सरकार की जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर कार्रवाई के बीच एलपीजी की बुकिंग में आई गिरावट
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। एलपीजी की उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच आशंका कम होने और सरकारों द्वारा राज्यों में जमाखोरी एवं ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ अभियान चलाए जाने के चलते एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की संख्या में गिरावट देखने को मिली है। यह जानकारी सोमवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दी गई।
पीआईबी इंडिया ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया किया कि 14 मार्च को 77 लाख एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग हुई, यह आंकड़ा 13 मार्च को 88.8 लाख पर था।
पोस्ट में आगे कहा गया,एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में ऑनलाइन की हिस्सेदारी बढ़कर 87 प्रतिशत हो गई है। यह आंकड़ा पहले 84 प्रतिशत था। साथ ही, किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर गैस के समाप्त होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
एलपीजी जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों भर में छापेमारी की जा रही है और 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थिति पर नजर रखने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
बयान में उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे घबराकर बुकिंग न करें, डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और एलपीजी वितरकों के पास अनावश्यक रूप से जाने से बचें।
इस बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति विशेष रूप से घरों और अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुनिश्चित कर रही है।
एलपीजी की मांग को पूरा करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।
--आईएएनएस
एबीएस/
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'बीसी सखी योजना' एक सफल मॉडल, UP सरकार की स्कीम से महिलाओं की कमाई में जमकर होगा इजाफा
केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है. इस मामले में यूपी सरकार का ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और गांव तक बैंकिंग सेवाओं को पहुंचाने को लेकर बीसी सखी योजनाओं का एक सफल मॉडल पेश किया है. राज्य सरकार की पहल के जरिए महिलाओं को न केवल गांवों में लोगों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराएगी. उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती भी मिलेगी.
बैंकिंग सेवाओं में ग्रामीण महिलाओं के योगदान को बढ़ाया जा रहा है. गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के मामले में यूपी देश के पहले पायदान पर पहुंच गया है. इस रैंकिंग में मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. यूपी सरकार की बीसी सखी योजना क्या है और इसमें महिलाओं की किस तरह से कमाई होती है.
क्या है बीसी सखी योजना?
बीसी सखी का पूरा नाम बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी है. यह योजना यूपी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जारी है. इस योजना से जुड़कर करीब 40 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गांव में सक्रिय हैं. महिलाएं ग्रामीणों को उनके घर के करीब बैंकिंग सेवाओं को उपलब्ध कराती हैं. इसके बदले में कमीशन के रूप में बेहतर कमाई भी कर रही हैं. औसतन एक बीसी सखी की मासिक आय 10 से 15 हजार रुपये तक है. वहीं कई महिलाएं अपने काम स्तर पर 40 से 50 हजार तक कमा रही है.
प्रशिक्षण देकर गांवों में लगाया गया
इस योजना में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर गांवों में लगाया गया है. इन महिलाओं को माइक्रो एटीएम और डिजिटल उपकरण भी दिए गए हैं. इनकी सहायता से वह गांव के लोगों को बैंकिंग सेवाएं भी देती हैं. इसके जरिए ग्रामीणों को पैसे निकालने, खाते में जमा करने, आधार आधारित पेमेंट करने के साथ दूसरी बैंकिंग सुविधा लेने को लेकर दूर बैंक शाखा जाने की आवश्यकता नहीं होगी.
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