चुनाव से पहले एक्शन मोड में ECI: बदले गए बंगाल के मुख्य सचिव और DGP, कई बड़े अफसरों पर भी गिरी गाज
West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग (EC) ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ी सर्जरी की है। आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्य की वर्तमान मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और पुलिस महानिदेशक (DGP) पीयूष पांडे को उनके पदों से हटा दिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनावी जिम्मेदारी में शामिल नहीं किया जाएगा। यह फैसला राज्य में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
सिद्धार्थ नाथ गुप्ता संभालेंगे पुलिस की कमान
राज्य के नए पुलिस महानिदेशक (DG & IGP) के रूप में 1992 बैच के अनुभवी IPS अधिकारी सिद्धार्थ नाथ गुप्ता को नियुक्त किया गया है। गुप्ता को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर बेहद सख्त और कुशल अधिकारी माना जाता है। उनके पास तीन दशकों का लंबा अनुभव है, जिसमें उन्होंने नंदीग्राम हिंसा, लालगढ़ का नक्सली आंदोलन और दार्जिलिंग के गोरखालैंड आंदोलन जैसी बेहद जटिल स्थितियों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है। राज्य में सांप्रदायिक तनाव और दंगों जैसी स्थितियों को संभालने का उनका अनुभव आगामी चुनावों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुष्यंत नारियाला बने नए मुख्य सचिव
पुलिस प्रशासन के साथ-साथ राज्य की नौकरशाही में भी शीर्ष स्तर पर बदलाव किया गया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी दुष्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने संघमित्रा घोष को प्रमुख सचिव (गृह और पर्वतीय मामले) के पद पर तैनात करने का आदेश दिया है। आयोग ने राज्य सरकार को सख्त लहजे में कहा है कि इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और नए अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना कार्यभार ग्रहण करें।
कोलकाता पुलिस कमिश्नर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बदले
इस फेरबदल की आंच कोलकाता पुलिस मुख्यालय तक भी पहुंची है। अजय कुमार नंद को कोलकाता का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जो सुप्रतिम सरकार की जगह लेंगे। इनके अलावा, नटराजन रमेश बाबू को महानिदेशक (सुधारात्मक सेवाएं) और अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) के पद पर तैनात किया गया है।
बता दें कि बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग और राज्य की तृणमूल सरकार के बीच पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों पर जारी खींचतान के बीच यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।
Parliament House News: संसद भवन में अचानक बजा खतरे का सायरन, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; जांच में सामने आई वजह
देश की राजधानी दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब अचानक खतरे का सायरन बजने लगा। सायरन की आवाज सुनते ही परिसर में मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए पूरे क्षेत्र को घेर लिया और स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद भवन परिसर में लगे स्वचालित सुरक्षा सिस्टम ने अलर्ट जारी किया था। सायरन बजते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की क्विक रिएक्शन टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए गए। एहतियात के तौर पर संसद भवन के सभी प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जवानों ने मोर्चा संभाल लिया और आने-जाने वाले वाहनों की सख्त जांच शुरू कर दी।
तेज हवा से सक्रिय हुआ सुरक्षा सेंसर
जांच में सामने आया कि तेज हवा के कारण परिसर में लगा एक बूम बैरियर हिल गया था। यह बैरियर सुरक्षा सेंसर से जुड़ा हुआ था, जिसके हिलने से सेंसर सक्रिय हो गया और स्वचालित सुरक्षा प्रणाली ने खतरे का अलार्म बजा दिया।
सायरन बजते ही सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर की निगरानी बढ़ा दी ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति या वाहन संसद परिसर में प्रवेश न कर पाए।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण, कोई खतरा नहीं
घटना की जानकारी मिलते ही CISF के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बूम बैरियर और अन्य सुरक्षा उपकरणों की भी जांच कराई। शुरुआती जांच में किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे के संकेत नहीं मिले।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना पूरी तरह तकनीकी कारणों से हुई थी। तेज हवा के कारण बैरियर हिलने से सेंसर सक्रिय हो गया और ऑटोमेटेड सिस्टम ने अलर्ट जारी कर दिया। जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संसद भवन परिसर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया।
हालांकि इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा उपकरणों की दोबारा जांच करने और सिस्टम को और मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।
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