ट्रंप को ईरान का बड़ा झटका, ये वाले दांव चल कर पलट दी हारी हुई बाजी!
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल की सैन्य रणनीति को चुनौती देने के लिए कई कदम उठाए हैं. दरअसल शुरू से ही ईरान के लिए ये माना जा रहा था कि यूएस और इजरायल के आगे वो ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगा. लेकिन ईरान ने अपनी खास रणनीति के जरिए दुनिया के सामने युद्ध की बाजी को अपने पक्ष में कुछ हद तक बदल लिया है. फरवरी 2026 के अंत में युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इस अभियान को Operation Lion’s Roar कहा गया.
इन हमलों के बाद ईरान ने कई रणनीतिक कदम उठाकर हालात को पलटने की कोशिश की. विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की ऐसी रणनीतिक चालें चलीं कि अमेरिका-इजराइल का टेंशन बढ़ा दिया. यही नहीं जंग के समीकरण को बदलने का प्रयास किया है.
1. मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब
ईरान ने अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए पलटवार किया. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों का निशाना इजराइल के शहरों, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के बेस बने। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया.
2. होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर दबाव बनाकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की कोशिश की. इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है. संघर्ष के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और तेल कीमतों में तेजी देखी गई.
3. क्षेत्रीय सहयोगियों को सक्रिय करना
ईरान ने अपने सहयोगी समूहों और क्षेत्रीय नेटवर्क को भी सक्रिय किया. लेबनान में मौजूद हेजबुल्लाह जैसे संगठनों ने इजराइल के खिलाफ हमले तेज किए. इससे युद्ध केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में फैलने का खतरा बढ़ गया.
4. साइबर युद्ध और सूचना रणनीति
इस संघर्ष में साइबर युद्ध भी अहम भूमिका निभा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने पहले ईरान के कम्युनिकेशन सिस्टम को साइबर हमलों से बाधित किया था, जिसके जवाब में ईरान और उससे जुड़े हैकर समूहों ने भी साइबर गतिविधियां तेज कर दीं.
5. वैश्विक दबाव बनाने की कोशिश
ईरान ने कूटनीतिक स्तर पर भी दबाव बनाने की कोशिश की है. तेल आपूर्ति में बाधा और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक स्तर पर युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई.
बदलता हुआ युद्ध संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष में सैन्य ताकत के साथ-साथ आर्थिक, साइबर और रणनीतिक मोर्चों पर भी मुकाबला हो रहा है. ईरान की इन रणनीतियों ने अमेरिका और इजराइल के लिए युद्ध को अधिक जटिल बना दिया है और पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति को अनिश्चित बना दिया है.
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देश में 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स; 17,677 ग्रामीण क्षेत्रों में: सरकार
नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि देश में कुल 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं (1 मार्च 2026 तक), जिनमें से 17,677 डिस्ट्रीब्यूटर्स ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इन डिस्ट्रीब्यूटर्स को तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के 214 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट्स के जरिए आपूर्ति की जा रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एलपीजी की पहुंच बढ़ाने के लिए अप्रैल 2016 से फरवरी 2026 के बीच 8,037 नए डिस्ट्रीब्यूटर्स शुरू किए गए। इनमें से 7,444 यानी करीब 93 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए पूरे देश में आईवीआरएस और एसएमएस के जरिए एलपीजी रीफिल बुकिंग की सुविधा शुरू की गई है। इसके तहत बुकिंग, कैश मेमो बनने और डिलीवरी जैसे महत्वपूर्ण चरणों पर उपभोक्ताओं को एसएमएस अलर्ट भेजे जाते हैं।
इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) भी शुरू किया है, जो एसएमएस के जरिए उपभोक्ता को भेजा जाता है और डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को दिखाने पर ही सिलेंडर की पुष्टि के साथ डिलीवरी होती है।
उपभोक्ताओं को सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में ओएमसी को 22,000 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 30,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी गई है।
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) मई 2016 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को मुफ्त जमा राशि के साथ एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था।
उन्होंने बताया कि 1 मार्च 2026 तक देश में उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 10.56 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की खुदरा बिक्री कीमत 913 रुपए है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सरकार 300 रुपए प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी देती है, जिसके बाद उन्हें प्रभावी रूप से 613 रुपए में 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर (दिल्ली में) मिल जाता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बना हुआ है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इन ईंधनों के आयात की जरूरत नहीं पड़ती। देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार बनाए हुए हैं।
मंत्रालय ने कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देती है और घरों, अस्पतालों तथा शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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