेंचाइजी लीग 'द हंडेड' के अपकमिंग सीजन के लिए हुई नीलामी में पाकिस्तानी मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद काव्या मारन की टीम ने खरीदकर अपने साथ जोड़ा. लेकिन, अबरार को खरीदने के बाद सनराइजर्स फ्रेंचाइजी को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.
सनराइजर्स ने 255,000 USD (2,35,69,420.50 भारतीय रुपये) में अबरार को खरीदकर द हंड्रेड में किसी भारतीय स्वामित्व वाली टीम द्वारा साइन किए जाने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी बन गए.
टीम का एक्स हैंडिल हुआ सस्पेंड
द हंड्रेड की नीलामी में मालिक काव्या मारन को मुख्य कोच डेनियल वेटोरी के साथ टेबल पर बैठे देखा गया था. वहीं, जब काव्या मारन की टीम ने पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को खरीदा, तो सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. भारतीय फैंस काव्या पर नाराज दिखे और उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की.
अबरार को टीम में शामिल करने के कुछ ही घंटों बाद, सनराइजर्स लीड्स के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया. प्लेटफॉर्म ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, लेकिन जब कोई अकाउंट खोलने की कोशिश करता है, तो एक पॉप-अप मैसेज दिखाई देता है, "अकाउंट सस्पेंड." X उन अकाउंट्स को सस्पेंड करता है जो X के नियमों का उल्लंघन करते हैं.
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ओजोन थेरेपी को लेकर पतंजलि विश्वविद्यालय में जागरूकता कार्यशाला, छात्रों ने सीखे उपचार के तरीके
Patanjali University: हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय के नैचुरोपैथी और योगिक साइंसेज फैकल्टी (FNYS) में ओजोन थेरेपी पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरोपैथी (NIN), पुणे के सहयोग से आयोजित हुआ. कार्यशाला का आयोजन पतंजलि फेज-2 के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया. इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों, इंटर्न और फैकल्टी में ओजोन थेरेपी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके चिकित्सीय उपयोगों की जानकारी देना था. कार्यक्रम में डॉक्टरों, शिक्षकों, इंटर्न और छात्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया.
विशेषज्ञों ने साझा की वैज्ञानिक जानकारी
कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों का संचालन NIN, पुणे के मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रणव खवाले और डॉ. मार्शलेन एंटनी ने किया. दोनों विशेषज्ञों ने ओजोन थेरेपी के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह थेरेपी कई स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन में उपयोगी मानी जा रही है. सत्र के दौरान इसके चिकित्सीय लाभ, उपयोग की स्थितियां और सुरक्षा उपायों पर भी चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि आधुनिक समय में नैचुरोपैथी और इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर में ओजोन थेरेपी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है.
प्रैक्टिकल डेमो और इंटरएक्टिव सेशन
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रैक्टिकल डेमो रहा. इसमें प्रतिभागियों को ओजोन थेरेपी में उपयोग होने वाले उपकरणों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई. साथ ही क्लीनिकल प्रोटोकॉल को भी समझाया गया. इंटरएक्टिव चर्चा सत्र के दौरान छात्रों और इंटर्न ने विशेषज्ञों से सवाल पूछे. इससे उन्हें विषय को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला.
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई अतिथि
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख अतिथि भी मौजूद रहेय इनमें पतंजलि वेलनेस के सेवा प्रमुख स्वामी बजरंगदेव, साध्वी देव भूमि, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मयंक अग्रवाल, रजिस्ट्रार डॉ. दीपेश कुमार सक्सेना और डॉ. ए.के. सिंह शामिल थे. इसके अलावा पतंजलि वेलनेस के सीईओ डॉ. रवि पंडित, नैचुरोपैथी और योगिक साइंसेज फैकल्टी के डीन डॉ. तोरण सिंह, निदेशक डॉ. अनिल वर्मा और विभागाध्यक्ष डॉ. कनक सोनी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान स्वामी बजरंगदेव ने संसाधन विशेषज्ञों को सम्मानित किया. उन्हें अकादमिक और क्लीनिकल क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मान दिया गया.
शिक्षकों और स्टाफ का मिला सहयोग
कार्यशाला में FNYS के कई फैकल्टी सदस्य भी शामिल हुए. इनमें डॉ. नागराज होसमनी, डॉ. संगीता सिंह, डॉ. सुमनलता, डॉ. ललित कुमार, डॉ. नयन बिस्वास, डॉ. स्वाति, डॉ. तनु, डॉ. आयुषी कामदार, डॉ. लक्ष्मी नायक और डॉ. निधि पाठक शामिल रहे. कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता सिंह ने किया. अंत में डॉ. कनक सोनी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया. उन्होंने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टाफ सदस्यों अनिल सिंह राजपूत, सौरभ सिंह, अभिषेक सैनी और राहुल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा.
शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने की पहल
ऐसी शैक्षणिक पहलें पतंजलि विश्वविद्यालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरोपैथी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जिसके तहत वे नैचुरोपैथी और इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर के क्षेत्र में शिक्षा, शोध और क्लीनिकल प्रैक्टिस को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं.
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