भारत में सबसे पहले किसे मिला 'Oscar Award', 99% लोग फिल्म का नाम तक नहीं जानते होंगे?
Who won first Oscar in India: इस समय पूरी दुनिया में अकादमी अवार्ड 2026 (Academy Awards 2026) यानी ऑस्कर की काफी चर्चा हो रही है. इस बार हॉलीवुड एक्टर माइकल बी जॉर्डन (Michael B. Jordan) ने फिल्म 'सिनर्स' (Sinners) के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीतकर सुर्खियां बटोरी हैं. इसी के साथ सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच ऑस्कर की खूब बातें हो रही हैं कि भारत के लिए सबसे पहला ऑस्कर किसने जीता था. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि सबसे पहले भारत में ऑस्कर किसने जीता और उस फिल्म का क्या नाम है.
भानू अथैया ने रचा था इतिहास
भारत के लिए पहला ऑस्कर मशहूर कॉस्ट्यूम डिजाइनर भानु अथैया (Bhanu Athaiya) ने जीता था. उन्होंने यह सम्मान 1983 में फिल्म गांधी (Gandhi) में शानदार कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए हासिल किया था. भानू अथैया इंडियन सिनेमा की जानी-मानी डिजाइनर रही हैं. फिल्मों में किरदारों के कपड़े कैसे दिखेंगे, किस दौर के होंगे और कहानी से कैसे मेल खाएंगे. यह सब तय करने में उनका बड़ा योगदान था.
भारत के नाम दर्ज कराई बड़ी अचीवमेंट
फिल्म गांधी में भी उन्होंने उसी समय के हिसाब से कपड़े डिजाइन किए थे, जब भारत में आजादी की लड़ाई चल रही थी. 'गांधी जी' का सादा पहनावा, आम लोगों के कपड़े और ब्रिटिश अधिकारियों की ड्रेस. हर चीज को बहुत ध्यान से तैयार किया गया था. उनके इस शानदार काम की वजह से उन्हें दुनिया के सबसे बड़े फिल्म अवॉर्ड मंच अकेडमी अवॉर्ड (Academy Awards) में सम्मान मिला और भारत के नाम एक बड़ी अचीवमेंट दर्ज हो गई.
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फिल्म 'गांधी' के बारे में
बता दें कि फिल्म गांधी का निर्देशन मशहूर ब्रिटिश निर्देशक रिचर्ड अटेनबरो (Richard Attenborough) ने किया था. यह फिल्म राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के जीवन पर आधारित थी. फिल्म में गांधी जी के बचपन से लेकर भारत की आजादी की लड़ाई तक के कई अहम पल दिखाए गए थे. इसमें यह भी दिखाया गया कि कैसे उन्होंने अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलकर लोगों को एकजुट किया. फिल्म में गांधी जी का किरदार एक्टर बेन किंग्सले (Ben Kingsley) ने निभाया था. उनकी एक्टिंग को भी दुनियाभर में काफी पसंद किया गया.
अचीवमेंट को किया जाता है याद
फिल्म की सबसे खास बात यह थी कि इसमें उस दौर के माहौल को बहुत सच्चाई के साथ दिखाया गया. हजारों लोगों के कपड़े, अलग-अलग किरदारों की ड्रेस और ऐतिहासिक घटनाओं को बिल्कुल असली जैसा बनाने में भानू अथैया का रोल बहुत अहम था. आज जब भी ऑस्कर अवॉर्ड की बात होती है, तो भारत की इस पहली अचीवमेंट को जरूर याद किया जाता है. माइकल बी. जॉर्डन की ताजा जीत ने एक बार फिर लोगों को याद दिला दिया है कि भारतीय कलाकार भी लंबे समय से इस इंटरनेशनल मंच पर अपनी पहचान बनाते आए हैं.
भानु अथैया के बारे में
भानु अथैया ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्मों में काम किया. इनमें 'लगान' (Lagaan), 'चांदनी' (Chandni), 'हम दिल दे चुके सनम' (Hum Dil De Chuke Sanam), और 'उमराव जान' (Umrao Jaan) जैसी फिल्में शामिल हैं. उन्होंने हर फिल्म में किरदारों और कहानी के हिसाब से बेहतरीन कपड़े डिजाइन किए. उनके डिजाइनों ने किरदारों को जीवंत बनाया और फिल्म की कहानी को और मजबूत किया. गौरतलब है कि भानु अथैया का निधन 15 फरवरी 2020 को हुआ था, लेकिन उनके काम और योगदान को इंडियन सिनेमा में हमेशा याद किया जाएगा. उनकी मेहनत और कला ने उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर भी पहचान दिलाई और कई नए डिजाइनरों को मोटिवेट भी किया.
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ईरान ने ट्रंप के समझौते वाले दावे को किया खारिज, बैकफुट पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान, अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। वहीं, ईरान ने अपनी तरफ से इन सभी दावों को खारिज कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि हम किसी तरह के सीजफायर या किसी बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।
ईरानी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान इन हमलों को खत्म करने के लिए समझौता करने को तैयार नहीं है। वैश्विक मुद्दों पर अक्सर एकतरफा दावा करने वाले ट्रंप ईरानी विदेश मंत्री के बयान के बाद अपना बयान बदलते नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताजा बयान में कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है, क्योंकि युद्ध अपने तीसरे हफ्ते में है, लेकिन तेहरान इसे खत्म करने के लिए किसी डील के लिए तैयार नहीं है।
ट्रंप ने इस दौरान ये भी बताया कि मिडिल ईस्ट और वैश्विक बाजार में जारी उथल-पुथल और तनाव को रोकने के लिए अमेरिका सभी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है। हालांकि, उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। लेकिन, उन्होंने बताया कि वह अन्य देशों के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत में लगे हैं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने हार्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए सभी देशों से अपने वॉरशिप वहां भेजने की अपील की थी। हालांकि, ट्रंप को इसमें सफलता हाथ नहीं लगी। अब तक किसी भी देश ने ट्रंप के इस फैसले को अपना समर्थन नहीं दिया है।
वहीं, ट्रंप के पहले वाले दावों को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफतौर पर खारिज करते हुए कहा था कि इस गैर-कानूनी युद्ध के खिलाफ जितना समय लगेगा, तेहरान अपनी रक्षा के लिए तैयार है। विदेश मंत्री ने कहा, हमने कभी सीजफायर के लिए नहीं कहा और हमने कभी बातचीत के लिए भी नहीं कहा। हम अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं, जब तक जरूरत हो।
उन्होंने कहा कि ईरान तब तक अपने ऑपरेशन जारी रखेगा, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर नहीं पहुंच जाते कि यह एक गैर-कानूनी युद्ध है, जिसमें कोई जीत नहीं है।
अराघची ने आगे कहा, हमें कोई कारण नहीं दिखता कि हमें अमेरिकियों से बात क्यों करनी चाहिए। जब उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया, तब हम उनसे बात कर रहे थे और वह दूसरी बार था।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को कहा था कि ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जब तक युद्ध जारी है, वाशिंगटन सीजफायर समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा, ईरान एक डील करना चाहता है और मैं इसे नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी काफी अच्छी नहीं हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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